57 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स पर जिंदल पावर का दांव, CCI से मिली बड़ी मंजूरी!

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने जिंदल पावर लिमिटेड को जयप्रकाश एसोसिएट्स (JAL) के अधिग्रहण की मंजूरी दी है. यह अधिग्रहण IBC के तहत कॉर्पोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया (CIRP) में हो रहा है. JAL पर 57,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है. कंपनी के पास रियल एस्टेट, होटल और सीमेंट प्रोजेक्ट्स हैं.
57 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स पर जिंदल पावर का दांव, CCI से मिली बड़ी मंजूरी!

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने जिंदल पावर लिमिटेड को जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) खरीदने की मंजूरी दे दी है. यह डील दिवालिया समाधान प्रक्रिया (CIRP) के तहत हो रही है. जिंदल पावर अब इस कंपनी को अपने अधिग्रहण प्लान में शामिल करेगा.

क्यों हुई अधिग्रहण की जरूरत?

जयप्रकाश एसोसिएट्स लंबे समय से कर्ज संकट में फंसी हुई है. कंपनी पर करीब 57,185 करोड़ रुपये का बकाया है. समय पर कर्ज न चुकाने के कारण इसे नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद बेंच ने जून 2024 में दिवालिया प्रक्रिया में डाल दिया था.

किन-किन कंपनियों की नजर?

जिंदल पावर के अलावा वेदांता ग्रुप और कुछ अन्य कंपनियां भी इस डील में दिलचस्पी दिखा रही हैं. सभी कंपनियों को CCI की मंजूरी जरूरी है ताकि वे अपने-अपने रिजॉल्यूशन प्लान क्रेडिटर्स की कमेटी (CoC) को पेश कर सकें. अभी CoC रिजॉल्यूशन प्लान्स की समीक्षा कर रही है और वोटिंग जल्द होगी.

जयप्रकाश एसोसिएट्स का बिजनेस साम्राज्य

JAL कई सेक्टर में काम करती रही है- रियल एस्टेट, होटल, सीमेंट, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन.

रियल एस्टेट: ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रीन्स, विशटाउन प्रोजेक्ट और जेवर एयरपोर्ट के पास इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी इसके प्रमुख प्रोजेक्ट हैं.

होटल: दिल्ली-एनसीआर, मसूरी और आगरा में पांच बड़े होटल हैं.

सीमेंट प्लांट्स: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में चार सीमेंट प्लांट्स और कुछ लीज पर लिए गए चूना पत्थर की खदानें हैं. हालांकि, फिलहाल ये प्लांट्स बंद पड़े हैं.

अन्य निवेश: कंपनी की सहायक कंपनियों में जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड भी शामिल है.

कर्ज और बैंकों की स्थिति

जेपी ग्रुप पर सबसे बड़ा कर्ज बैंकों का है. नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से JAL के कर्ज खरीदे हैं. अब NARCL सबसे बड़ा क्लेम करने वाला है.

पहले भी बिक चुकी है जेपी इंफ्राटेक

गौर करने वाली बात यह है कि जेपी ग्रुप की एक और कंपनी, जेपी इंफ्राटेक, पहले ही मुंबई की सुरक्ष ग्रुप को बेच दी गई थी. इस कंपनी पर भी हजारों फ्लैट अधूरे पड़े थे, जिन्हें अब सुरक्ष ग्रुप पूरा कर रही है. इसमें करीब 20,000 अपार्टमेंट्स शामिल हैं.

अधिग्रहण के बाद क्या होगा असर?

अगर जिंदल पावर का रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर हो जाता है, तो कंपनी को रियल एस्टेट और होटल सेक्टर में बड़ा फायदा मिलेगा. साथ ही जिंदल ग्रुप पहले से ही पावर, स्टील और माइनिंग में मजबूत है, ऐसे में JAL की संपत्तियों से उसका कारोबार और फैल जाएगा.

निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत

जेपी ग्रुप के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाले हजारों खरीदारों के लिए यह खबर राहत की हो सकती है. अधिग्रहण के बाद अधूरे प्रोजेक्ट्स के पूरे होने की उम्मीद बढ़ेगी. वहीं, होटल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भी नए निवेश की संभावनाएं खुलेंगी.

खबर से जुड़े FAQs

Q1. CCI ने किस डील को मंजूरी दी है?

CCI ने जिंदल पावर द्वारा जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण को मंजूरी दी है.

Q2. जयप्रकाश एसोसिएट्स पर कितना कर्ज है?

कंपनी पर करीब 57,185 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज है.

Q3. JAL किन-किन सेक्टर्स में काम करती है?

रियल एस्टेट, होटल, सीमेंट, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में.

Q4. अधिग्रहण से जिंदल पावर को क्या फायदा होगा?

जिंदल पावर को रियल एस्टेट और होटल प्रोजेक्ट्स के जरिए कारोबार में और विस्तार मिलेगा.

Q5. जेपी ग्रुप की कौन सी कंपनी पहले बिक चुकी है?

जेपी इंफ्राटेक पहले ही सुरक्ष ग्रुप द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी है.

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