भारत में निवेश करने के लिए इस विदेशी कंपनी ने रखी ये शर्त, जानें क्या है मामला

Cairn : केयर्न ने 1990 के दशक में कृष्णा गोदावरी घाटी में राव्या तेल एवं गैस क्षेत्र की खोज की. इसके बाद उसने राजस्थान के थार रेगिस्तान में भूक्षेत्र में सबसे बड़ी तेल खोज की. केयर्न एनर्जी ने वर्ष 2011 में अपने भारतीय कारोबार (केयर्न इंडिया) को वेदांता लिमिटेड को बेच दिया था.
भारत में निवेश करने के लिए इस विदेशी कंपनी ने रखी ये शर्त, जानें क्या है मामला

कंपनी ने कहा कि भारत एक ऐसी जगह है जहां हम तेल एवं गैस खोज के लिये लाइसेंस पाना चाहेंगे. (रॉयटर्स)

ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी पीएलसी ने कहा है कि यदि पिछली तारीख से प्रभावी टैक्स से जुड़े मुद्दे का समाधान हो जाता है तो वह भारत में फिर से निवेश करने को तैयार है. कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ ने यह बात कही है. केयर्न ने 1990 के दशक में कृष्णा गोदावरी घाटी में राव्या तेल एवं गैस क्षेत्र की खोज की. इसके बाद उसने राजस्थान के थार रेगिस्तान में भूक्षेत्र में सबसे बड़ी तेल खोज की. कंपनी ने भारत में निवेश के बाद कई साल पहले अपने भारतीय कारोबार की आंतरिक रीस्ट्रक्चरिंग की. उसकी इस रीस्ट्रक्चरिंग को लेकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 2014 में 10,247 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड ठोक दी. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कंपनी की लाभांश आय, कर रिफंड रोक दिया और कंपनी के शेयरों को अपने कब्जे में लेकर बाद में बेच दिया.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वर्ष 2012 में पारित किए गए पिछली तिथि से लागू कर प्रावधान के तहत कंपनी से यह कर मांग की. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केयर्न एनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) साइमन थॉमसन ने कहा, ‘‘हम भारत में निवेश करने को तैयार हैं बशर्ते पूर्वप्रभावी कर के मुद्दे को सुलझा लिया जाए. भारत एक ऐसी जगह है जहां हम तेल एवं गैस खोज के लिये लाइसेंस पाना चाहेंगे.’’ उन्होंने कहा कि कंपनी के पास भारतीय तलछटी घाटी का विस्तृत ज्ञान है और यह यहां खोज करने के लिये सर्वाधिक उपयुक्त है.

केयर्न एनर्जी ने वर्ष 2011 में अपने भारतीय कारोबार (केयर्न इंडिया) को वेदांता लिमिटेड को बेच दिया था. उसने इस सौदे पर पिछली तारीख से टैक्स लगाए जाने के मामले को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में चुनौती दी है. केयर्न एनर्जी से पिछली तारीख से टैक्स मांग करने के बाद से अब तक भारत में तेल एवं गैस खोज क्षेत्रों के आवंटन की पांच नीलामियां की जा चुकी हैं.

(इनपुट एजेंसी से)

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