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हाल के महीनों में करीब ₹25,000 करोड़ के बायबैक का ऐलान.(प्रतीकातत्मक तस्वीर: AI/ChatGPT)
Buyback Boom: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ महीनों से उतार-चढ़ाव का दौर जारी है. लेकिन FY26 की चौथी तिमाही को ही ले लें तो एक ट्रेंड तेजी से उभरकर सामने आया है- कंपनियों की ओर से शेयर बायबैक (Buyback) की घोषणाएं. आंकड़ों की मानें तो भारतीय कंपनियों ने हाल के महीनों में करीब ₹25,000 करोड़ के बायबैक का ऐलान किया है, जो पिछले तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है.
दिलचस्प बात यह है कि यह तेजी ऐसे समय में आई है जब बायबैक पर टैक्स नियमों में बदलाव के कारण प्रमोटर्स पर टैक्स का बोझ बढ़ गया है. इसके बावजूद कई बड़ी और मझोली कंपनियां शेयरधारकों को कैश लौटाने के लिए बायबैक का रास्ता चुन रही हैं.
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ शेयरधारकों को फायदा पहुंचाने का कदम नहीं है, बल्कि इसका मतलब ये भी है कि कंपनियों के पास अतिरिक्त कैश मौजूद है या फिर उनके पास मजबूत निवेश योजनाओं की कमी है.
पिछले दो महीनों में करीब 10 कंपनियों ने बायबैक का ऐलान किया है. इनमें सबसे बड़ा नाम आईटी दिग्गज Wipro का है, जिसने ₹15,000 करोड़ के बायबैक की घोषणा की है.
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| कंपनी | बायबैक प्रीमियम | नकद भंडार (Cash) | बायबैक साइज |
| Wipro | 19% | ₹42,819 करोड़ | ₹15,000 करोड़ |
| Bajaj Auto | 16% | ₹10,287 करोड़ | ₹5,633 करोड़ |
| Cyient | 20% | ₹1,729 करोड़ | ₹720 करोड़ |
| Kajaria Ceramics | 16% | ₹792 करोड़ | ₹297 करोड़ |
| TeamLease Services | 13% | ₹1,063 करोड़ | ₹238 करोड़ |
| Dhanuka Agritech | 18% | ₹406 करोड़ | ₹70 करोड़ |
बायबैक के पीछे कई वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह कंपनियों के पास जमा बड़ी नकदी है. कई सेक्टर्स, खासकर आईटी सर्विसेज, FMCG और चुनिंदा इंडस्ट्रियल कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में मजबूत कैश फ्लो बनाया है. लेकिन नई परियोजनाओं और विस्तार योजनाओं में निवेश के पर्याप्त अवसर नहीं दिख रहे हैं.
ऐसे में कंपनियां अतिरिक्त नकदी को बैंक खातों में रखने की बजाय शेयरधारकों को लौटाना बेहतर मान रही हैं.
दूसरी बड़ी वजह बाजार की कमजोरी है. जब कंपनियों को लगता है कि उनका शेयर वास्तविक मूल्य से कम कीमत पर ट्रेड कर रहा है, तब वे बायबैक के जरिए शेयर खरीदकर निवेशकों को प्रीमियम देने का फैसला करती हैं.
बायबैक में तेजी का एक और कारण कंपनियों की घटती पूंजीगत निवेश (Capex) योजनाएं हैं.
आंकड़ों के मुताबिक Q4FY26 में कंपनियों की नई कैपेक्स घोषणाओं में करीब 54.9% की गिरावट दर्ज की गई. यह आंकड़ा पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है.
इसका मतलब है कि फिलहाल कंपनियां बड़े निवेश करने की बजाय नकदी बचाने या शेयरधारकों को लौटाने पर अधिक ध्यान दे रही हैं.
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फरवरी 2026 में मार्केट रेगुलेटरी संस्था SEBI ने बायबैक पर टैक्स नियमों में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की थी. पहले बायबैक से मिलने वाली रकम को डिविडेंड जैसी टैक्स व्यवस्था के तहत देखा जाता था. अब इसे कैपिटल गेन माना जाएगा.
इस बदलाव से खासकर रिटेल निवेशकों को बड़ा फायदा मिला है क्योंकि अब टैक्स पूरी रकम पर नहीं बल्कि वास्तविक मुनाफे पर लगेगा. टैक्स की गणना निवेशक के होल्डिंग पीरियड के आधार पर होगी.
| श्रेणी | टैक्स दर |
| लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) | 13% |
| शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) | 20% |
जहां रिटेल निवेशकों को फायदा हुआ है, वहीं प्रमोटर्स के लिए स्थिति थोड़ी अलग है.
| श्रेणी | अनुमानित टैक्स बोझ |
| कॉरपोरेट प्रमोटर्स | लगभग 22% |
| नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर्स | लगभग 30% |
सरकार का उद्देश्य टैक्स आर्बिट्राज को रोकना और बायबैक के गलत इस्तेमाल पर लगाम लगाना है.
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वर्तमान बायबैक
| कंपनी | ऑफर प्राइस | स्थिति |
| CMS Info Systems | ₹340 | बंद होने वाला |
| Welspun Living | ₹175 | बंद होने वाला |
| Zydus Lifesciences | ₹1260 | खुला |
| Dhanuka Agritech | ₹1400 | खुला |
आने वाले प्रमुख बायबैक
| कंपनी | ऑफर प्राइस | राशि |
| Bajaj Auto | ₹12,000 | ₹5,633 करोड़ |
| Cyient | ₹1,125 | ₹720 करोड़ |
| Kajaria Ceramics | ₹1,380 | ₹297 करोड़ |
| TeamLease Services | ₹1,600 | ₹238 करोड़ |
इसके अलावा Wipro का ₹15,000 करोड़ का बायबैक भी निवेशकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में है.

हर बायबैक निवेश के लिए अच्छा अवसर हो, यह जरूरी नहीं है. निवेशकों को बायबैक प्राइस, कंपनी की वित्तीय स्थिति, कैश स्थिति, भविष्य की ग्रोथ योजनाएं और शेयर के वैल्यूएशन को भी समझना चाहिए.
अगर कोई कंपनी मजबूत बैलेंस शीट और हेल्दी बिजनेस के साथ बायबैक ला रही है, तो यह अक्सर पॉजिटिव संकेत माना जाता है. लेकिन अगर कंपनी सिर्फ शेयर कीमत को सहारा देने के लिए बायबैक कर रही है, तो निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या बायबैक में हिस्सा लेना जरूरी होता है?
नहीं. निवेशक चाहें तो अपने शेयर होल्ड कर सकते हैं और बायबैक में हिस्सा न लें.
Q2 क्या बायबैक से शेयर की कीमत बढ़ सकती है?
कई मामलों में बायबैक शेयर की मांग बढ़ाता है और कीमत को समर्थन देता है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं होती.
Q3 क्या हर कंपनी बायबैक कर सकती है?
नहीं. इसके लिए कंपनी को नियामकीय नियमों और वित्तीय पात्रता शर्तों का पालन करना होता है.
Q4 क्या बायबैक और डिविडेंड एक जैसे हैं?
नहीं. डिविडेंड में कंपनी सीधे कैश देती है, जबकि बायबैक में कंपनी शेयर वापस खरीदती है.
Q5 क्या बायबैक लंबी अवधि के निवेशकों के लिए फायदेमंद होता है?
अगर कंपनी के फंडामेंटल मजबूत हैं और बायबैक उचित मूल्य पर हो रहा है, तो यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए पॉजिटिव हो सकता है.