गुरुवार को फोकस में रहेगा ये शेयर, नाइजीरिया से मिला ₹2000-₹2500 करोड़ का बड़ा इंटरनेशनल ऑर्डर

महारत्न पीएसयू कंपनी को नाइजीरिया की से ₹2,000–2,500 करोड़ का बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिला है. कंपनी 8 गैस टर्बाइन जनरेटर पैकेज के डिजाइन, निर्माण, सप्लाई, इंस्टॉलेशन सुपरविजन और कमीशनिंग का काम करेगी. गुरुवार को ये शेयर फोकस में रहेगा.
गुरुवार को फोकस में रहेगा ये शेयर, नाइजीरिया से मिला ₹2000-₹2500 करोड़ का बड़ा इंटरनेशनल ऑर्डर

बाजार खुलते ही फोकस में रहेगा ये महारत्न पीएसयू स्टॉक (फोटो- AI)

महारत्न पीएसयू कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) को एक बड़ा इंटरनेशनल ऑर्डर हासिल हुआ है. कंपनी ने नाइजीरिया की Dangote Petroleum Refinery & Petrochemicals Free Zone Enterprise से ₹2,000 करोड़ से ₹2,500 करोड़ के बीच का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है. यह ऑर्डर BHEL के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है और इससे कंपनी की ग्लोबल ऑर्डर बुक को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

यह प्रोजेक्ट एनर्जी और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा है और इसके जरिए BHEL अफ्रीकी बाजार में अपनी तकनीकी क्षमता और निष्पादन क्षमता को और मजबूत कर सकती है. गुरुवार को बाजार खुलते ही इस शेयर में एक्शन दिख सकता है. ये शेयर फोकस में रहेगा. बता दें कि बुधवार को ये शेयर 1.18 फीसदी की गिरावट के साथ 406 रुपए के भाव पर बंद हुआ है.

गैस टर्बाइन जनरेटर पैकेज की सप्लाई

कंपनी को मिला यह ऑर्डर Dangote Petroleum Refinery & Petrochemicals Free Zone Enterprise, नाइजीरिया की ओर से दिया गया है. दोनों पक्षों के बीच 2 जून 2026 को कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट साइन किया गया.

BHEL

इस प्रोजेक्ट के तहत BHEL को कुल 8 गैस टर्बाइन जनरेटर पैकेज (Gas Turbine Generator Packages) के डिजाइन, निर्माण, सप्लाई और इंस्टॉलेशन सुपरविजन का काम करना होगा. इसके अलावा कंपनी कमीशनिंग और प्रदर्शन परीक्षण (Performance Guarantee Test) से जुड़े कार्य भी करेगी.

इन उपकरणों का इस्तेमाल नाइजीरिया स्थित डांगोटे पेट्रोलियम रिफाइनरी और पॉलीप्रोपाइलीन प्लांट में किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक संचालन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

BHEL के दायरे में क्या-क्या शामिल है?

कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार BHEL की जिम्मेदारी में डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, मुंबई पोर्ट तक सप्लाई, इंस्टॉलेशन की निगरानी और कमीशनिंग शामिल है.

हालांकि इस प्रोजेक्ट में सिविल वर्क कंपनी के कार्यक्षेत्र का हिस्सा नहीं होगा. यानी निर्माण संबंधी सिविल गतिविधियां अलग एजेंसी द्वारा की जाएंगी.

26 महीने में पूरा होगा प्रोजेक्ट

कंपनी के अनुसार इस प्रोजेक्ट को कॉन्ट्रैक्ट की प्रभावी शुरुआत की तारीख से 26 महीनों के भीतर पूरा किया जाना है. इतने बड़े पैमाने के ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में समय पर निष्पादन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे भविष्य के अंतरराष्ट्रीय अवसरों पर भी असर पड़ता है.

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस ऑर्डर देने वाली संस्था में प्रमोटर, प्रमोटर समूह या समूह कंपनियों की कोई हिस्सेदारी नहीं है और यह किसी भी तरह का संबंधित पक्ष (Related Party) लेनदेन नहीं है.

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