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BHEL 5% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार!
शेयर बाजार में सरकारी कंपनियों यानी PSU के शेयरों को लेकर हमेशा चर्चा बनी रहती है. अब इस चर्चा में एक नया नाम जुड़ गया है, BHEL. भारत सरकार ने इस दिग्गज कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) का रास्ता चुना है. यह खबर उन निवेशकों के लिए बड़ी है जो सरकारी कंपनियों में सीधे निवेश करना पसंद करते हैं.
सरकार का यह कदम विनिवेश (Disinvestment) कार्यक्रम का हिस्सा है. लेकिन आम निवेशक के लिए यह जानना जरूरी है कि इस सेल में उनके लिए क्या खास है और उन्हें शेयर किस दाम पर मिलेंगे. आइए, भारी उद्योग मंत्रालय के आधिकारिक नोटिस के आधार पर इस पूरी डील को आसान भाषा में समझते हैं.
सरकार ने इस OFS को दो हिस्सों में बांटा है. सबसे पहले आता है 'बेस ऑफर', जिसके तहत कंपनी की 3.00% इक्विटी हिस्सेदारी (लगभग 10.44 करोड़ शेयर) बेची जाएगी. अगर डिमांड ज्यादा रहती है, तो सरकार के पास 2.00% अतिरिक्त हिस्सेदारी (6.96 करोड़ शेयर) बेचने का विकल्प भी मौजूद है, जिसे 'ग्रीनशू ऑप्शन' कहा जाता है.
अगर दोनों विकल्पों को मिला दिया जाए, तो सरकार कुल मिलाकर BHEL की 5% हिस्सेदारी बाजार में बेच सकती है. यह पूरी प्रक्रिया स्टॉक एक्सचेंज के खास ट्रेडिंग विंडो के जरिए पूरी होगी.
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BHEL का यह OFS दो अलग-अलग दिनों में पूरा होगा. आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आप किस कैटेगरी में आते हैं-
नॉन-रिटेल निवेशक (संस्थागत निवेशक): इनके लिए बोली लगाने का दिन 11 फरवरी 2026 तय किया गया है. सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक ये अपनी बोलियां लगा सकेंगे.
रिटेल निवेशक (आम जनता): अगर आप एक छोटे निवेशक हैं, तो आपके लिए मौका 12 फरवरी 2026 को आएगा. समय वही रहेगा, सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 बजे तक.
रिटेल कैटेगरी में निवेश की अधिकतम सीमा 2 लाख रुपये तय की गई है. इसके अलावा, कंपनी के कर्मचारियों के लिए भी 0.25% हिस्सा रिजर्व रखा गया है.
सबसे अहम सवाल है कि शेयर किस भाव पर मिलेगा. सरकार ने इसके लिए ₹254 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है. यानी इससे कम कीमत पर बोली नहीं लगाई जा सकती.
लेकिन रिटेल निवेशकों के लिए एक खुशखबरी है. सरकार ने रिटेल कैटेगरी के लिए ₹5 प्रति शेयर का डिस्काउंट देने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि अगर आप फ्लोर प्राइस या उससे ऊपर बोली लगाते हैं, तो आपको शेयर प्रभावी रूप से ₹249 के भाव पर पड़ सकता है (बशर्ते आपको अलॉटमेंट मिले).
कई बार निवेशकों को लगता है कि हिस्सेदारी बिकने से कंपनी पर बोझ पड़ेगा, लेकिन यहाँ ऐसा नहीं है. यह एक 'सेकेंडरी सेल' है. इसका मतलब है कि सरकार अपने पास रखे शेयर बेच रही है, कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं कर रही है.
शॉर्ट टर्म में बाजार में शेयरों की सप्लाई बढ़ने से भाव पर थोड़ा दबाव दिख सकता है. लेकिन मीडियम टर्म में देखें तो बाजार में ज्यादा शेयर होने से (Higher free-float) स्टॉक में लिक्विडिटी बढ़ती है, जिससे बड़े इंडेक्स में इसका वजन बढ़ सकता है. लॉन्ग टर्म में यह सरकार के बड़े रिफॉर्म्स का हिस्सा है. अंतिम फैसला लेने से पहले यह ध्यान रखें कि अलॉटमेंट 'प्राइस-प्रायोरिटी' के आधार पर होगा. यानी जो बेहतर कीमत पर बोली लगाएगा, उसे अलॉटमेंट मिलने की संभावना ज्यादा होगी.
BHEL का यह OFS सरकार के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. ₹254 का फ्लोर प्राइस और रिटेल निवेशकों के लिए डिस्काउंट इसे आकर्षक बनाता है. हालांकि बाजार में अचानक ज्यादा शेयर आने से कीमतों में थोड़ी हलचल हो सकती है, लेकिन कंपनी के बुनियादी ढांचे या कारोबार में कोई बदलाव नहीं आने वाला है. अगर आप लंबी अवधि के लिए एक भरोसेमंद PSU स्टॉक की तलाश में हैं, तो यह OFS आपके लिए एक अवसर हो सकता है.