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Asian Paints vs Birla Opus: आपने अपने घर की दीवारों को रंगने के लिए कभी न कभी Asian Paints का नाम तो सुना ही होगा. दशकों से यह नाम भारतीय पेंट बाजार का पर्याय बना हुआ है. लेकिन अब इस बादशाहत को चुनौती देने के लिए एक नया और दमदार खिलाड़ी मैदान में उतर चुका है - बिड़ला ओपस (Birla Opus).
यह सिर्फ एक और कॉम्पिटिशन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी लड़ा बन चुकी है जो अब कंपनियों के दफ्तरों से निकलकर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के दरवाजे तक पहुंच गई है. इस लड़ाई ने बाजार में ऐसी खलबली मचाई है कि ब्रोकरेज हाउस भी Asian Paints के भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं. तो आखिर पेंट कंपनियों में ये चल क्या रहा है?
इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है CCI का जांच का आदेश. दरअसल, आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी ग्रासिम इंडस्ट्रीज के नए पेंट ब्रांड 'बिड़ला ओपस' ने एशियन पेंट्स (Asian Paints) के खिलाफ एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई है.
दबदबे का गलत इस्तेमाल: बिड़ला ओपस का कहना है कि एशियन पेंट्स बाजार में अपनी नंबर 1 की पोजीशन का गलत फायदा उठा रहा है.
डीलरों पर दबाव: आरोप है कि एशियन पेंट्स अपने डीलरों पर बिड़ला ओपस के प्रोडक्ट्स न बेचने का दबाव बना रहा है. उन्हें धमकाया जा रहा है कि अगर वे बिड़ला के पेंट बेचेंगे तो एशियन पेंट्स उन्हें सप्लाई देना बंद कर देगा या उनके डिस्काउंट खत्म कर देगा.
सप्लाई चेन में रुकावट: इतना ही नहीं, बिड़ला ओपस ने यह भी आरोप लगाया है कि एशियन पेंट्स उनके सप्लायर्स और ट्रांसपोर्टर्स को भी उनके साथ काम करने से रोक रहा है ताकि बिड़ला ओपस का माल बाजार तक पहुंच ही न सके.
इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए CCI ने अपने डायरेक्टर जनरल (DG) को मामले की जांच करने और 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है. अगर ये आरोप सही साबित होते हैं तो एशियन पेंट्स पर भारी जुर्माना लग सकता है.
बिड़ला ओपस इसी साल फरवरी में लॉन्च हुआ. लॉन्च होने के कुछ ही महीनों के भीतर बिड़ला ओपस ने पेंट बाजार का लगभग 7% मार्केट शेयर हासिल कर लिया है. यह किसी भी नई कंपनी के लिए एक असाधारण उपलब्धि है. आदित्य बिड़ला ग्रुप ने इस वेंचर में ₹10,000 करोड़ के भारी-भरकम निवेश का ऐलान किया है, जो दिखाता है कि वे इस लड़ाई को लंबे समय तक लड़ने के लिए तैयार हैं. सिर्फ बिड़ला ही नहीं, पिडिलाइट (Pidilite) और एस्ट्रल (Astral) जैसी कंपनियां भी कड़ा मुकाबला दे रही हैं.
इस कॉम्पिटिशन और CCI की जांच का सीधा असर एशियन पेंट्स के शेयर पर दिख रहा है. शेयर बुधवार को करीब 0.78% की तेजी के साथ 2,387 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. हालांकि, पिछले पांच दिनों में शेयर में तेजी रही है. लेकिन ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA ने एशियन पेंट्स की रेटिंग को "Underperform" कर दिया है. इसका मतलब है कि उन्हें उम्मीद है कि शेयर बाजार के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन नहीं करेगा. CLSA ने शेयर का टारगेट प्राइस भी घटाकर ₹1966 कर दिया है, जो निवेशकों के लिए एक चिंता का संकेत है. लेकिन कहानी सिर्फ शेयर प्राइस की नहीं है. कंपनी के फंडामेंटल्स पर भी दबाव दिख रहा है.
ROCE का मतलब होता है कि कंपनी अपने लगाए हुए पैसे पर कितना मुनाफा कमा रही है. पिछले एक दशक में एशियन पेंट्स का ROCE लगातार दबाव में रहा है:
मार्च 2014: 45%
मार्च 2018: 36%
मार्च 2022: 29%
मार्च 2024: 38% (थोड़ा सुधार)
मार्च 2025 (अनुमानित): 26%
ये आंकड़े दिखाते हैं कि बढ़ते कॉम्पिटिशन के कारण कंपनी के लिए मुनाफा बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है. 2025 का अनुमानित 26% का ROCE एक दशक में सबसे निचले स्तरों में से एक हो सकता है.
CCI की रिपोर्ट: अगले 90 दिन एशियन पेंट्स के लिए अहम होंगे. CCI की रिपोर्ट यह तय करेगी कि कंपनी पर कोई कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं. बाजार की लड़ाई: बिड़ला ओपस जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसे रोकना एशियन पेंट्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी. अब लड़ाई सिर्फ क्वालिटी या कीमत की नहीं, बल्कि डीलर नेटवर्क और सप्लाई चेन पर कंट्रोल की भी है.