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(Image Credit: apple.com)
Apple @ 50: 1 अप्रैल 2026 को Apple की शुरुआत के 50 साल हो जाएंगे. एक छोटी शुरुआत के साथ आधी सदी का यह सफर सिर्फ इनोवेशन की कहानी नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन को नए सिरे से गढ़ने की भी कहानी है. खासतौर पर भारत के संदर्भ में, Apple का बढ़ता दांव अब एक बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव का संकेत दे रहा है, जहां भारत सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनता जा रहा है.
आज Apple अपने ग्लोबल iPhone प्रोडक्शन का करीब 25% भारत में कर रहा है. अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन की रणनीति के चलते भारत में मैन्युफैक्चरिंग में 50% से ज्यादा की सालाना बढ़ोतरी देखी गई है. iPhone का प्रोडक्शन 36 मिलियन यूनिट से बढ़कर 55 मिलियन तक पहुंच चुका है. कंपनी यहां सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, बल्कि रिटेल और पेमेंट्स (Apple Pay लॉन्च की तैयारी) जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है.
Apple ने भारत में iPhone असेंबली की शुरुआत 2017 में iPhone SE से की थी. इसके बाद धीरे-धीरे कंपनी ने करंट-जनरेशन मॉडल्स का भी प्रोडक्शन यहां शिफ्ट करना शुरू किया. आज Foxconn, Pegatron और Tata Electronics जैसे कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स भारत में iPhones असेंबल कर रहे हैं. तमिलनाडु और कर्नाटक इस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के बड़े हब बनकर उभरे हैं.
भारत अब सिर्फ प्रोडक्शन सेंटर नहीं, बल्कि एक बड़ा एक्सपोर्ट हब भी बनता जा रहा है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 60 अरब डॉलर के मोबाइल फोन का उत्पादन किया, जिसमें Apple की सप्लाई चेन का बड़ा योगदान रहा. भारत में बने ज्यादातर iPhones अब एक्सपोर्ट हो रहे हैं, खासकर अमेरिका जैसे बाजारों में. सप्लाई चेन रिपोर्ट्स के मुताबिक, Foxconn के भारतीय प्लांट्स में बने कई iPhones सीधे अमेरिका भेजे गए. Apple का लक्ष्य है कि 2026 तक अमेरिका में बिकने वाले अधिकांश iPhones भारत में ही असेंबल किए जाएं.
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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में सरकार की PLI (Production Linked Incentive) स्कीम्स का अहम योगदान रहा है. “Make in India” पहल के तहत Large Scale Electronics Manufacturing और IT Hardware के लिए दी गई प्रोत्साहन योजनाओं ने ग्लोबल कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित किया. इसी का असर है कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग देश बनकर उभरा है और स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड ग्रोथ देखी जा रही है.
Apple की बढ़ती मौजूदगी का फायदा सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को ही नहीं, बल्कि डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को भी मिल रहा है. Redington 2007 से Apple का लीडिंग टेक डिस्ट्रीब्यूटर रहा है और लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग व डिस्ट्रीब्यूशन का काम संभालता है.
Redington की Q3 आय में Apple का योगदान करीब 33% है, जो किसी भी ब्रांड के मुकाबले सबसे ज्यादा है. Lenovo (10%), HP Inc (8%), Dell EMC (4%) और Samsung (4%) इसके बाद आते हैं. जैसे-जैसे iPhone प्रोडक्शन और सेल्स वॉल्यूम बढ़ेगा, Redington जैसी कंपनियों की आय और ऑपरेटिंग लेवरेज में सुधार देखने को मिल सकता है.
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