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HDFC Bank: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में शामिल HDFC Bank मैनेजमेंट स्तर पर हुए अचानक बदलाव के कारण सुर्खियों में है. पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे ने जहां बाजार और निवेशकों को चौंकाया, वहीं अब बैंक के MD & CEO शशिधर जगदीशन और अंतरिम चेयरमैन केकी मिस्त्री की ओर से आई सफाई ने हालात को स्थिर करने की कोशिश की है. Zee Business के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में CEO ने साफ किया कि बैंक की गवर्नेंस, ऑपरेशंस और ग्रोथ आउटलुक मजबूत बना हुआ है और निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है.
शशिधर जगदीशन ने स्पष्ट किया कि अतनु चक्रवर्ती का इस्तीफा “सभी के लिए चौंकाने वाला” था. उन्होंने बताया कि पूर्व चेयरमैन ने इस्तीफे के पीछे कोई ठोस कारण या विशेष मुद्दा साझा नहीं किया. सबसे अहम बात यह रही कि RBI ने भी इस मामले में कोई आपत्ति नहीं जताई है. CEO के मुताबिक, बैंक के कामकाज में पूरी पारदर्शिता है और किसी तरह की गवर्नेंस समस्या नहीं है.
इस्तीफे के बाद बाजार में गवर्नेंस को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन मैनेजमेंट ने इन्हें सिरे से खारिज किया.
अंतरिम चेयरमैन केकी मिस्त्री ने भी कहा कि अगर कोई गंभीर समस्या होती, तो वे यह जिम्मेदारी नहीं लेते.
इस पूरे घटनाक्रम में Reserve Bank of India का रुख बेहद अहम रहा. बैंक की ओर से कॉन्कॉल में बताया गया कि RBI ने इस्तीफे पर कोई आपत्ति नहीं जताई. बैंक को कोई नोटिस या चेतावनी नहीं दी गई. बोर्ड और RBI के बीच संवाद सामान्य रहा.
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CEO ने भविष्य को लेकर काफी आशावादी रुख दिखाया.
केकी मिस्त्री का अंतरिम चेयरमैन बनना बाजार के लिए एक पॉजिटिव संकेत माना जा रहा है.
अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दिया था. पिछले 2 साल में कुछ “एथिकल कंसर्न” का जिक्र किया था. हालांकि कोई ठोस विवरण सामने नहीं आया. इस्तीफे के बाद बैंक के ADR में करीब 7% गिरावट देखी गई. इसके बाद केकी मिस्त्री को 3 महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया.
1. HDFC Bank में क्या बड़ा बदलाव हुआ है?
पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दिया है, जिसके बाद केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया है.
2. क्या बैंक में गवर्नेंस से जुड़ी कोई समस्या है?
मैनेजमेंट और RBI दोनों ने कहा है कि कोई गंभीर गवर्नेंस इश्यू नहीं है.
3. RBI का क्या रुख है?
RBI ने न तो कोई आपत्ति जताई और न ही कोई नोटिस जारी किया, जो बैंक के लिए पॉजिटिव संकेत है.
4. आगे बैंक की ग्रोथ कैसी रह सकती है?
FY27 तक लोन ग्रोथ, CASA और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार की उम्मीद जताई गई है.
5. निवेशकों को क्या करना चाहिए?
लॉन्ग टर्म निवेशक बने रह सकते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी के चलते सतर्क रहना जरूरी है.