ACME Group ₹5,000 करोड़ का करेगा निवेश, बनाएगा ग्रीन स्टील के लिए 1.2 MTPA DRI प्लांट

ACME Group ₹5,000 करोड़ का निवेश करके 1.2 मिलियन टन क्षमता वाला ग्रीन DRI प्लांट लगाएगा. यह यूनिट भारत या ओमान में लग सकती है और इसका मकसद ग्रीन स्टील के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाले HBI और DRI उत्पाद बनाना है. कंपनी के चेयरमैन मैनोज उपाध्याय ने इसकी पुष्टि की.
ACME Group ₹5,000 करोड़ का करेगा निवेश, बनाएगा ग्रीन स्टील के लिए 1.2 MTPA DRI प्लांट

गुरुग्राम स्थित ACME Group ने घोषणा की है कि वह करीब ₹5,000 करोड़ का निवेश करके एक नया Direct Reduced Iron (DRI) प्लांट लगाएगा. कंपनी इस प्लांट के जरिए ग्रीन हॉट ब्रिकेटेड आयरन (HBI) और ग्रीन डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) बनाएगी, जो ग्रीन स्टील तैयार करने में इस्तेमाल होगा. इस प्रोजेक्ट की पहली फेज में 1.2 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) क्षमता का प्लांट लगाया जाएगा. यह भारत या ओमान में लग सकता है- दोनों जगहों पर कंपनी की पहले से मौजूद इकाइयां हैं.

‘भारत में क्लीन टेक्नोलॉजी को नई ऊंचाई देंगे’

ACME Group के चेयरमैन मैनोज कुमार उपाध्याय ने कहा, “हमारा नया ग्रीनफील्ड प्लांट दुनिया में सबसे कम कार्बन उत्सर्जन वाले DRI और HBI उत्पाद बनाएगा. यह भारत को क्लीन टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस में एक अग्रणी देश बनाएगा.” हालांकि उन्होंने निवेश की सटीक जानकारी नहीं दी, लेकिन इंडस्ट्री सूत्रों ने बताया कि यह प्रोजेक्ट ₹5,000 करोड़ का होगा और आने वाले सालों में कंपनी के ग्रीन एनर्जी पोर्टफोलियो को और मजबूत बनाएगा.

भारत या ओमान में बनेगा प्लांट

ACME Group अपने नए प्रोजेक्ट की लोकेशन को लेकर अभी दो विकल्पों पर विचार कर रहा है- भारत या ओमान. कंपनी के अनुसार, यह प्लांट ऐसी जगह लगाया जाएगा जो उनके मौजूदा ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के पास हो, ताकि लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा आपूर्ति दोनों सुचारू रहें. फिलहाल कंपनी ओडिशा में एक ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट बना रही है और ओमान में भी एक बड़ा प्रोजेक्ट एडवांस स्टेज पर है. इसलिए संभावना है कि DRI यूनिट इन दोनों देशों में से किसी एक में लगाई जाएगी.

ACME का तेजी से बढ़ता ग्रीन एनर्जी कारोबार

ACME Group ने पिछले कुछ सालों में ग्रीन एनर्जी सेक्टर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है. कंपनी के पास सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स और यूटिलिटी स्केल एनर्जी सॉल्यूशंस का बड़ा पोर्टफोलियो है. अभी कंपनी की ऑपरेशनल सोलर कैपेसिटी 2,700 मेगावॉट (MW) है, और कई नए प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन हैं. कंपनी का फोकस अब “ग्रीन हाइड्रोजन से ग्रीन स्टील” की ओर बढ़ने पर है, जिससे आने वाले वर्षों में स्टील इंडस्ट्री में कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके.

क्या है DRI और HBI?

DRI (Direct Reduced Iron) को आम भाषा में “स्पंज आयरन” भी कहा जाता है. यह आयरन अयस्क (iron ore) को गैस या हाइड्रोजन की मदद से रिड्यूस करके बनाया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है.

HBI (Hot Briquetted Iron) DRI का ठोस रूप है, जिसे ब्लॉक्स के रूप में बनाया जाता है ताकि उसे सुरक्षित तरीके से ट्रांसपोर्ट और स्टोर किया जा सके. दोनों ही ग्रीन स्टील बनाने के अहम रॉ मैटेरियल हैं.

ग्रीन स्टील क्यों जरूरी है

स्टील उद्योग दुनिया के सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जन करने वाले सेक्टरों में से एक है. पारंपरिक स्टील उत्पादन में कोयले का भारी इस्तेमाल होता है, जिससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है. ग्रीन DRI और HBI का इस्तेमाल कोयले की जगह ग्रीन हाइड्रोजन से स्टील बनाने में होता है. इससे पर्यावरण को कम नुकसान होता है और कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आती है.

भारत को बनाएंगे क्लीन एनर्जी हब

ACME Group का विजन है कि भारत को क्लीन एनर्जी और ग्रीन स्टील मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाए. इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद भारत की ग्रीन स्टील उत्पादन क्षमता में बड़ी छलांग लग सकती है. यह न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि देश को “नेट ज़ीरो कार्बन” लक्ष्य हासिल करने की दिशा में भी आगे बढ़ाएगा.

खबर से जुड़े FAQs

1. ACME Group कितना निवेश करने जा रहा है?

करीब ₹5,000 करोड़.

2. नया DRI प्लांट कहां बनेगा?

भारत या ओमान में, अंतिम लोकेशन जल्द तय होगी.

3. इस प्लांट की सालाना क्षमता कितनी होगी?

1.2 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA).

4. कंपनी के चेयरमैन कौन हैं?

मैनोज कुमार उपाध्याय.

5. ACME Group के पास फिलहाल कितनी सोलर कैपेसिटी है?

करीब 2,700 मेगावॉट (MW).

Add Zee Business as a Preferred Source
  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6