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फाइल फोटो PTI.
This Diwali to Next Diwali: दिवाली से पहले धनतेरस के मौके पर सोना-चांदी में शुभ खरीदारी की जाती है. 24 अक्टूबर को दिवाली है. ऐसे में अगर आप भी इस साल सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो यह सुनहरा मौका है. आज सप्ताह के दूसरे दिन दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमत में गिरावट आई और चांदी की कीमत में तेजी आई है. आज 10 रुपए की गिरावट के साथ सोने का भाव 50783 रुपए प्रति दस ग्राम रहा. चांदी का भाव 774 रुपए के उछाल के साथ 57064 रुपए प्रति किलोग्राम रहा.
IIFL Securities के वाइस प्रेसिडेंट, कमोडिटी, अनुज गुप्ता ने कहा कि सोने का आउटलुक पॉजिटिव है. ऐसे में अगली दिवाली के लिहाज से यह सही कीमत पर मिल रहा है. उन्होंने कहा कि अगली दिवाली तक डोमेस्टिक मार्केट में सोना 55 हजार से 57 हजार रुपए प्रति दस ग्राम के स्तर तक पहुंच सकता है. इंटरनेशनल मार्केट में यह 1750 डॉलर से 1800 डॉलर तक पहुंच सकता है. अगली दिवाली तक चांदी 65 हजार से 70 हजार रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है. इंटरनेशनल मार्केट में चांदी 21 से 23 डॉलर प्रति आउंस तक पहुंच सकती है.
एक्सपर्ट ने कहा कि सोने की कीमत पर दबाव का सबसे बड़ा कारण है कि अमेरिकी डॉलर में तेजी है. वहां महंगाई दर आसमान पर है. इसे कम करने के लिए फेडरल रिजर्व की तरफ से अब तक लगातार तीन बार इंटरेस्ट रेट में 75-75 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की जा चुकी है. 2 नवंबर को फिर से FOMC यानी फेडरल रिजर्व ओपन मार्केट कमिटी की बैठक है. सितंबर में वहां महंगाई के जो आंकड़े आए हैं उसके बाद माना जा रहा है कि फेडरल रिजर्व फिर से इंटरेस्ट रेट में बड़ी बढ़ोतरी करेगा. इससे डॉलर को मजबूती मिलेगी.
बुलियन एक्सपर्ट्स का मानना है कि गोल्ड को लेकर आउटलुक अभी थोड़ा संशय में है. जब इंटरेस्ट में बढ़ोतरी होती है तो बॉन्ड यील्ड में भी उछाल आता है. यह निवेशकों को आकर्षित करता है. गोल्ड नॉन-यील्ड असेट क्लास है जिसके कारण इसके प्रति निवेशकों का रुझान कम होने लगता है. बॉन्ड में निवेश के कारण डॉलर को मजबूती मिलती है. यही वजह है कि डॉलर इंडेक्स दो दशकों के उच्चतम स्तर पर है.
दूसरी तरफ गोल्ड की कीमत को सपोर्ट करने के लिए भी कुछ फैक्टर अहम हैं. रूस यूक्रेन पर परमाणु हमला की धमकी दे रहा है. ताइवान के मामले पर चीन और अमेरिका आमने सामने है. अगर यह परिस्थिति बगड़ती है तो निवेशक फिर से कम रिस्क वाले असेट की तरफ आकर्षित होंगे. इससे सोने की कीमत को फिर से सपोर्ट मिलेगा. दूसरी तरफ, अगर युद्ध के कारण महंगाई बढ़ती है और ग्रोथ घटता है तो इस परिस्थिति में फिर से सोने के प्रति आकर्षण बढ़ेगा और इसकी कीमत में तेजी आएगी. कुल मिलाकर सोने के लिए अभी कई फैक्टर हैं जो सकारात्मक और नकारात्मक हैं.