प्रमुख बाजारों में कमजोर डिमांड से जूझ रहा टेक्सटाइल उद्योग, इंडस्ट्री में PIL के दूसरे फेज की तैयारी

Textile Sector: भारत दुनिया में कॉटन के टॉप उत्पादक देशों में शामिल होने के साथ अपैरल सेक्टर में दुनिया का छठा सबसे बड़ा निर्यातक भी है. वहीं, बड़े पैमाने पर भारत में तैयार किए गए प्रोडक्ट्स का यूरोप-अमेरिका के बाजारों में निर्यात भी किया जा रहा है.
प्रमुख बाजारों में कमजोर डिमांड से जूझ रहा टेक्सटाइल उद्योग, इंडस्ट्री में PIL के दूसरे फेज की तैयारी

निर्यात का फ्रंट, EU-अमेरिका-मिडिल ईस्ट प्रमुख बाजार है. (File Photo)

Textile Sector: टेक्सटाइल के क्षेत्र में दुनिया में भारत की अपनी एक अलग पहचान है. बात फिर चाहे टेक्सटाइल उद्योग (Textile Industry) में इस्तेमाल होने वाले रॉ मटीरियल (Cotton) की हो या फिर तैयार किए गए प्रोडक्ट की. भारत दुनिया में कॉटन के टॉप उत्पादक देशों में शामिल होने के साथ अपैरल सेक्टर में दुनिया का छठा सबसे बड़ा निर्यातक भी है. वहीं, बड़े पैमाने पर भारत में तैयार किए गए प्रोडक्ट्स का यूरोप-अमेरिका के बाजारों में निर्यात भी किया जा रहा है.

सीजनल पीरियड, ऑर्डर्स की कमी

कारोबार के दृष्टिकोण से टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए मौजूदा समय काफी अच्छा होता. लेकिन दुनिया के प्रमुख बाजारों में कमजोर मांग और महंगाई के बीच घरेलू निर्यातकों पर इसका असर महसूस किया जा रहा है. निर्यात की बात करें तो भारत के लिए यूरोप, अमेरिका और मिडिल ईस्ट बड़े बाजारों में शामिल है. वैसे इन बाजारों में हर साल के मुकाबले इस बार डिमांड कमजोर होने से उद्योग को मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है.

Add Zee Business as a Preferred Source

ये भी पढ़ें- इस फल की खेती करने वालों पर होगी पैसों की बारिश, एक बार खर्च कर 25 साल तक बैठकर कमाएं

तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट राजा एम षणमुगम के मुताबिक रूस-यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का असर पूरे यूरोप पर महसूस किया जा रहा है. इससे दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर अनिश्चितता का दबाव बन रहा है.

वहीं, लुधियाना निटर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अजीत लाकरा ने बात रखते हुए कहा कि यूरोप और अमरिका जबरदस्त महंगाई से जूझ रहे हैं. ऐसी स्थिति में ग्राहकों के सामान खरीदने की वरीयता बदल जाती है. लोग गारमेंट्स और फैशन पर जोर न देते हुए अपने रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदना पसंद करेंगे. उन्होंने कहा कि इससे डिमांड में कमी आने के साथ प्रोडक्शन में भी गिरावट दर्ज होगी. ऐसे में देश की कताई मिलों को मजबूरन अपने प्रोडक्शन को 60-70 प्रतिशत तक घटाना पड़ा है. वहीं, रॉ कॉटन की कीमतों पर अपना नजरिया रखते हुए अजीत लाकरा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले हमारे देश में रॉ कॉटन की कीमतें अधिक हैं. उन्होंने कहा कि रॉ कॉटन की कीमतों में समानता लाने के लिए सरकार को रॉ कॉटन पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को फिलहाल हटा देना चाहिए. वहीं, उनका ये भी मानना है कि कॉटन की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर कारोबार को भी प्रभावित कर रहा है.

टेक्सटाइल सेक्टर में PLI स्कीम के दूसरे फेज की तैयारी

टेक्सटाइल क्षेत्र में मौजूद असीम संभावनाओं के चलते सरकार अब इस सेक्टर के लिए पीएलआई स्कीम के दूसरे फेज को लाने की तैयारी कर रही है. इसी पर अपनी राय रखते हुए राजा एम षणमुगम ने कहा कि सरकार का ये कदम काफी सराहनीय है. उन्होंने कहा कि पीएलआई स्कीम के फेज 1 में शुरुआत में टेक्सटाइल क्षेत्र के बड़े प्लेयर्स को शामिल किया गया. वहीं, सरकार से हमारी मांग है कि इस बार निवेश के पहलू पर बारीकी से गौर करना चाहिए और निवेश स्तर को भी कम करना चाहिए. इसके साथ ही कॉटन आधारित प्रोडक्ट्स को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए. दरअसल, टेक्सटाइल क्षेत्र में पीएलआई 1 में मैन मेड फाइबर अपैरल, मैन मेड फाइबर फैब्रिक्स के अलावा टेक्निकल टेक्सटाइल्स से जुड़े प्रोडक्ट्स पर जोर दिया गया था.

बता दें कि देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत करने और निर्यात को बढ़ाने की दृष्टि से सरकार ने टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम की शुरुआत की है. टेक्सटाइल सेक्टर के लिए पीएलआई स्कीम 1 में करीब 61 आवेदकों को शामिल किया गया है. वहीं, पांच साल के दौरान इन 61 आवेदकों के जरिए करीब ₹19,077 करोड़ के निवेश का अनुमान लगाया जा रहा है. इसके साथ ही दो लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होने की संभावना है.

भारत-ऑस्ट्रेलिया FTA, टेक्सटाइल क्षेत्र पर कैसा होगा असर?

भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते को ऑस्ट्रेलियाई संसद ने मुहर लगा दी. जानकारों की मानें तो फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के प्रभावी होने के बाद कपड़ा,लेदर,फर्नीचर, आभूषण,मशीनरी जैसे सैक्टर्स के प्रोडक्ट्स बड़े पैमाने पर ऑस्ट्रेलियाई बाजार में पहुंच बढ़ाएंगे.

वहीं, भारत-ऑस्ट्रेलिया एफटीए पर अपनी राय रखते हुए अजीत लाकरा ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ हुआ एफटीए बहुत अच्छा है. उन्होंने कहा कि कनाडा, यूके, फ्रांस के साथ भी एफटीए पर बातचीत चल रही. उनका मानना है कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बहुत मदद प्रदान करेंगा.

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दरअसल दो देशों के बीच व्यापार को सरल बनाने के लिए होता है. इसके तहत दो देशों के बीच आयात-निर्यात के तहत उत्पादों पर सीमा शुल्क, नियामक कानून, सब्सिडी और कोटा को कम करने के लिए समझौता किया जाता है. वहीं, इससे दोनों देशों के बीच परस्पर कारोबार बढ़ता है और दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्थाओं को रफ्तार मिलती है. इसके साथ ही एफटीए के जरिए उत्पादन लागत को तर्कसंगत बनाने में भी मदद मिलती है.

एमएसएमई सेक्टर, अर्थव्यवस्था की बैकबोन

एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस क्षेत्र का देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है. देश में कृषि क्षेत्र के बाद एमएसएमई सेक्टर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है. वहीं यह सेक्टर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगीकरण में भी मदद कर रहा है.

Zee Business Hindi Live TV यहां देखें

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6