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Steel Price: घर बनाना होगा सस्ता, पिछले 6 महीनों में 40 प्रतिशत तक कम हुए स्टील के दाम, 78800 से घटकर 57000 प्रति टन हुई कीमतें (Reuters)
घर बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों में स्टील (Steel) का एक बड़ा हिस्सा शामिल होता है. अगर आप भी अपना घर बनवा रहे हैं या आने वाले दिनों में घर का काम शुरू कराने जा रहे हैं तो निश्चित रूप से ये आपके लिए एक अच्छी खबर है. इसके अलावा स्टील से जुड़े बिजनेस में शामिल लोगों के लिए भी ये एक अच्छी खबर है. घरेलू बाजार (Domestic Market) में पिछले 6 महीने के दौरान स्टील की कीमतें करीब 40 प्रतिशत गिरकर 57,000 रुपये प्रति टन पर आ गई हैं. लौह और इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry) से जुड़ी कीमतें सहित अन्य जानकारी देने वाली कंपनी स्टीलमिंट (SteelMint) ने कहा कि 15 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने की वजह से एक्सपोर्ट में नरमी आने से स्टील की कीमतों में ये गिरावट आई है.
इस साल की शुरुआत में हॉट रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतों में बढ़ोतरी दिखना शुरू हो गई थी. एचआरसी की बढ़ती कीमतें उपयोगकर्ता उद्योगों के लिए चिंता का विषय था क्योंकि स्टील की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर रियल एस्टेट और आवास, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे उद्योगों पर पड़ता है.
स्टीलमिंट के अनुसार, घरेलू बाजार में स्टील की कीमतें अप्रैल, 2022 में 78,800 रुपये प्रति टन पर पहुंच गई थीं. वहीं 18 प्रतिशत जीएसटी के बाद इसकी कीमत करीब 93,000 रुपये प्रति टन हो गई थी. रिसर्च कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, कीमतें अप्रैल के आखिर से गिरनी शुरू हुई और जून के अंत तक घटकर 60,200 रुपये प्रति टन पर आ गई. जुलाई और अगस्त में भी कीमतों में गिरावट जारी रही और सितंबर के मध्य तक ये कम होकर 57,000 रुपये प्रति टन पर आ गई. हालांकि, सभी कीमतों में 18 फीसदी जीएसटी शामिल नहीं है.
स्टीलमिंट ने स्टील की कीमतों में गिरावट के मुख्य कारण स्टील प्रोडक्ट्स पर सरकारी टैक्स, विदेशों से मांग में कमी, उच्च मुद्रास्फीति और ऊर्जा लागत को बताया है. स्टीलमिंट ने स्टील के परिदृश्य के बारे में कहा कि घरेलू एचआरसी की कीमतें अगली तिमाही में सीमित दायरे में बनी रहेंगी. दरअसल, स्टील का एक्सपोर्ट सामान्य से कम रहने और इन्वेंट्री दबाव बने रहने की भी संभावना है. ऐसे में मिलों के अगले दो महीनों में कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है. सरकार ने 21 मई को लौह अयस्क (Iron Ore) के एक्सपोर्ट पर 50 पर्सेंट तक और कुछ इस्पात मध्यवर्तियों पर 15 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ा दिया. इस कदम का उद्देश्य घरेलू निर्माताओं के लिए इन कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाना था.
बताते चलें कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में स्टील का काफी इस्तेमाल देखने को मिलता है. यही वजह है कि स्टील की कीमतें काफी हद तक महंगाई को कंट्रोल करती हैं. कहने का सीधा मतलब है कि स्टील के दाम बढ़ेंगे तो महंगाई भी बढ़ेगी और स्टील के दाम कम होंगे तो महंगाई भी कम होगी.
भाषा इनपुट्स के साथ