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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें (Petrol Diesel Price) वैश्विक स्तर के दाम के मुकाबले कम हैं तथा विपक्षी सदस्यों को अपनी पार्टियों के शासन वाले प्रदेशों में वैट (VAT) कम करवाना चाहिए ताकि कीमतें कम हो सकें. उन्होंने सदन में प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों की टोकाटाकी के बीच कहा कि पश्चिम बंगाल समेत छह राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर वैट में कोई कमी नहीं की, जबकि कई बीजेपी शासित प्रदेशों और कुछ अन्य राज्यों ने इसे कम किया है.
पुरी ने कांग्रेस सांसद के. मुरलीधरन के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘ पिछले आठ साल में पेट्रोल एवं डीजल के दाम में बढ़ोतरी बहुत कम हुई है. यह 1974 के बाद सबसे कम बढ़ोतरी है.’’ उनका कहना था कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें उत्पादन लागत, परिवहन लागत, बीमा शुल्क और मुद्रा विनिमय दर के आधार पर तय होती हैं. उन्होंने कहा कि इसके बाद डीलर के हिस्से का मुनाफा होता है तथा फिर केंद्रीय उत्पाद शुल्क है और राज्यों का वैट भी लगता है.
उन्होंने कहा, ‘‘कई राज्यों ने वैट में कमी की है. इनमें कई बीजेपी शासित राज्य हैं और कुछ अन्य पार्टियों के शासन वाले राज्य भी हैं. कुछ राज्य प्रति लीटर पेट्रोल पर 17 रुपए का वैट लेते हैं तो कुछ राज्य 32 रुपए लेते हैं.’’पुरी ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल, झारखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश ने वैट में कटौती नहीं की. (विपक्षी) सदस्यों से कहना चाहूंगा कि वे अपनी राज्य सरकारों से कहें कि वैट कम कर दें तो आपके यहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो जाएंगी.’’
उन्होंने कहा कि पेट्रोल की कीमत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 40 फीसदी बढ़ी तो भारत में दो फीसदी ही बढ़ी. उनका कहना था कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और इसे किफायती रखने को लेकर प्रतिबद्ध है. 22 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमत में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है.
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