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Silver Hallmarking RBI Rule: बिजनेस के लिहाज से अक्टूबर का महीना काफी खास होता है. अक्टूबक के महीने कई सारे हिंदू त्योहार होते हैं, जिसमें सोने-चांदी या दूसरे बाजार के सामान की मांग बढ़ती है और अलग-अलग कंपनियों को इसका फायदा देखने को मिलता है. फेस्टिव सीजन शुरू हो चुका है और अब दिवाली भी काफी पास है. दिवाली में कई लोग सोने और चांदी के गहने और क्वाइन खरीदते हैं. ऐसे में हॉलमार्किंग की सटीक जानकारी होना जरूरी है. सोने की हॉलमार्किंग की जाती है और बिना हॉलमार्क के सोने के गहने बेचना भी गलत है लेकिन क्या चांदी के लिए भी हॉलमार्क जरूरी है. यहां जानते हैं कि इस पर आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) का नियम क्या कहता है.
बता दें कि सरकार ने जून 2021 से सोने की ज्वेलरी पर हॉलमार्क के नियम को लागू करना जरूरी कर दिया था. ग्राहकों को सही और शुद्ध गहने मिले, इसके लिए सरकार की ओर से हॉलमार्क के नियम को जरूरी बनाया गया था. यानी कि अब बिना हॉलमार्क वाले सोने के गहने को कोई भी दुकानदार नहीं बेच सकता.
हालांकि सोने की तरह चांदी पर ये नियम लागू नहीं होता. ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड यानी कि बाआईएस के मुताबिक, किसी भी ज्वेलर के लिए ये जरूरी नहीं है कि वो हॉलमार्क किया हुआ चांदी का गहना ही बेचे. अगर ज्वेलर चाहे तो वो हॉलमार्क वाली चांदी का गहना बेच सकता है.
बता दें कि ये पूरी तरह से ज्वेलरी बनाने वाले पर निर्भर करता है कि वो चांदी को भी सोने की तरह हॉलमार्क लगाकर बेचे. इससे गहने की प्योरिटी और बढ़ेगी और ग्राहकों का भी ज्वेलरी के प्रति भरोसा बढ़ेगा. इसके अलाा ग्राहक अगर चाहे तो ज्वेलर से हॉलमार्किंग की मांग कर सकता है. हालांकि इसके लिए ज्वेलर अलग से ग्राहकों से इसके पैसे ले सकता है.
बता दें कि जैसे सोने पर हॉलमार्क का निशान होता है, वैसे ही ठीक चांदी पर भी हॉलमार्क का निशान बनाया जाएगा. ज्वेलरी पर BIS मार्क के साथ SILVER लिखा होगा. इसके अलावा प्योरिटी ग्रेड या सिल्वर का फाइननेस भी लिखा होगा.
इसके अलावा जिस सेंटर में हॉलमार्किंग की जाएगी, उस सेंटर का आइडेंटिफिकेशन मार्क लगा होगा. वहीं साथ में सिल्वर ज्वेलरी पर ज्वेलर का मार्क या मैन्युफैक्चर्र आइडेंटिफिकेशन मार्क भी लिखा होना चाहिए.
वैसे तो सोने पर हॉलमार्क इसलिए किया जाता है, ताकि ग्राहकों को शुद्ध और अच्छी ग्रेड का सोना खरीदने के लिए मिले. लेकिन चांदी में अक्सर ज्वेलर लेड कंटेंट मिला देते हैं, जिससे चांदी के गहने और बर्तन बनाने में आसानी होती है.
कई लोग चांदी के बर्तन का इस्तेमाल खाने-पीने के लिए करते हैं और अगर लेड कंटेंट की मात्रा ज्यादा हो जाए तो वो उनके स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है. ऐसे में अगर हॉलमार्किंग कर दी जाएगी तो ग्राहकों को ये पता चलेगा कि इसमें कितना लेड मिला हुआ है.