प्रधानमंत्री ने रखी दक्षिण भारत की ऊर्जा सुरक्षा की नींव, पावरग्रिड की ट्रांसमिशन प्रणाली से मिलेगी 2000 मेगावाट स्वच्छ बिजली

यह परियोजना कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट-3 और 4 से उत्पादित होने वाली 2000 मेगावाट बिजली को नेशनल ग्रिड तक पहुंचाने के लिए आवश्यक पारेषण प्रणाली (Transmission System) के निर्माण से संबंधित है.
प्रधानमंत्री ने रखी दक्षिण भारत की ऊर्जा सुरक्षा की नींव, पावरग्रिड की ट्रांसमिशन प्रणाली से मिलेगी 2000 मेगावाट स्वच्छ बिजली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई, 2025 को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में आयोजित एक भव्य समारोह में दक्षिण भारत की ऊर्जा सुरक्षा को एक नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना की आधारशिला रखी. यह परियोजना कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट-3 और 4 से उत्पादित होने वाली 2000 मेगावाट बिजली को नेशनल ग्रिड तक पहुंचाने के लिए आवश्यक पारेषण प्रणाली (Transmission System) के निर्माण से संबंधित है. इस विशालकाय बुनियादी ढांचे का निर्माण भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अधीन एक 'महारत्न' कंपनी, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) द्वारा किया जा रहा है.

क्या है यह परियोजना?

यह महत्वाकांक्षी परियोजना पावरग्रिड की सहायक कंपनी, कुडनकुलम ट्रांसमिशन लिमिटेड द्वारा अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) के तहत कार्यान्वित की जा रही है. इस योजना के प्रमुख घटकों में शामिल हैं:

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  • कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (यूनिट 3 और 4) से तूतीकोरिन-II जीआईएस पावर स्टेशन तक 400 केवी की डबल सर्किट (क्वाड) ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण.

  • तूतीकोरिन-II जीआईएस में दो 400 केवी जीआईएस लाइन बे (Bays) का निर्माण.

यह अत्याधुनिक प्रणाली यह सुनिश्चित करेगी कि कुडनकुलम में उत्पादित होने वाली स्वच्छ परमाणु ऊर्जा बिना किसी बाधा के लाखों लोगों तक पहुंच सके.

भारत के हरित भविष्य की ओर एक बड़ा कदम

यह सिर्फ एक ट्रांसमिशन लाइन नहीं, बल्कि भारत के हरित भविष्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के संकल्प का प्रतीक है. इस परियोजना के पूर्ण होने पर दक्षिण भारत के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, विशेष रूप से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और पुडुचेरी को 2 गीगावाट (2000 मेगावाट) स्वच्छ, हरित और विश्वसनीय परमाणु ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित होगी. इससे क्षेत्र में उद्योगों और घरों की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने में मदद मिलेगी.

यह पारेषण अवसंरचना 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का भी समर्थन करती है. यह परियोजना देश के एनर्जी ट्रांज़िशन, ऊर्जा सुरक्षा और एक स्थायी भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता में महत्वपूर्ण योगदान देगी.

कौन-कौन रहे उपस्थित?

इस ऐतिहासिक समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर आर. एन. रवि, माननीय राज्यपाल, तमिलनाडु; राममोहन नायडू किंजरापु, केंद्रीय नागर विमानन मंत्री; डॉ. एल. मुरुगन, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री; थंगम थेनारासु, कृषि मंत्री, तमिलनाडु; पी. गीता जीवन, समाज कल्याण और महिला सशक्तिकरण मंत्री, तमिलनाडु; कनिमोझी करुणानिधि, सांसद, समेत केंद्र एवं राज्य सरकार और पावरग्रिड के कई वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे.

पावरग्रिड: देश की ऊर्जा धमनी

पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) देश की सबसे बड़ी विद्युत पारेषण कंपनी है. 30 जून, 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, पावरग्रिड 1,80,533 सर्किट किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइनों और 284 उप-केंद्रों का एक विशाल नेटवर्क संचालित कर रहा है. कंपनी नवीनतम तकनीकी उपकरणों, स्वचालन और डिजिटल समाधानों को अपनाकर 99.84% से अधिक की औसत ट्रांसमिशन सिस्टम उपलब्धता बनाए रखने में सफल रही है, जो अपने आप में एक कीर्तिमान है. यह नई परियोजना पावरग्रिड की विशेषज्ञता और भारत के ऊर्जा भविष्य को आकार देने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को और मजबूत करती है.

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