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लोन या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए CIBIL Score बहुत अहम होता है. ये आपका फाइनेंशियल परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड जैसा होता है जो बताता है कि आप क्रेडिट को कितनी जिम्मेदारी से संभालते हैं. ज्यादातर लोग मानते हैं कि अगर EMI टाइम पर दे रहे हैं तो उनका स्कोर हमेशा अच्छा रहेगा. लेकिन कई बार EMI भरने के बावजूद CIBIL Score नीचे आने लगता है. ये देखकर दिमाग घूम जाता है कि आखिर गलती कहां हो रही है.
अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो एक बार अपने Credit Mix और बाकी फैक्टर्स को जरूर चेक करिएगा क्योंकि आपका स्कोर तय करने से पहले बैंक आपकी रीपेमेंट हिस्ट्री के अलावा तमाम अन्य फैक्टर्स पर नजर डालते हैं. यहां जानिए Credit Mix और बाकी फैक्टर्स के बारे में.
Credit Mix मतलब आपने कितने Secured Loan और कितने Unsecured Loan लिए हैं.
अगर आपके पास सिर्फ Personal Loan और Credit Card जैसे अनसिक्योर्ड लोन ही ज़्यादा हैं और सिक्योर्ड लोन काफी कम या बिल्कुल नहीं हैं, तो बैंक और NBFC को संकेत मिलता है कि आप उधारी पर ज़्यादा निर्भर रहते हैं. इससे आपका CIBIL Score गिर सकता है.
दूसरी तरफ, अगर आपने दोनों तरह के लोन लिए हैं और समय पर भुगतान भी करते रहे हैं, तो ये दिखाता है कि आप क्रेडिट को अच्छी तरह मैनेज कर सकते हैं. ऐसे लोगों का क्रेडिट मिक्स बैलेंस्ड माना जाता है और CIBIL Score बेहतर होता है.
इसीलिए एक्सपर्ट हमेशा कहते हैं कि बिना जरूरत के Personal Loan या बहुत ज्यादा Credit Card इस्तेमाल करने से बचें.
आपके क्रेडिट कार्ड की जितनी लिमिट है, उसका आप कितना इस्तेमाल कर रहे हैं, इसे Credit Utilization Ratio कहते हैं. अगर आप अपनी लिमिट का 60-90% तक हर महीने इस्तेमाल करते हैं तो ये दिखाता है कि आप लगातार क्रेडिट पर निर्भर हैं.दकोशिश करें कि क्रेडिट कार्ड लिमिट का 30% तक ही इस्तेमाल करें.
आप जब पहली बार लोन लेते हैं या क्रेडिट कार्ड लेते हैं, तभी से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री बननी शुरू हो जाती है. सिबिल स्कोर तैयार करते समय आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को भी देखा जाता है. आपकी क्रेडिट हिस्ट्री कितनी पुरानी है और आपने पहले भी लोन लेने के बाद या क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल के बाद समय से भुगतान किया है या नहीं, ये सभी चीजें देखी जाती हैं. इस क्रेडिट हिस्ट्री का असर भी आपके सिबिल स्कोर पर पड़ता है.
अगर आपने पहले कभी लोन सेटलमेंट किया है या किसी और के Loan में Guarantor बने हैं और वो पेमेंट में डिफॉल्ट कर रहे हैं तो इसका नुक़सान आपके स्कोर को भी होता है.
कई बार बैंक या लोन देने वाली संस्था की तरफ से गलत रिपोर्टिंग हो जाती है- जैसे कि आपने पेमेंट कर दिया हो लेकिन सिस्टम में अपडेट ना हुआ हो. इससे भी स्कोर गिर सकता है. इसलिए समय-समय पर Credit Report चेक करते रहना जरूरी है.
क्योंकि स्कोर सिर्फ रीपेमेंट पर नहीं बल्कि क्रेडिट मिक्स, क्रेडिट यूटिलाइजेशन, क्रेडिट हिस्ट्री और रिपोर्ट एरर पर भी निर्भर करता है.
कम से कम 6 महीने में एक बार रिपोर्ट चेक करना जरूरी है.
अगर Personal Loan ज्यादा बार लेते हैं या सिर्फ Unsecured Loan ही हैं तो स्कोर पर नेगेटिव असर होता है.
आमतौर पर सही कदम उठाने पर स्कोर 3–6 महीने में सुधार दिखाना शुरू कर देता है.