चेक पर बनी 2 लाइनें क्यों होती हैं? जानिए ‘Account Payee’ का असली मतलब और कैसे बचाता है आपका पैसा

डिजिटल बैंकिंग के दौर में भी बड़े पेमेंट के लिए चेक की अहमियत कम नहीं हुई है. क्या आप जानते हैं कि चेक पर खिंची दो तिरछी लाइनों और "A/C Payee" का असल मतलब क्या है? यह आपके पैसे को चोरी और फ्रॉड से बचाने का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है. जानिए चेक क्रॉसिंग के नियम और इसके पीछे का दिलचस्प इतिहास.
चेक पर बनी 2 लाइनें क्यों होती हैं? जानिए ‘Account Payee’ का असली मतलब और कैसे बचाता है आपका पैसा

डिजिटल बैंकिंग के दौर में भी बड़े पेमेंट के लिए चेक की अहमियत कम नहीं हुई है. (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)

आज भले ही UPI और नेट बैंकिंग का जमाना हो, लेकिन बैंकिंग सिस्टम में चेक की अहमियत अभी भी वही है,यानी कि खत्म नहीं हुई है. स्पेशली बड़े पेमेंट, बिजनेस ट्रांजेक्शन, प्रॉपर्टी डील और सरकारी पेमेंट में आज भी चेक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है.

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कई चेक पर ऊपर की तरफ दो तिरछी लाइनें (//) बनी होती हैं? और उनके बीच में अक्सर “A/C Payee” लिखा होता है. आखिर इसका मतलब क्या है और बैंकिंग सिस्टम में इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

असल में ये दो लाइनें आपके पैसे को सेफ रखने का सबसे बड़ा ऑप्शन मानी जाती हैं.

क्या होता है ‘Cheque Crossing’?

जब किसी चेक पर दो पैरेलल लाइनें खींच दी जाती हैं, तो इसे “Crossed Cheque” कहा जाता है.असल में इसका मतलब यह होता है कि उस चेक का पैसा सीधे कैश में नहीं दिया जाएगा, बल्कि केवल बैंक अकाउंट के जरिए ही ट्रांसफर किया जाएगा.

यानी कि अगर चेक किसी गलत व्यक्ति के हाथ लग जाए, तब भी वह सीधे बैंक काउंटर से कैश नहीं निकाल पाएगा.

‘A/C Payee’ का मतलब क्या है?

अगर चेक पर दो लाइनें खींचकर उनके बीच “A/C Payee” लिखा हो, तो इसका मतलब और ज्यादा सख्त हो जाता है.

इस स्थिति में पैसा केवल उसी इंसान के बैंक अकाउंट में जाएगा जिसका नाम चेक पर लिखा है,कोई दूसरा व्यक्ति उसे अपने अकाउंट में जमा नहीं कर सकता है. असल में इससे फ्रॉड और गलत पेमेंट का रिस्क काफी कम हो जाता है.तो यही कारण है कि आज ज्यादातर कंपनियां, बैंक और सरकारी संस्थाएं Account Payee Cheque ही जारी करती हैं.

आखिर ये सिस्टम शुरू क्यों हुआ?

मानते हैं कि 19वीं सदी में ब्रिटेन में बैंकिंग और बिजनेस तेजी से बढ़ रहा था, उस समय कई चेक Bearer Cheque होते थे. यानी कि जिसके पास चेक होता था, बैंक उसे पेमेंट कर देता था.

इससे चोरी और फ्रॉड के मामले बढ़ने लगे थे. फिर इसी समस्या को रोकने के लिए बैंकों ने Cheque Crossing का ऑप्शन शुरू किया, ताकि पेमेंट को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके.

बाद में ब्रिटेन में इसे कानूनी मान्यता मिली और फिर भारत सहित कई देशों के बैंकिंग कानूनों में इसे शामिल किया गया.

भारत में कौन सा कानून लागू होता है?

भारत में चेक से जुड़े नियम Negotiable Instruments Act, 1881 के तहत आते हैं

इसी कानून में General Crossing,Special Crossing,Account Payee Crossing जैसी व्यवस्थाओं को मान्यता दी गई है.

कितने प्रकार की होती है चेक क्रॉसिंग?

1. General Crossing

सिर्फ दो लाइनें खींची जाती हैं,इसका मतलब है कि भुगतान केवल बैंक अकाउंट के जरिए होगा.

2. Special Crossing

दो लाइनें खींचकर किसी खास बैंक का नाम लिखा जाता है,यानी कि पैसा उसी बैंक के जरिए क्लियर होगा

3. Account Payee Crossing

यह सबसे सेफ ऑप्शन माना जाता है, कि पैसा केवल नामित व्यक्ति के खाते में ही जाएगा

आज के डिजिटल दौर में भी क्यों जरूरी है ये सिस्टम?

UPI आने के बाद भी चेक पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. असल में बड़ी रकम के भुगतान में आज भी लोग चेक को ज्यादा सेफ मानते हैं.

इसके पीछे वजह है लिखित रिकॉर्ड,बैंकिंग ट्रेल,कानूनी सुरक्षा,फ्रॉड कंट्रोल.तो फिर इसीलिए कंपनियां अक्सर Account Payee Only चेक ही जारी करती हैं.

चेक इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • आप हमेशा A/C Payee क्रॉसिंग करें
  • खाली चेक किसी को भी नहीं दें
  • साइन के पास खाली जगह न छोड़ें
  • रकम शब्दों और अंकों दोनों में साफ लिखें
  • चेकबुक खो जाए तो तुरंत बैंक को इंफॉर्म करें

आपके काम की बात


चेक पर बनी दो छोटी लाइनें केवल एक निशान नहीं, बल्कि आपके पैसे की सुरक्षा का बड़ा कवच हैं. बैंकिंग सिस्टम में “Account Payee जैसी व्यवस्था इसलिए लाई गई ताकि गलत इंसान आपके पैसे तक पहुंच ही न सके. असल में आज डिजिटल पेमेंट्स के दौर में भी यह नियम उतना ही जरूरी है, क्योंकि आखिरकार बैंकिंग में सबसे बड़ी चीज है भरोसा और सुरक्षा.

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