SMA Account Rules: क्या है स्पेशल मेंशन अकाउंट? लोन की किस्त में जरा सी देरी और बैंक की 'ब्लैक लिस्ट'! जानें बचने के रूल

SMA (Special Mention Account) वह लिस्ट है जिसमें लोन की EMI समय पर न भरने पर खाता डाला जाता है.तो 30, 60 और 90 दिन की देरी पर अलग-अलग स्तर तय होते हैं.जी हां समय रहते सुधार न किया तो खाता NPA बन सकता है.
SMA Account Rules: क्या है स्पेशल मेंशन अकाउंट? लोन की किस्त में जरा सी देरी और बैंक की 'ब्लैक लिस्ट'! जानें बचने के रूल

आज के समय में होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या बिजनेस लोन लेना आम बात हो गई है.जी हां बैंक और एनबीएफसी कंपनियां आसानी से कर्ज उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन इसके साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है, टाइम पर ईएमआई चुकाना.जी हां कई बार नौकरी में अस्थिरता, अचानक मेडिकल खर्च, आदि में इनकम में कमी के कारण लोग किस्त टाइम पर जमा नहीं कर पाते. यहीं से शुरू होती है परेशानी, और बैंक ऐसे खातों को एक विशेष श्रेणी में डाल देते हैं जिसे स्पेशल मेंशन अकाउंट यानी SMA कहा जाता है.

असल में अधिकतर लोग केवल NPA (Non-Performing Asset) के बारे में जानते हैं, लेकिन एनपीए बनने से पहले बैंक आपको एक ऐसी कैटेगरी में डालता है जो आपके फाइनेंशियल फ्यूचर के लिए किसी रेड सिग्नल से कम नहीं है. इसे सिंपल भाषा SMA यानी 'स्पेशल मेंशन अकाउंट' (Special Mention Account) कहते हैं.

सवाल: क्या है SMA और क्यों यह आपके लिए रिस्की?

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  • इसका मकसद ऐसे लोन खातों की पहचान करना है, जहां डिफॉल्ट का खतरा बढ़ रहा हो.
  • जैसे ही EMI तय तारीख पर जमा नहीं होती, खाता नॉर्मल लिस्ट से हटाया जा सकता है.
  • उसे ‘स्पेशल मेंशन’ कैटेगरी में डालकर बैंक अलर्ट हो जाता है.
  • यह कदम सीधे डिफॉल्टर घोषित करना नहीं, बल्कि शुरुआती चेतावनी है.
  • बैंक मानता है कि ग्राहक की फाइनेंशियल स्थिति दबाव में हो सकती है.
  • इसके बाद खाते पर कड़ी निगरानी रखी जाती है और रिस्क का आकलन बढ़ा दिया जाता है.bank

क्या हैं SMA की तीन सीढ़ियां: 0 से 90 दिन का सफर?

आरबीआई ने ईएमआई में देरी की गंभीरता को समझने के लिए इसे तीन मुख्य हिस्सों में बांटा है.

SMA-0 (0 से 30 दिन की देरी): अगर ईएमआई की तारीख 1 तारीख थी और आज 5 या 10 तारीख हो गई है, तो आप SMA-0 कैटेगरी में आ जाते हैं,तो यहां बैंक आपको मैसेज या कॉल के जरिए याद दिलाना शुरू करता है. असल में यह शुरुआती चेतावनी है.
SMA-1 (31 से 60 दिन की देरी): अगर लगातार दो महीने की किश्त चुकाने में नाकाम रहते हैं, तो आप SMA-1 में पहुंच जाते हैं. यहां से मामला गंभीर होने लगता है और बैंक की रिकवरी टीम एक्टिव हो जाती है.
SMA-2 (61 से 90 दिन की देरी): यह सबसे खतरनाक स्टेज ये होती है. जी हां अगर 60 दिन बीत चुके हैं और तीसरे महीने की किश्त भी नहीं आई, तो आप SMA-2 कैटेगरी में आ जाते हैं,असल में यह एनपीए (NPA) बनने से ठीक पहले का पड़ाव है.

नोट: जैसे ही 90 दिन पूरे होते हैं, आपका लोन अकाउंट NPA*घोषित कर दिया जाता है, जिसके बाद बैंक कानूनी कार्रवाई और संपत्ति की नीलामी जैसा प्रोसेस शुरू कर सकता है.

कैटेगरीदेरी की अवधिरिस्क का स्तरफ्यूचर पर असर
SMA-01 से 30 दिनकमक्रेडिट स्कोर पर हल्का असर संभव
SMA-131 से 60 दिनमध्यमनया लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना कठिन
SMA-261 से 90 दिनबहुत अधिकबैंक की निगरानी और ब्लैकलिस्ट का खतरा
NPA90 दिन से ज्यादागंभीर संकटकानूनी कार्रवाई, रिकवरी प्रक्रिया और संपत्ति नीलामी

क्यों लिया जाना जरूरी है सख्त एक्शन?

  • जब आपका नाम SMA लिस्ट में आता है, तो केवल एक मैसेज नहीं आता, बल्कि आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पर खतरा आता है.
  • बैंक या एनबीएफसी (NBFC) का आप पर से भरोसा टूटने लगता है.
  • फ्यूचर में अगर आप किसी दूसरी स्कीम या टॉप-अप लोन की मांग करेंगे, तो बैंक पुराना रिकॉर्ड देखकर रिजेक्ट कर सकता है.
  • बैंक आपको 'हाई रिस्क' वाले ग्राहकों की सूची में डाल देता है.
  • मतलब है कि अगर फ्यूचर में लोन मिला भी, तो उस पर Interest Rate बहुत ज्यादा लेगा.
  • अक्सर महिलाएं होम लोन में को-एप्लिकेंट (Co-applicant) होती हैं.
  • अगर मुख्य आवेदक किश्त मिस करता है, तो महिला का क्रेडिट स्कोर भी उतना ही खराब होता है.
  • ऐसा होने से उन्हें अपने पर्सनल काम के लिए लोन लेने में दिक्कत आती है.bank

SMA की खतरनारक लिस्ट से बचने के ऑप्शन क्या हो सकते हैं.

Loan Restructuring): अगर पता लगे कि अगले 2-3 महीने पैसे की परेशानी होगी, तो चुप बैठने के बजाय बैंक मैनेजर से मिलें. आप लोन रिस्ट्रक्चरिंग या किश्त को कुछ समय के लिए टालने की मांग कर सकते हैं.
ऑटो-डेबिट (NACH) का यूज: कई बार हम डेट भूल जाते हैं. इससे बचने के लिए खाते में ऑटो-डेबिट सेट करें. यह तय करें कि किस्त की तारीख से 2 दिन पहले खाते में पर्याप्त बैलेंस हो.
इमरजेंसी फंड बनाना: आपके पास कम से कम 6 महीने की ईएमआई के बराबर पैसा हमेशा एक अलग 'इमरजेंसी फंड' में होना चाहिए.असल में यह फंड आपको किसी भी इमरजेंसी में SMA में जाने से बचा सकता है.
क्रेडिट कार्ड और फालतू लोन से दूरी: कई बार हम एक लोन की किश्त भरने के लिए क्रेडिट कार्ड से पैसा निकाल लेते हैं या छोटा 'ऐप लोन' ले लेते हैं.

कम शब्दों में पूरी बात

आपका बैंक खाता आपकी फाइनेंशियल कुंडली हो सकती है.असल में SMA कोई सजा नहीं, बल्कि एक सुधारने का मौका है.तो अगर आप SMA-0 या 1 में हैं, तो आज ही अपनी किश्त क्लियर करें और बैंक के साथ अपने रिश्तों को सुधारें.ऐसे में याद रखिए, पैसा दोबारा कमाया जा सकता है, लेकिन खराब हुआ सिबिल स्कोर (CIBIL Score) और बैंकिंग इमेज सुधारने में बरसों लग जाते हैं.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 स्पेशल मेंशन अकाउंट (SMA) क्या होता है?

जब लोन की EMI समय पर जमा नहीं होती, तो बैंक खाते को शुरुआती चेतावनी के रूप में SMA कैटेगरी में डालता है

Q2 SMA के कितने प्रकार होते हैं?

तीन प्रकार-SMA-0 (0-30 दिन देरी), SMA-1 (31-60 दिन), SMA-2 (61-90 दिन)

Q3 90 दिन से ज्यादा EMI न भरने पर क्या होता है?

खाता NPA (Non-Performing Asset) घोषित किया जा सकता है

Q4 क्या SMA में आने से क्रेडिट स्कोर प्रभावित होता है?

लगातार देरी से क्रेडिट प्रोफाइल कमजोर हो सकती है और भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो सकता है

Q5 SMA से कैसे बचा जा सकता है?

समय पर EMI भरें, ऑटो-डेबिट सुविधा अपनाएं और समस्या होने पर बैंक से तुरंत संपर्क करें

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