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आज के समय में होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या बिजनेस लोन लेना आम बात हो गई है.जी हां बैंक और एनबीएफसी कंपनियां आसानी से कर्ज उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन इसके साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है, टाइम पर ईएमआई चुकाना.जी हां कई बार नौकरी में अस्थिरता, अचानक मेडिकल खर्च, आदि में इनकम में कमी के कारण लोग किस्त टाइम पर जमा नहीं कर पाते. यहीं से शुरू होती है परेशानी, और बैंक ऐसे खातों को एक विशेष श्रेणी में डाल देते हैं जिसे स्पेशल मेंशन अकाउंट यानी SMA कहा जाता है.
असल में अधिकतर लोग केवल NPA (Non-Performing Asset) के बारे में जानते हैं, लेकिन एनपीए बनने से पहले बैंक आपको एक ऐसी कैटेगरी में डालता है जो आपके फाइनेंशियल फ्यूचर के लिए किसी रेड सिग्नल से कम नहीं है. इसे सिंपल भाषा SMA यानी 'स्पेशल मेंशन अकाउंट' (Special Mention Account) कहते हैं.

आरबीआई ने ईएमआई में देरी की गंभीरता को समझने के लिए इसे तीन मुख्य हिस्सों में बांटा है.
SMA-0 (0 से 30 दिन की देरी): अगर ईएमआई की तारीख 1 तारीख थी और आज 5 या 10 तारीख हो गई है, तो आप SMA-0 कैटेगरी में आ जाते हैं,तो यहां बैंक आपको मैसेज या कॉल के जरिए याद दिलाना शुरू करता है. असल में यह शुरुआती चेतावनी है.
SMA-1 (31 से 60 दिन की देरी): अगर लगातार दो महीने की किश्त चुकाने में नाकाम रहते हैं, तो आप SMA-1 में पहुंच जाते हैं. यहां से मामला गंभीर होने लगता है और बैंक की रिकवरी टीम एक्टिव हो जाती है.
SMA-2 (61 से 90 दिन की देरी): यह सबसे खतरनाक स्टेज ये होती है. जी हां अगर 60 दिन बीत चुके हैं और तीसरे महीने की किश्त भी नहीं आई, तो आप SMA-2 कैटेगरी में आ जाते हैं,असल में यह एनपीए (NPA) बनने से ठीक पहले का पड़ाव है.
नोट: जैसे ही 90 दिन पूरे होते हैं, आपका लोन अकाउंट NPA*घोषित कर दिया जाता है, जिसके बाद बैंक कानूनी कार्रवाई और संपत्ति की नीलामी जैसा प्रोसेस शुरू कर सकता है.
| कैटेगरी | देरी की अवधि | रिस्क का स्तर | फ्यूचर पर असर |
|---|
| SMA-0 | 1 से 30 दिन | कम | क्रेडिट स्कोर पर हल्का असर संभव |
| SMA-1 | 31 से 60 दिन | मध्यम | नया लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना कठिन |
| SMA-2 | 61 से 90 दिन | बहुत अधिक | बैंक की निगरानी और ब्लैकलिस्ट का खतरा |
| NPA | 90 दिन से ज्यादा | गंभीर संकट | कानूनी कार्रवाई, रिकवरी प्रक्रिया और संपत्ति नीलामी |
Loan Restructuring): अगर पता लगे कि अगले 2-3 महीने पैसे की परेशानी होगी, तो चुप बैठने के बजाय बैंक मैनेजर से मिलें. आप लोन रिस्ट्रक्चरिंग या किश्त को कुछ समय के लिए टालने की मांग कर सकते हैं.
ऑटो-डेबिट (NACH) का यूज: कई बार हम डेट भूल जाते हैं. इससे बचने के लिए खाते में ऑटो-डेबिट सेट करें. यह तय करें कि किस्त की तारीख से 2 दिन पहले खाते में पर्याप्त बैलेंस हो.
इमरजेंसी फंड बनाना: आपके पास कम से कम 6 महीने की ईएमआई के बराबर पैसा हमेशा एक अलग 'इमरजेंसी फंड' में होना चाहिए.असल में यह फंड आपको किसी भी इमरजेंसी में SMA में जाने से बचा सकता है.
क्रेडिट कार्ड और फालतू लोन से दूरी: कई बार हम एक लोन की किश्त भरने के लिए क्रेडिट कार्ड से पैसा निकाल लेते हैं या छोटा 'ऐप लोन' ले लेते हैं.
आपका बैंक खाता आपकी फाइनेंशियल कुंडली हो सकती है.असल में SMA कोई सजा नहीं, बल्कि एक सुधारने का मौका है.तो अगर आप SMA-0 या 1 में हैं, तो आज ही अपनी किश्त क्लियर करें और बैंक के साथ अपने रिश्तों को सुधारें.ऐसे में याद रखिए, पैसा दोबारा कमाया जा सकता है, लेकिन खराब हुआ सिबिल स्कोर (CIBIL Score) और बैंकिंग इमेज सुधारने में बरसों लग जाते हैं.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 स्पेशल मेंशन अकाउंट (SMA) क्या होता है?
जब लोन की EMI समय पर जमा नहीं होती, तो बैंक खाते को शुरुआती चेतावनी के रूप में SMA कैटेगरी में डालता है
Q2 SMA के कितने प्रकार होते हैं?
तीन प्रकार-SMA-0 (0-30 दिन देरी), SMA-1 (31-60 दिन), SMA-2 (61-90 दिन)
Q3 90 दिन से ज्यादा EMI न भरने पर क्या होता है?
खाता NPA (Non-Performing Asset) घोषित किया जा सकता है
Q4 क्या SMA में आने से क्रेडिट स्कोर प्रभावित होता है?
लगातार देरी से क्रेडिट प्रोफाइल कमजोर हो सकती है और भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो सकता है
Q5 SMA से कैसे बचा जा सकता है?
समय पर EMI भरें, ऑटो-डेबिट सुविधा अपनाएं और समस्या होने पर बैंक से तुरंत संपर्क करें