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बैंक आपको कैसे “डार्क पैटर्न” के जाल में फंसाते हैं? ये सवाल अब केवल ग्राहकों का नहीं, बल्कि सरकार और रिजर्व बैंक का भी बन गया है.असल में बीते दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को साफ शब्दों में कहा कि वे बीमा और दूसरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट गलत तरीके से बेचने के बजाय अपने असली काम पर ध्यान देना चाहिए. इसके तुरंत बाद RBI ने भी सख्त रुख अपनाते हुए एक ड्राफ्ट गाइडलाइन जारी की है, जिसमें बैंकों को जुलाई 2026 तक हर तरह के “डार्क पैटर्न” खत्म करने को कहा गया है.
आसान भाषा में समझें तो ये ऐसे तरीके हैं जिनसे बैंक या फाइनेंशियल कंपनियां आपको बिना जरूरत के कोई भी प्रोडक्ट खरीदने या एक्स्ट्रा चार्ज देने पर मजबूर कर देती हैं. जी हां ऐप या वेबसाइट का डिजाइन इस तरह बनाया जाता है कि आप कन्फ्यूज हो जाएं या जल्दी में गलत ऑप्शन चुन लें.
1. बास्केट स्नीकिंग (छिपा हुआ जोड़)
2. बार-बार खरीदने का दबाव
3. जबरन साइन-अप
4. कैंसल करना मुश्किल
5. बेट एंड स्विच
6. इंटरफेस में उलझाव
7. छिपे हुए चार्ज
8. डबल नेगेटिव भाषा
कई बैंकिंग ऐप “फ्री सर्विस” का विज्ञापन करते हैं. लेकिन जब आप पैसे ट्रांसफर करने या अकाउंट बंद करने की प्रोसेस शुरू करते हैं, तब अचानक अलग-अलग चार्ज जुड़ जाते हैं.असल में कभी ट्रांसफर फीस, कभी अकाउंट इनएक्टिविटी फीस. और यह सब आखिरी स्टेप पर दिखाया जाता है. तो कुछ मामलों में तो ग्राहक को बाद में बिल में एक्स्ट्रा शुल्क दिखता है, जबकि पहले इसकी कोई साफ जानकारी नहीं दी गई होतीय
RBI ने साफ कर दिया है कि बैंकों को पारदर्शिता दिखानी होगी.तो किसी भी प्रोडक्ट की बंडलिंग जबरन नहीं की जा सकती है. असल में ग्राहक की साफ-साफ सहमति जरूरी होगी और जुलाई 2026 तक हर तरह के डार्क पैटर्न खत्म करने होंगे.
जरूरत पड़े तो बैंक या RBI में शिकायत करें
डिजिटल बैंकिंग आसान जरूर है, लेकिन आंख बंद कर भरोसा करना सही नहीं है.तो अब जब RBI सख्त हो गया है, तो उम्मीद है कि बैंक भी पारदर्शी तरीके से काम करेंगे. लेकिन तब तक, हर छोटी-बड़ी चीज समझकर ही “Agree” बटन दबाएं.
FAQs
Q1. डार्क पैटर्न क्या होता है?
ऐसा डिजिटल डिजाइन या तरीका, जिससे ग्राहक को कन्फ्यूज कर अनचाहा प्रोडक्ट खरीदने या अतिरिक्त शुल्क देने पर मजबूर किया जाए
Q2. क्या डार्क पैटर्न अवैध है?
अगर ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना शुल्क या प्रोडक्ट जोड़ा जाए, तो यह गलत व्यापारिक प्रैक्टिस मानी जा सकती है
Q3. RBI ने क्या कदम उठाया है?
RBI ने बैंकों को जुलाई 2026 तक सभी डार्क पैटर्न खत्म करने और पारदर्शिता बढ़ाने का निर्देश दिया है
Q4. सबसे आम डार्क पैटर्न कौन से हैं?
छिपे हुए चार्ज, ऑटो-टिक बॉक्स, मुश्किल कैंसिलेशन, भ्रामक ऑफर और कन्फ्यूजिंग भाषा
Q5. ग्राहक खुद को कैसे बचाएं?
हर शर्त पढ़ें, चार्ज डिटेल चेक करें, ऑटो-सेलेक्ट हटाएं और जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज करें