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अगर आप कभी पर्सनल लोन लेने बैंक या फाइनेंस कंपनी गए होंगे तो आपने देखा होगा कि लोन के साथ-साथ आपको क्रेडिट कार्ड, बीमा पॉलिसी या टॉप-अप लोन जैसी चीजें भी ऑफर की जाती हैं. यह सब क्रॉस सेलिंग (Cross Selling) कहलाता है. ये ऑफर सुनने में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन आपको यह समझना जरूरी है कि ये ऑफर आपकी जेब पर कितना असर डाल सकते हैं.
क्रॉस सेलिंग का सीधा सा मतलब है कि जब आप कोई एक प्रोडक्ट ले रहे होते हैं तो उसके साथ आपको दूसरे प्रोडक्ट खरीदने के लिए कहा जाता है. जैसे अगर आप कोई लोन ले रहे हों तो आपको उसके साथ इंश्योरेंस या क्रेडिट कार्ड बेच दिया जाए. बैंक या फाइनेंस कंपनियां इसके जरिए अपना रेवेन्यू बढ़ाने की कोशिश करती हैं. साथ ही उनका एक मकसद ये भी होता है कि ग्राहकों के साथ मजबूत रिश्ता बने.
क्रॉस सेलिंग के जरिए बेचे गए प्रोडक्ट फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन इससे आपका बेकार का खर्च बढ़ सकता है. जैसे अगर आप किसी लोन के साथ उसका इंश्योरेंस लेते हैं, तो उस पर आपको अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ेंगे. वहीं अगर आपको उसके साथ क्रेडिट कार्ड बेच दिया जाता है तो आप धीरे-धीरे क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग शुरू कर देंगे. इससे आपका खर्च बढ़ने लगेगा और आप कभी कर्ज के जाल में भी फंस सकते हैं.
लोन लेते वक्त कभी भी बिना पूछे ऐड-ऑन प्रोडक्ट्स को मंजूरी न दें. ऑनलाइन फॉर्म भरते समय पहले से टिक किए गए ऑप्शन को ध्यान से देखें और जो काम के ना लगें उन्हें अनचेक करें. यह भी जरूर देखें कि EMI में कोई छुपा हुआ चार्ज तो नहीं जुड़ रहा है. क्रेडिट कार्ड अगर जरूरत न हो तो न लें, क्योंकि इससे आपका खर्च बढ़ना तय है. अगर बैंक आप पर कोई दबाव बनाए तो आप साफ मना कर दें.
बिलकुल भी नहीं. RBI के नियमों के अनुसार कोई भी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन आपको लोन मंजूर करने के लिए थर्ड पार्टी प्रोडक्ट खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. आप बिना किसी डर के इन ऑफर्स को मना कर सकते हैं. अगर कोई बैंक फिर भी आपको ऐसे प्रोडक्ट बेचने की कोशिश करता है तो आप उसके खिलाफ शिकायत कर सकते हैं.