पर्सनल लोन लेने के बाद नहीं चुका पाए तो क्‍या होगा? जानिए बैंक कैसे करता है रिकवरी और कब लेता है लीगल एक्‍शन?

पर्सनल लोन चुकाने में देरी या डिफॉल्ट करना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. ये न केवल आर्थिक स्थिति को बिगाड़ता है, बल्कि भविष्य के फाइनेंशियल गोल्‍स पर भी असर डालता है. बैंक ऐसे मामलों में आरबीआई के नियमों के अनुसार कार्रवाई करता है. जानिए स्टेप बाय स्टेप बैंक की प्रक्रिया, आरबीआई के नियम और आपके लिए सुरक्षित रास्ता क्या है.
पर्सनल लोन लेने के बाद नहीं चुका पाए तो क्‍या होगा? जानिए बैंक कैसे करता है रिकवरी और कब लेता है लीगल एक्‍शन?

पर्सनल लोन आजकल उन लोगों के लिए सबसे आसान ऑप्शन बन गया है जिन्हें अचानक पैसों की जरूरत होती है- चाहे शादी हो, मेडिकल खर्च या फिर किसी जरूरी बिल का भुगतान. चूंकि ये अनसिक्योर्ड लोन होता है, इसलिए बैंक इसे बिना किसी गारंटी या सिक्योरिटी के दे देते हैं. लेकिन आसानी से मिलने वाला ये लोन कई बार बड़ी मुश्किल भी बन जाता है, खासकर तब जब आप समय पर इसकी ईएमआई नहीं चुका पाते.

लोन न चुकाने पर बैंक सिर्फ फोन कॉल तक सीमित नहीं रहता. नियम के तहत ऐसे में बैंक उधारकर्ता को नोटिस भेज सकता है, रिकवरी एजेंट भेज सकता है और जरूरत पड़ी तो कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है. आइए डीटेल में समझते हैं इस बारे में-

1. Personal Loan है Unsecured, फिर भी Bank कर सकता है कार्रवाई

पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन होता है यानी इसके लिए किसी संपत्ति को गिरवी नहीं रखना पड़ता. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि डिफॉल्‍ट होने के बाद बैंक उधारकर्ता के खिलाफ कुछ कर नहीं सकता. ध्‍यान रखना कि पर्सनल लोन की ब्याज दरें काफी ज्यादा होती हैं, इसलिए रीपेमेंट में चूक करना आपको महंगा पड़ सकता है.

2. कब बनते हैं आप Loan Defaulter?

आरबीआई के नियमों के अनुसार, अगर किसी उधारकर्ता की लगातार तीन ईएमआई मिस होती हैं, तो उसे डिफॉल्टर की लिस्ट में डाल दिया जाता है. लेकिन बैंक तुरंत कोई सख्त एक्शन नहीं लेता. पहले वो ग्राहक को याद दिलाने के लिए रिमाइंडर नोटिस भेजता है और लेट पेमेंट चार्ज लगाता है. इसके बाद बातचीत के जरिये समाधान की कोशिश होती है.

3. कब उठाए जाते हैं Legal Steps?

अगर ग्राहक की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती या बैंक को पैसे वापस नहीं मिलते, तो मामला गंभीर हो जाता है. ऐसे में-

  • बैंक रिकवरी एजेंसियों की मदद ले सकता है.
  • एजेंट फोन कॉल या घर आकर भुगतान के लिए कह सकते हैं.
  • अगर तब भी लोन नहीं चुकाया गया, तो बैंक कोर्ट में केस दर्ज कर सकता है.
  • कोर्ट के आदेश पर आपकी सैलरी से सीधे पैसे काटे जा सकते हैं.

4. CIBIL Score पर पड़ता है सीधा असर

  • पर्सनल लोन डिफॉल्ट करने से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री खराब हो जाती है.
  • आपका CIBIL Score गिर जाता है, जिससे आगे जाकर कोई भी बैंक या एनबीएफसी आपको लोन देने से इनकार कर सकता है.
  • भले ही बाद में आप लोन चुका दें, लेकिन आपकी रीपेमेंट हिस्ट्री में दाग रह जाता है, जो भविष्य में रुकावट बन सकता है.

5. क्या करें अगर EMI नहीं दे पा रहे हैं?

  • अगर आप किसी वजह से ईएमआई नहीं चुका पा रहे हैं, तो सबसे पहले अपने बैंक से संपर्क करें.
  • बैंक से री-स्ट्रक्चरिंग या मॉरिटोरियम की रिक्वेस्ट करें.
  • कोई भी लीगल नोटिस को नजरअंदाज न करें.
  • जरूरत पड़े तो किसी वित्तीय सलाहकार से राय लें.
  • बैंक से बात करके ईएमआई प्लान में बदलाव भी करवाया जा सकता है.

6. डरने की जरूरत नहीं, समझदारी जरूरी है

बैंक का मकसद लोन की रकम वसूलना होता है, किसी को डराना नहीं. इसलिए शांत रहकर बैंक से बातचीत करें और अपना पक्ष सही तरीके से रखें. समय रहते कदम उठाने से आप डिफॉल्टर बनने से बच सकते हैं और अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित रख सकते हैं.

FAQs

Q1. क्या बैंक पर्सनल लोन न चुकाने पर सीधे जेल भेज सकता है?

नहीं. बैंक सीधे जेल नहीं भेज सकता, लेकिन कोर्ट में केस दर्ज कर सकता है. अगर कोर्ट आदेश देता है तो आपकी सैलरी से पैसे काटे जा सकते हैं.

Q2. पर्सनल लोन की EMI न चुकाने पर CIBIL Score कितने पॉइंट्स गिर सकता है?

लगातार ईएमआई मिस होने पर CIBIL Score 50 से 100 पॉइंट्स तक गिर सकता है, जिससे भविष्य के लोन आवेदन रिजेक्ट हो सकते हैं.

Q3. क्या बैंक से EMI कम करवाने का ऑप्शन होता है?

हां, बैंक से बात करके री-स्ट्रक्चरिंग या EMI रीशेड्यूलिंग की जा सकती है, खासकर अगर वजह अस्थायी है.

Q4. क्या पर्सनल लोन बंद करने के बाद भी CIBIL Score सुधरता है?

हां, अगर आप बाकी लोन समय पर चुकाते हैं तो धीरे-धीरे आपका स्कोर सुधरने लगता है.

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