90 दिन का खेल.. जानिए कब आपका Loan बन जाता है बैंक का सिरदर्द, बजने लगती है खतरे की घंटी!

लोन (Loan) की EMI समय पर न भरना सिर्फ पेनल्टी तक सीमित नहीं है, यह आपकी क्रेडिट हिस्ट्री (CIBIL) को खराब कर सकता है, बैंक को आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर मजबूर कर सकता है और आपको NPA लिस्ट में डाल सकता है. इस खबर में जानिए NPA क्या है, कैसे तय होता है, इसके खतरे और इससे बचने के आसान तरीके.
90 दिन का खेल.. जानिए कब आपका Loan बन जाता है बैंक का सिरदर्द, बजने लगती है खतरे की घंटी!

Personal Loan: लोन की EMI समय पर भरना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि आपकी वित्तीय सेहत का सबसे अहम हिस्सा है. अगर आपने एक या दो महीने लेट कर दिया तो शायद ज्यादा आपको मामूली फर्क दिखे, लेकिन लगातार देरी आपके लिए भारी पड़ सकती है. आपका सिबिल (CIBIL) तो खराब होगा ही, आपको और भी परेशानियां झेलनी पड़ेंगी.

भारत में RBI के नियम साफ कहते हैं कि अगर कोई लोन 90 दिन तक नहीं चुकाया गया तो वह Non-Performing Asset यानी NPA बन जाता है. इसके बाद न सिर्फ आपका क्रेडिट स्कोर गिरता है, बल्कि बैंक कानूनी कार्रवाई तक कर सकता है.

NPA क्या है और कब बनता है?

RBI के मुताबिक, अगर किसी पर्सनल लोन का ब्याज या मूलधन 90 दिन या उससे ज्यादा समय तक बकाया रहता है, तो वह NPA माना जाता है. इसका मतलब है कि वह लोन बैंक के लिए अब कमाई का जरिया नहीं रहा.

SMA से NPA तक का सफर

NPA बनने से पहले लोन Special Mention Account (SMA) कैटेगरी में आता है—

कैटेगरीदेरी की अवधि
SMA-00-30 दिन तक देरी
SMA-131-60 दिन तक देरी
SMA-261-90 दिन तक देरी

लेट EMI का असर आपके क्रेडिट स्कोर पर

EMI टाइम पर भरना क्रेडिट स्कोर में सबसे ज्यादा वेटेज रखता है. एक EMI लेट होने से स्कोर में तुरंत गिरावट आती है. आपके क्रेडिट रिपोर्ट में Days Past Due (DPD) लिखा जाएगा. DPD 0 का मतलब है कि समय पर पेमेंट हुई है, वहीं DPD 30/60/90 का मतलब है 30/60/90 दिन की देरी.

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NPA कितनी तरह के होते हैं?

  • सब-स्टैंडर्ड (SUB)– 12 महीने तक के NPA.
  • डाउटफुल (DBT)– 12 महीने से ज्यादा के NPA, जिनकी रिकवरी मुश्किल होती है.
  • लॉस (LSS)– बैंक को यकीन हो जाता है कि कि पैसा वापस नहीं मिलेगा.

जब EMI लेट हो जाती है तो बैंक क्या करता है?

लीगल नोटिस- बकाया रकम और भुगतान की तारीख के साथ ग्राहक को लीगल नोटिस भेजा जाता है.

रीस्ट्रक्चरिंग की गुजारिश- अगर आपकी स्थिति सच में खराब है, तो बैंक आपसे लोन को रीस्ट्रक्चर करने को कह सकता है, जिसके तहत ईएमआई कम की जा सकती है और अवधि बढ़ाई जा सकती है.

कोर्ट केस- लोन न चुकाने पर बैंक कोर्ट में केस कर सकता है.

संपत्ति अटैचमेंट- बैंक आपका सेविंग अकाउंट और FD तक अटैच करा सकता है. वहीं कोर्ट के आदेश पर आपकी कोई संपत्ति या घर भी बिकने की नौबत आ सकती है.

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NPA से बाहर निकलने का क्या है तरीका?

पूरा बकाया चुकाएं, जिसमें ब्याज और मूलधन शामिल होता है. इसके बाद बैंक आपके खाते को स्टैंडर्ड अकाउंट में बदल देगा. ऐसा होते ही आपका क्रेडिट स्कोर धीरे-धीरे सुधरना शुरू हो जाता है.

समय पर EMI भरना क्यों है जरूरी?

  • बैंक की नजर में भरोसेमंद बने रहते हैं
  • क्रेडिट स्कोर ऊंचा रहता है
  • भविष्य में आसानी से लोन/क्रेडिट कार्ड मिलते हैं
  • कोर्ट केस और संपत्ति अटैचमेंट से बचाव

Conclusion

EMI समय पर भरना सिर्फ बैंक की शर्त नहीं, बल्कि आपकी वित्तीय आजादी की गारंटी है. एक लेट पेमेंट आपको NPA की खतरनाक लिस्ट में डाल सकता है, जिससे बाहर निकलना आसान नहीं है. अगर कभी समस्या हो जाए, तो बैंक से बात करें- चुप रहने से नुकसान ही होगा.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. लोन को NPA बनने में कितने दिन लगते हैं?

90 दिन तक EMI न भरने पर लोन NPA बन जाता है.

Q2. क्या एक EMI लेट होने पर भी क्रेडिट स्कोर गिरता है?

हां, एक भी देरी स्कोर पर असर डालती है.

Q3. SMA-0, SMA-1, SMA-2 क्या होते हैं?

ये EMI में देरी के शुरुआती चरण हैं, NPA से पहले.

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Q4. NPA से बाहर कैसे निकला जा सकता है?

पूरा बकाया चुकाकर खाता स्टैंडर्ड में बदलवाएं.

Q5. NPA में फंसने पर क्या बैंक संपत्ति अटैच कर सकता है?

हां, कोर्ट ऑर्डर के जरिए संपत्ति अटैच हो सकती है.

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