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क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता जा रहा है. आज के वक्त में तो सिर्फ शॉपिंग (Shopping) ही नहीं, बल्कि क्रेडिट कार्ड से कई तरह के काम करते हैं. अब तो क्रेडिट कार्ड से घर का रेंट (Rent) तक चुकाने की सुविधा शुरू हो चुकी है और बहुत सारे इस सुविधा का फायदा भी उठा रहे हैं.
किराया हर महीने की एक जरूरी और तय खर्च होता है. ऐसे में कुछ लोग सोचते हैं कि क्यों न इसे क्रेडिट कार्ड से चुकाया जाए, ताकि पॉइंट्स और कैशबैक जैसे फायदे मिल सकें. लेकिन हर कार्ड से किया गया भुगतान सिर्फ फ्री मनी नहीं होता. इसमें छिपे कुछ चार्जेस और नियम होते हैं, जो आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं. आइए जानते हैं क्रेडिट कार्ड से रेंट देने के फायदे-नुकसान.
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जब आप किराया क्रेडिट कार्ड से देते हैं, तो कार्ड कंपनी इस पर 1 से 2.5 फीसदी तक का सर्विस चार्ज ले सकती है. उदाहरण के लिए, अगर आपका किराया ₹50,000 है, तो आपको ₹500 से ₹1250 तक का एक्स्ट्रा भुगतान करना पड़ सकता है. अब सोचिए, हर महीने का ये चार्ज साल भर में कितनी बड़ी रकम बन सकता है. यानी साल भर में आपका 6000 से 15 हजार रुपये तक तो सिर्फ एक्स्ट्रा चार्ज देने में चला जाएगा.
कई क्रेडिट कार्ड कंपनियां रेंट देने को "क्वासी कैश ट्रांजैक्शन" मानती हैं. इसका मतलब ये होता है कि इस ट्रांजैक्शन पर आपको कोई रिवॉर्ड प्वाइंट नहीं मिलेगा. यानी कैशबैक और प्वाइंट्स के चक्कर में आपने जो चार्ज दिया, वो बेकार हो सकता है. इसीलिए, अपने कार्ड की टर्म्स एंड कंडीशन अच्छे से पढ़ें.
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जब आप महीने की शुरुआत में भारी रकम (जैसे किराया) कार्ड से चुकाते हैं, तो आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो बढ़ जाता है. इसका सीधा असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ सकता है. अगर आपकी अन्य जरूरतें भी कार्ड से जुड़ी हैं, तो स्कोर पर बुरा असर पड़ सकता है.
क्रेडिट कार्ड से किराया देना उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो समय से बिल चुका सकते हैं. अगर आप रिवार्ड्स या कैशबैक का फायदा उठा सकते हैं, तो भी आपके लिए यह अच्छा है. जो लोग अपने खर्चों को मैनेज करना जानते हैं, वह भी क्रेडिट कार्ड से रेंट देकर फायदा उठा सकते हैं. अगर आप इन शर्तों को पूरा नहीं करते, तो क्रेडिट कार्ड से रेंट देने का ये तरीका आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है.
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अगर आप किराया देने का तरीका बदलने की सोच रहे हैं, तो पहले अपने कार्ड की शर्तें समझें. सर्विस चार्ज कितना है, रिवॉर्ड मिलेगा या नहीं और आपके खर्चों में इसका क्या असर पड़ेगा, ये सब चेक कर लें. तभी तय करें कि यह आपके लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह. अगर आपको फायदा दिखे तो इस्तेमाल करें, वरना नहीं.