&format=webp&quality=medium)
भारत में लाखों लोगों के पास एक से ज्यादा बैंक खाते होते हैं. कभी नई नौकरी में खुला सैलरी अकाउंट, कभी किसी ऑफर के चक्कर में खुला खाता या फिर सालों पहले खुलवाया गया जॉइंट अकाउंट. वक्त के साथ हम उसे इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं, लेकिन खाता बंद नहीं करवाते. यहीं से शुरू होता है पेनल्टी और फीस का असली गेम.
अधिकांश सेविंग अकाउंट में बैंक एक निश्चित मिनिमम बैलेंस रखने की शर्त लगाते हैं. अगर खाते में तय रकम नहीं है, तो बैंक हर महीने पेनल्टी काट सकता है.
अगर महीनों या वर्षों तक आप अकाउंट चेक ही नहीं करते, तो आपको पता ही नहीं चलता कि खाते में जुर्माने का पहाड़ खड़ा हो गया है.
ये भी पढ़ें: आपके दोस्त और रिश्तेदार भी करते हैं आपके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल? आपको उठाना पड़ सकता है ये नुकसान
अगर लगातार 12 महीने कोई ट्रांजैक्शन नहीं होता, तो खाता ‘इनएक्टिव’ हो सकता है. दो साल तक लेनदेन न होने पर वह ‘डोरमेंट’ में जा सकता है.
उसके बाद:
यानी जिस खाते को आप भूल चुके हैं, उसे दोबारा चालू कराने में समय और मेहनत दोनों लगते हैं.
साधारण सेविंग अकाउंट सीधे क्रेडिट स्कोर को प्रभावित नहीं करता. लेकिन अगर उस अकाउंट से ओवरड्राफ्ट (OD) सुविधा जुड़ी है या कोई चार्ज बाकी रह गया है, तो मामला गंभीर हो सकता है. मान लीजिए:
ऐसी स्थिति में बैंक इसे बकाया मान सकता है और रिपोर्टिंग एजेंसी जैसे TransUnion CIBIL को सूचित कर सकता है. इससे आपका CIBIL स्कोर प्रभावित हो सकता है.
यानी छोटा सा अनदेखा अकाउंट, बड़े लोन पर असर डाल सकता है.
कई बार पुराने बैंक खाते से ये सुविधाएं जुड़ी रहती हैं:
अगर खाते में बैलेंस नहीं है और आप सक्रिय निगरानी नहीं कर रहे, तो पेमेंट बाउंस हो सकता है. इससे:
अनयूज्ड अकाउंट साइबर ठगों के लिए आसान निशाना बन सकता है. अगर:
तो किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन का मैसेज आपको मिल भी नहीं पाएगा. आप महीनों बाद जानेंगे कि खाते में कुछ गलत हुआ है. जितने कम और एक्टिव बैंक खाते होंगे, उतनी आपकी वित्तीय व्यवस्था साफ और सुरक्षित रहेगी.
| स्थिति | क्या होता है | संभावित नुकसान |
| मिनिमम बैलेंस नहीं रखा | हर महीने पेनल्टी | बैलेंस खत्म या नेगेटिव |
| लंबे समय तक ट्रांजैक्शन नहीं | अकाउंट डोरमेंट | दोबारा एक्टिव करने में परेशानी |
| OD सुविधा जुड़ी | ब्याज/चार्ज जमा | क्रेडिट स्कोर पर असर |
| ऑटो-डेबिट लिंक्ड | पेमेंट बाउंस | लेट फीस, खराब रिकॉर्ड |
खाता बंद करना है तो जल्दबाजी न करें. सोच-समझकर ये कदम उठाएं:
1. स्टेटमेंट डाउनलोड करें
पिछले 2-3 साल के स्टेटमेंट निकाल लें. टैक्स, वीजा या भविष्य के किसी वित्तीय काम में काम आ सकते हैं.
2. सभी लिंक चेक करें
सुनिश्चित करें कि कोई EMI, SIP, सब्सिडी, या बीमा प्रीमियम उस खाते से लिंक न हो.
3. औपचारिक क्लोजर कराएं
सिर्फ पैसा निकालना काफी नहीं. बैंक जाकर क्लोजर फॉर्म भरें, लिखित कंफर्मेशन लें, डेबिट कार्ड नष्ट करें और चेकबुक सरेंडर करें.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 अनयूज्ड बैंक खाता क्या होता है?
A. वह खाता जिसमें लंबे समय से कोई लेनदेन नहीं हुआ हो.
Q2 इनएक्टिव और डोरमेंट अकाउंट में क्या फर्क है?
A. 12 महीने तक ट्रांजैक्शन न होने पर इनएक्टिव और 24 महीने बाद डोरमेंट माना जाता है.
Q3 क्या अनयूज्ड अकाउंट पर पेनल्टी लगती है?
A. अगर मिनिमम बैलेंस में कमी है तो बैंक मासिक पेनल्टी काट सकता है.
Q4 क्या अनयूज्ड अकाउंट से क्रेडिट स्कोर प्रभावित होता है?
A. सीधे नहीं, लेकिन ओवरड्राफ्ट या बकाया चार्ज होने पर असर पड़ सकता है.
Q5 क्या खाली पड़ा अकाउंट नेगेटिव बैलेंस में जा सकता है?
A. हां, पेनल्टी और चार्ज जुड़ते रहने पर बैलेंस माइनस में जा सकता है.