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हर किसी का सपना होता है कि उनके पास खुद का एक घर हो. लेकिन बहुत से लोगों को इस सपने को सच करने के लिए 20 या 25 साल का होम लोन लेना पड़ सकता है. शुरुआत में EMI संभालना आसान लगता है, लेकिन समय के साथ यह बोझ भारी महसूस होने लगता है. कई लोग सोचते हैं कि क्या वाकई इस लोन को तय समय से पहले खत्म किया जा सकता है? तो जवाब है हां...
होम लोन जितना लंबा चलता है, उतना ज्यादा ब्याज आप बैंक को चुकाते हैं. शुरुआती वर्षों में आपकी EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में चला जाता है और मूलधन बहुत धीरे घटता है. अगर आप शुरुआत में ही समझदारी से अतिरिक्त भुगतान करते हैं, तो लोन की कुल लागत लाखों रुपये कम हो सकती है. इसके अलावा, जब हर महीने EMI का दबाव कम होता है या खत्म हो जाता है, तो मानसिक शांति अपने आप मिलती है. इसके साथ ही परिवार के भविष्य की योजनाएं जैसे बच्चों की पढ़ाई, निवेश या रिटायरमेंट ज्यादा आसान हो जाती हैं.
अक्सर लोगों को बोनस, इन्क्रीमेंट या टैक्स रिफंड जैसी रकम मिलती है, जिसे वे खर्च कर देते हैं. अगर यही पैसा होम लोन में लगाया जाए, तो मूलधन तेजी से घटता है. बैंक इसे पार्ट-प्रीपेमेंट कहते हैं. इसका फायदा यह होता है कि लोन की अवधि अपने आप छोटी हो जाती है और ब्याज पर बड़ा असर पड़ता है.
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अगर आपकी सैलरी हर साल बढ़ रही है, तो EMI को भी थोड़ा बढ़ाना समझदारी है. मान लीजिए आप हर साल EMI में 5 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हैं, तो लोन कई साल पहले खत्म हो सकता है. यह तरीका उन लोगों के लिए बेहद कारगर है जिनकी आय धीरे-धीरे बढ़ती रहती है.
होम लोन जल्दी चुकाने का एक स्मार्ट तरीका SIP यानी सिस्टमैमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान भी हो सकता है. अगर आपका होम लोन कम ब्याज दर पर है और आप सीधे प्रीपेमेंट करने के बजाय वही रकम अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश करते हैं, तो लंबी अवधि में रिटर्न, लोन के ब्याज से ज्यादा हो सकता है. सही समय पर जब फंड में अच्छा कॉर्पस बन जाए, तो उस रकम से प्रीपेमेंट किया जा सकता है. इस तरीके से आप लोन भी जल्दी खत्म कर सकते हैं और निवेश से अतिरिक्त कमाई का फायदा भी उठा सकते हैं.
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जरूरी नहीं कि आप एक साथ बड़ी रकम जमा करें. साल में एक या दो बार छोटी रकम भी लोन में डालने से बड़ा फर्क पड़ता है. त्योहारों, साल के अंत या किसी अतिरिक्त बचत के समय किया गया छोटा प्रीपेमेंट भी लोन की अवधि को काफी कम कर सकता है.
अगर बाजार में ब्याज दरें कम हो रही हैं और किसी दूसरे बैंक या NBFC में सस्ता लोन मिल रहा है, तो होम लोन ट्रांसफर पर विचार किया जा सकता है. इससे EMI कम हो सकती है या लोन जल्दी खत्म करने का मौका मिल सकता है. हालांकि, ट्रांसफर से पहले सभी चार्ज और शर्तें समझना जरूरी है.
लोन जल्दी चुकाना अच्छा है, लेकिन अपनी सारी बचत इसमें झोंक देना सही नहीं. मेडिकल इमरजेंसी या किसी अनहोनी के लिए अलग फंड होना जरूरी है. साथ ही यह भी देखें कि आपके लोन पर कोई प्रीपेमेंट चार्ज तो नहीं है. निवेश और बीमा को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं, संतुलन बनाए रखना जरूरी है.
ज्यादातर मामलों में हां, क्योंकि इससे ब्याज में बड़ी बचत होती है. हालांकि, फैसला लेने से पहले अपनी ब्याज दर, निवेश विकल्प और इमरजेंसी फंड जरूर देखें.
दोनों ही असरदार हैं, अगर आपके पास एकमुश्त पैसा आता है तो पार्ट-प्रीपेमेंट सही है, और अगर आय धीरे-धीरे बढ़ रही है तो EMI बढ़ाना ज्यादा आसान तरीका होता है.
हां, सही फंड और लंबी अवधि के साथ SIP से अच्छा कॉर्पस बन सकता है, जिसे बाद में लोन के बड़े हिस्से को चुकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है.
अगर नई बैंक या NBFC कम ब्याज दर दे रही है और ट्रांसफर चार्ज ज्यादा नहीं है, तो यह EMI और लोन अवधि दोनों कम कर सकता है.
अपनी सारी बचत लोन में लगा देना क्योंकि इमरजेंसी फंड, बीमा और जरूरी निवेश को नजरअंदाज करना भविष्य में परेशानी खड़ी कर सकता है.