SBI का ग्राहकों को बड़ा तोहफा, सस्ता हुआ होम-ऑटो-पर्सनल लोन, कम होगी EMI

SBI ने अपने ग्राहकों के लिए कर्ज की दरें घटा दी हैं. बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) घटाने का ऐलान किया है.
SBI का ग्राहकों को बड़ा तोहफा, सस्ता हुआ होम-ऑटो-पर्सनल लोन, कम होगी EMI

एमसीएलआर घटने से सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होता है. (फोटो: PTI)

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) से होम, कार और ऑटो लोन लेना और सस्ता होगा. SBI ने अपने ग्राहकों के लिए कर्ज की दरें घटा दी हैं. बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) घटाने का ऐलान किया है. एमसीएलआर घटने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम EMI देनी पड़ती है.

1 महीने में दो बार सस्ता हुआ कर्ज
इससे पहले 10 अप्रैल को भी बैंक ने 0.10 फीसदी तक ब्याज दरें घटाई थीं. 1 महीने में यह दूसरी बार है जब SBI ने कर्ज की दरें सस्ती की हैं. पिछले 1 महीने में अब तक होम लोन पर दरें 15 बेसिस प्वाइंट कम हो चुकी हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बैठक में रेपो रेट 0.25 फीसदी घटाने का फैसला हुआ था. इसके बाद कईं सरकारी बैंक ब्याज दरें घटाने का ऐलान कर चुके हैं. RBI की अगली बैठक जून महीने में होगी.

इतनी सस्ती हुई होम, ऑटो, पर्सनल लोन EMI
SBI ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05 फीसदी की कटौती की है. एक साल के कर्ज पर एमसीएलआर 8.50 फीसदी से घटाकर 8.45 फीसदी पर आ गई हैं.

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1 मई से SBI बदल चुका है ये नियम
SBI 1 मई से लोन को लेकर बड़ा बदलाव कर चुका है. बैंक ने रेपो रेट को बैंक दरों से जोड़ दिया है. यह फैसला एक लाख रुपये से ज्यादा के लोन पर लागू है. नए नियम लागू होने के बाद एक लाख रुपए तक के डिपॉजिट पर 3.5 फीसदी इंटरेस्ट मिल रहा है. वहीं, 1 लाख रुपए से अधिक के डिपॉजिट पर यह इंटरेस्ट रेट 3.25 फीसदी है.

जून में और सस्ता होगा लोन लेना
आरबीआई मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में रेपो रेट में 0.25% की और कटौती करने पर विचार कर सकता है. कोटक इकोनॉमिक रिसर्च में यह उम्मीद जताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू विकास दर की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक आगे भी ब्याज दर घटाने का फैसला ले सकता है. अप्रैल महीने के पहले हफ्ते में हुई बैठक में भी 0.25% की कमी की गई थी. ज्यादातर एक्सपर्ट्स भी उम्मीद जता रहे हैं कि जून की पॉलिसी में ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है.

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