SBI ग्राहकों के लिए बड़ी खबर! लगातार 9वीं बार सस्ता हुआ लोन, FD पर कम हुआ ब्याज

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है. बैंक ने एक बार फिर लोन की दरों में कटौती की है. सभी अवधि के लिए बैंक ने MCLR में 5 बीपीएस प्वाइंट्स की कटौती की है.
SBI ग्राहकों के लिए बड़ी खबर! लगातार 9वीं बार सस्ता हुआ लोन, FD पर कम हुआ ब्याज

सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी होने के चलते SBI ने दरों में भी बदलाव किया है.

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है. बैंक ने एक बार फिर लोन की दरों में कटौती की है. सभी अवधि के लिए बैंक ने MCLR में 5 बीपीएस प्वाइंट्स की कटौती की है. एस साल के लिए MCLR अब 7.90% से घटकर 7.85% हो गया है. नई दरें 10 फरवरी 2020 से लागू होंगी. वित्त वर्ष 2019-20 में यह लगातार 9वीं बार बैंक ने MCLR की दरें घटाई हैं.

सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी होने के चलते SBI ने रिटेल टर्म डिपॉजिट्स और बल्क टर्म डिपॉजिट की दरों में भी बदलाव किया है. इसकी नई दरें भी 10 फरवरी 2020 से लागू होंगी. बैंक ने 1 साल से लेकर 10 साल में मैच्योर होने वाले रिटेल सेगमेंट के लिए FD की दरों में 0.10 फीसदी से 0.50 फीसदी तक की कटौती करने का ऐलान किया है. वहीं, लॉन्ग टर्म डिपॉजिट्स पर 0.25%-0.50% कटौती की है.

आरबीआई ने किया था एलान
गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था. रेपो रेट 5.15 फीसदी पर बरकरार है. लेकिन एसबीआई ने एमसीएलआर में कटौती की है. RBI ने लोन को बढ़ावा देने के लिए ऐलान किया. आरबीआई ने बैंकों को कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में कटौती करने की छूट दे दी है, जो जुलाई 2020 तक लागू रहेगी.

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डिपॉजिट पर मिलेगा कम ब्याज
फिक्स्ड डिपॉजिट (दो करोड़ रुपए से कम) पर भी एसबीआई ने 10 से 50 बेसिस प्वाइंट की कमी की है. एकमुश्त एफडी (बल्क टर्म डिपॉजिट यानी दो करोड़ रुपए से ज्यादा) पर मिलने वाले ब्याज में 25 से 50 बेसिस प्वाइंट की कमी की है.

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क्या होता है MCLR?
MCLR वह दर होती है, जिससे नीचे पर बैंक लोन नहीं दे सकता. इसके कम होने पर कम दर पर बैंक से लोन मिल सकता है. इससे होम लोन से लेकर ऑटो लोन तक सब सस्ते हो सकते हैं. नई दरों का फायदा नए ग्राहकों के साथ-साथ सिर्फ उन्हीं ग्राहकों को मिलेगा, जिन्होंने अप्रैल 2016 के बाद लोन लिया है. क्योंकि, उसके पहले लोन देने के लिए तय मिनिमम रेट बेस रेट कहलाती थी.

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