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आज के समय में हम में से कई लोगों के पास एक से ज़्यादा सेविंग्स अकाउंट होना बहुत आम बात है. खासकर वो लोग जो प्राइवेट जॉब करते हैं, उन्हें अक्सर जॉब बदलने के साथ ही नई कंपनी एक नए बैंक में अकाउंट ओपन करवा देती है. देखते ही देखते खातों की संख्या इतनी बढ़ जाती है कि उन सबको मेंटेन करना मुश्किल हो जाता है. हर अकाउंट को चालू रखने के लिए उसमें एक मिनिमम बैलेंस बनाए रखना और समय-समय पर ट्रांजैक्शन करते रहना जरूरी होता है. ये नियम अक्सर लोगों के लिए सिरदर्द बन जाते हैं.
जब अकाउंट ज़्यादा हो जाते हैं, तो सभी को मैनेज कर पाना आसान नहीं होता. ऐसे में, सबसे अच्छा विकल्प यही लगता है कि जो अकाउंट इस्तेमाल में नहीं हैं, उन्हें बंद करवा दिया जाए. लेकिन, सेविंग्स अकाउंट को बंद कराते समय कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है. अगर आप इन बातों को इग्नोर करते हैं, तो आपको बड़ा फाइनेंशियल लॉस झेलना पड़ सकता है. आइए, जानते हैं वो 4 जरूरी बातें जिन्हें सेविंग्स अकाउंट बंद करने से पहले कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए.
अपने सेविंग्स खाते को बंद करने से पहले, उसका पूरा स्टेटमेंट जरूर निकाल लें. ये आप बैंक ब्रांच से प्राप्त कर सकते हैं या ऑनलाइन नेट बैंकिंग के माध्यम से डाउनलोड कर सकते हैं. आप चाहें तो इसका प्रिंटआउट लेकर संभालकर रख दें या फिर डिजिटल कॉपी को अपने कंप्यूटर या क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित रख लें.
अगर आपके इस अकाउंट का इस्तेमाल कभी लोन की EMI चुकाने, क्रेडिट कार्ड बिल भरने या किसी अन्य जरूरी फाइनेंशियल काम में हुआ है, तो भविष्य में आपको इसके स्टेटमेंट की जरूरत पड़ सकती है. उदाहरण के लिए, टैक्स फाइलिंग करते समय, किसी लोन के आवेदन के लिए, या किसी वित्तीय विवाद की स्थिति में ये स्टेटमेंट बहुत काम आता है. बिना स्टेटमेंट के, आपको बाद में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. खासकर, अगर आपने कई साल पहले कोई ट्रांजैक्शन किया हो और अब आपको उसका प्रमाण चाहिए हो, तो ये स्टेटमेंट ही आपका सहारा बनेगा. इसे संभालकर रखना एक समझदारी भरा कदम है.
जिस अकाउंट को आप बंद कराने जा रहे हैं, एक बार अच्छी तरह से चेक कर लें कि वो आपके EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन), इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अकाउंट, या किसी अन्य सरकारी या गैर-सरकारी सर्विस से लिंक तो नहीं है. इसके अलावा, ये भी देखें कि कहीं कोई निवेश स्कीम (जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट), ऑटो-पेमेंट मैंडेट, या कोई बीमा पॉलिसी तो उसके साथ अटैच नहीं है.
अगर आपका अकाउंट EPFO से लिंक है और आप उसे बंद कर देते हैं, तो आपका PF का पैसा अटक सकता है या उसे प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है. इसी तरह, अगर कोई सरकारी सब्सिडी या इनकम टैक्स रिफंड आपके बंद हो रहे अकाउंट में आना है, तो वो पेमेंट लटक सकता है. अगर कोई फिक्स्ड डिपॉजिट या रिकरिंग डिपॉजिट इस अकाउंट से जुड़ा है और उसके मैच्योर होने पर पैसा उसी अकाउंट में आना है, तो अकाउंट बंद होने की वजह से आपको पेमेंट मिलने में देरी या दिक्कत हो सकती है.
अगर ऐसा कोई लिंक पाया जाता है, तो सबसे पहले संबंधित विभाग या कंपनी से संपर्क करके अपने नए/दूसरे अकाउंट नंबर को अपडेट करें. ये सुनिश्चित करें कि नया अकाउंट नंबर हर जगह सही तरीके से लिंक हो गया है और सभी अपडेट्स हो चुके हैं. इसके बाद ही अपने पुराने सेविंग्स अकाउंट को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करें. ये कदम आपको भविष्य में होने वाली कई संभावित परेशानियों से बचाएगा.
एक से ज़्यादा अकाउंट होने पर अक्सर ऐसा होता है कि हम उनमें से कुछ में मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं कर पाते हैं. मिनिमम बैलेंस न होने पर बैंक उस पर चार्ज लगाते हैं, जिससे अकाउंट बैलेंस निगेटिव में जा सकता है. ऐसे में, कई बार सर्विस चार्ज, ATM चार्ज, SMS अलर्ट फी या बैंक की ओर से लगने वाली कोई अन्य फी वगैरह भी पेंडिंग हो जाती है.
अगर आपके खाते में कोई बकाया चार्ज या नकारात्मक बैलेंस है, तो बैंक आपको खाता बंद करने की इजाजत नहीं देंगे. आपको पहले वो सभी चार्जेज चुकाने होंगे. अगर आप इन चार्जेज का भुगतान नहीं करते हैं और लंबे समय तक अकाउंट को ऐसे ही छोड़ देते हैं, तो ये बैंक के रिकॉर्ड में आपकी नकारात्मक फाइनेंशियल कंडीशन को दर्शा सकता है. ये आपके क्रेडिट स्कोर पर भी बुरा असर डाल सकता है. एक खराब क्रेडिट स्कोर भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड लेने में बाधा डाल सकता है.
खाता बंद कराने से पहले, अपने बैंक से संपर्क करें और पता करें कि क्या आपके अकाउंट पर कोई बकाया चार्जेज हैं. अगर हैं, तो सभी चार्जेज का भुगतान कर दें और सुनिश्चित करें कि आपका अकाउंट बैलेंस ज़ीरो या पॉजिटिव हो गया है. इसके बाद ही अकाउंट क्लोजर की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं. ये आपके क्रेडिट स्कोर को मेंटेन रखने में मदद करेगा और बैंक के साथ आपके संबंधों को भी अच्छा रखेगा.
आमतौर पर, सेविंग्स अकाउंट खुलवाने के 14 दिनों के भीतर और एक साल से पुराने खाते को बंद करवाने पर बैंक कोई चार्ज नहीं लेते हैं. ये बैंकों की अपनी पॉलिसी होती है, लेकिन ये एक सामान्य नियम है. हालांकि, 14 दिन से लेकर 1 साल की अवधि के दौरान अकाउंट बंद करवाने पर आपको 'क्लोजर चार्ज' देना पड़ सकता है. ये चार्ज अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग हो सकता है.
अकाउंट क्लोजर चार्ज के बारे में पहले से पता कर लें. आप अपने बैंक की वेबसाइट पर या कस्टमर केयर से संपर्क करके इस बारे में जानकारी ले सकते हैं. अगर आपका अकाउंट 14 दिन से 1 साल के बीच की अवधि का है और उस पर क्लोजर चार्ज लग रहा है, तो ये बेहतर होगा कि आप कुछ महीनों का इंतजार करें और एक साल पूरा होने के बाद ही अकाउंट को क्लोज कराएं. इससे आप इस अनावश्यक चार्ज से बच जाएंगे. ये एक छोटा सा फाइनेंशियल मैनेजमेंट है जो आपके पैसे बचाएगा.
जब आप ऊपर बताई गई सभी बातों का ध्यान रख चुके हों और सुनिश्चित कर लें कि आपका अकाउंट बंद करने के लिए तैयार है, तो ये है खाता बंद कराने का सामान्य तरीका:
बैंक ब्रांच जाएं: आपको उस बैंक की ब्रांच जाना होगा जहां आपका खाता है. ऑनलाइन सेविंग्स अकाउंट बंद करने की सुविधा आमतौर पर उपलब्ध नहीं होती है.
क्लोजर फॉर्म भरें: बैंक अधिकारी से 'अकाउंट क्लोजर फॉर्म' प्राप्त करें और उसे सावधानी से भरें. इसमें आपको अपनी अकाउंट डिटेल्स और अकाउंट बंद करने का कारण बताना होगा.
फंड ट्रांसफर: अगर आपके खाते में कुछ पैसे बचे हैं और आप उसे किसी दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करवाना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए एक और फॉर्म भरना होगा. आप चाहें तो बैंक से चेक या कैश के रूप में भी बचे हुए पैसे ले सकते हैं, बशर्ते राशि तय सीमा से कम हो.
चेकबुक और डेबिट कार्ड जमा करें: अकाउंट बंद करते समय आपसे इस्तेमाल न की गई चेकबुक और डेबिट कार्ड को जमा करने के लिए कहा जाएगा. ये चीजें अपने साथ ले जाना न भूलें, क्योंकि ये बैंक के रिकॉर्ड के लिए जरूरी हैं.
रसीद या प्रमाण पत्र लें: अकाउंट बंद होने के बाद, बैंक से एक 'क्लोजर स्टेटमेंट' या 'क्लोजर सर्टिफिकेट' लेना न भूलें. ये एक प्रमाण होगा कि आपका खाता सफलतापूर्वक बंद कर दिया गया है. इसे भी अपने रिकॉर्ड के लिए सुरक्षित रखें.