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भारतीय रिजर्व बैंक ने हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के नियमों में बदलाव कर दिया है. केंद्रीय बैंक ने डिपॉजिट लेने वाली हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFC) के नियम सख्त किए हैं. नए नियम 1 जनवरी 2025 से लागू होंगे. HFC के लिए भी अन्य NBFC के लिए ब्रांच और एजेंट नियुक्ति के नियम लागू होंगे.
नए नियम के मुताबिक पब्लिक डिपॉजिट के 15% हिस्से को लिक्विड एसेट में मेन्टेन करना होगा. अभी यह सीमा सिर्फ 13 फीसदी है. कम से कम हर साल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी से 'इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग' लेनी होगी.
IRDAI के तहत इमरजेंसी विदड्रॉअल पर डेपॉजिटर को 100% डिपॉजिट 3 महीने के अंदर देना होगा. वहीं समय से पहले विदड्रॉअल पर कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा.
भारत में अभी 97 हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां हैं, जबकि डिपॉजिट लेने वाली एनबीएफसी की संख्या एचएफसी समेत सिर्फ 26 है. रेगुलेटर की तरफ से करीब दो दशकों से किसी भी नए एनबीएफसी को पब्लिक डिपॉजिट स्वीकार करने की इजाजत नहीं दी गई है. LIC Housing Finance और PNB Housing Finance कुछ डिपॉजिट लेने वाली हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां हैं.