RBI MPC Policy: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का ऐलान, ब्याज दरों में नहीं हुआ बदलाव, 5.25% रेपो रेट

RBI MPC Announcement: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीतियों का ऐलान किया है. MPC ने न्यूट्रल रुख जारी रखते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है.
RBI MPC Policy: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का ऐलान, ब्याज दरों में नहीं हुआ बदलाव, 5.25% रेपो रेट

RBI MPC Meeting: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में साल 2026 की पहली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 4 फरवरी से शुरू हुई थी. तीन दिन तक चलने वाली मीटिंग के फैसलों की आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा घोषणा कर रहे हैं. आरबीआई ने पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया है. यानी रेपो रेट जस की तस बनी रहेगी. वर्तमान में रेपो रेट 5.25 फीसदी है. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच भारत का प्रदर्शन बेहतर रहा है. आरबीआई ने दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी. साल 2025 में कुल चार बार कटौती की थी.

RBI का न्यूट्रल रुख

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि एमपीसी का ब्याज दरों पर न्यूट्रल रुख है. भारत की आर्थिक ग्रोथ की रफ्तार बनी रहेगी. MPC के सभी सदस्य दरों में बदलाव के पक्ष में नहीं थे.

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घरेलू मांग से इकोनॉमी को मिलेगा सपोर्ट

  • संजय मल्होत्रा ने कहा कि आने वाले दिनों में महंगाई, ग्रोथ आउटलुक पॉजिटिव है.
  • मेटल्स में तेजी से महंगाई में बढ़ोतरी संभव.घरेलू मांग में बढ़त जारी रहने से इकोनॉमी को सपोर्ट मिलेगी.
  • शहरी मांग में रिकवरी से मजबूत मिलेगी. निजी खपत में बढ़ोतरी अगले साल भी बनी रहेगी.
  • यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के साथ ट्रेड डील एक्सपोर्ट को बढ़ावा देंगे.
  • रबी फसलों की बेहतर बुआई से एग्रीकल्चर सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर संभव है.

7.4% GDP ग्रोथ रेट का अनुमान

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी का अनुमान 7.3 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी कर दिया है. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि आने वाले दिनों में इकोनॉमी की स्थिरता बनी रहेगी.

FY27 GDP के अनुमानों को टाला

  • न्यू जीडीपी सीरीज के कारण FY27 GDP के अनुमान को फिलहाल टाल दिया गया है.
  • FY27 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 6.9 फीसदी किया गया है.
  • FY27 की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.8 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी किया है.
  • FY26 में चालू खाते का घाटा (CAD) के नियंत्रण में रहने की उम्मीद है. ट्रेड डील से एक्सपोर्ट और निवेश में तेजी आएगी.
  • भारत FDI के लिए पसंदीदा देश बना हुआ है. 30 जनवरी तक फॉरेक्स रिजर्व 72380 करोड़ डॉलर है.

दायरे में रहेगी कोर महंगाई दर

आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि कोर महंगाई दर दायरे में रहने की उम्मीद है. वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई दर का अनुमान 2 फीसदी से बढ़कर 2.1 फीसदी कर दिया है.

Q4FY26 में 3.2% महंगाई दर का अनुमान

  • वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में महंगाई दर अनुमान को 2.9 फीसदी से बढ़ाकर 3.2 फीसदी किया है.
  • वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महंगाई दर 3.9 फीसदी से बढ़कर 4 फीसदी का अनुमान है.
  • वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में महंगाई दर 4 फीसदी से बढ़ाकर 4.2 फीसदी हो गया है.
  • 2025 में ब्याज दरों में कटौती का ट्रांसमिशन फिलहाल 94 फीसदी है.
  • कमर्शियल बैंकों के लेंडिंग रेट में 1.05 फीसदी की कमी आई है.

महंगाई पर RBI के अनुमान

वित्त वर्षअभीपहले
FY262.1%2.0%
Q4FY263.2%2.9%
Q1FY274%3.9%
Q2FY274.2%4.0%

लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर RBI एक्टिव

RBI गवर्नर ने कहा कि लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर रिजर्व बैंक एक्टिव है. सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित करने का प्रयास है. NBFCs की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बेहतर बनी हुई है.

जारी की जाएगी 3 ड्राफ्ट गाइडलाइन

  • आरबीआई गवर्नर ने कहा हाल के महीनों में बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ में बढ़ोतरी हुई है.
  • ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए 3 ड्राफ्ट गाइडलाइन जारी की जाएगी.
  • मिसलीडिंग, लोन रिकवरी के लिए भी गाइडलाइन जारी होगी. गाइडलाइन का मकसद ग्राहकों को नुकसान से बचाना है.
  • MSME के लिए कोलैटरल फ्री लोन सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख की गई है.
  • बैंक्स भी REITs के लिए लोन दे सकेंगे, डिजिटल पेमेंट सेफ्टी से जुड़े उठाए गए कदमों पर पेपर पब्लिश करेंगे. डेरिवेटिव्स के लिए रेगुलेटरी नियम जारी होंगे.

2025 से अब तक 125bps की कटौती

साल 2025 में RBI ने अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए मौद्रिक नीति में नरम रुख अपनाया था. फरवरी 2025 से अभी तक रेपो रेट में कुल 1.25 फीसदी यानी 125bps की कटौती की जा चुकी है. आपको बता दें कि रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों को कर्ज देते हैं. जब आरबीआई रेपो रेट में कैंची चलाता है तो बैंकों को आरबीआई से पैसा लेना सस्ता पड़ता है. बैंक को जब सस्ता पैसा मिलता है तो वह इसका फायदा ग्राहक को ट्रांसफर करता है और होम लोन, पर्सनल लोन जैसे कर्ज सस्ता हो जाते हैं. रेपो रेट पर फैसला महंगाई दर को ध्यान में रखर लिया जाता है.

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