फर्जी लोन ऐप्स पर चलेगा RBI का डंडा, 13 मई से वेबसाइट पर मिलेगी रजिस्टर्ड डिजिटल लोन ऐप की पूरी जानकारी

RBI ने Digital Lending Directions, 2025 के तहत डिजिटल लोन सिस्टम को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम जारी किए हैं, जिसके मुताबिक, RBI एक लिस्ट तैयार करेगा, जिसमें बताया जाएगा कि कौन-कौन से डिजिटल लोन ऐप RBI से रजिस्टर्ड बैंकों या NBFCs से जुड़े हैं.
फर्जी लोन ऐप्स पर चलेगा RBI का डंडा, 13 मई से वेबसाइट पर मिलेगी रजिस्टर्ड डिजिटल लोन ऐप की पूरी जानकारी

Fake Digital Lending Apps: आज के समय में बैंक के कस्टमर्स के लिए सुविधाएं काफी ज्यादा आसान हो गई है. बैंक के अलावा आज के समय में कई सारे NBFC और प्राइवेट प्लेयर्स भी मार्केट में आ गए हैं, जो जरुरत पड़ने पर बिना किसी कागजी कार्रवाई के बस कुछ ही मिनटों में आपको कर्ज दे देते हैं. हालांकि, मार्केट में कई सारे ऐसे फर्जी लोन ऐप भी हैं, जो भोले-भाले लोगों को कर्ज के जाल में फंसाकर बर्बाद कर देते हैं. ऐसे ही फर्जी डिजिटल लोन बांटने वालों पर लगाम लगाने के लिए RBI ने नई गाइडलाइंस जारी किया है.

असली और नकली लोन ऐप पहचाना होगा आसान

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Digital Lending Directions, 2025 के तहत डिजिटल लोन सिस्टम को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम जारी किए हैं, जिसके मुताबिक, RBI एक लिस्ट तैयार करेगा, जिसमें बताया जाएगा कि कौन-कौन से डिजिटल लोन ऐप RBI से रजिस्टर्ड बैंकों या NBFCs से जुड़े हैं. इससे ग्राहक पता कर सकेंगे कि कोई ऐप असली है या फर्जी. बैंक और NBFCs को यह जानकारी 13 मई से RBI के CIMS पोर्टल पर अपलोड करनी होगी.

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RBI के नए नियमों के मुताबिक, लोन ऐप्स के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना होगा. 13 मई से सभी RBI द्वारा रेगुलेटेड बैंक और एनबीएफसी को अपने सभी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स को एक नई सरकारी पोर्टल – Centralised Information Management System (CIMS) पर रजिस्टर करना अनिवार्य होगा.

ये पोर्टल उन ऐप्स का ऑफिशियल रिकॉर्ड होगा, जो वैध बैंक या फाइनेंशियल कंपनी से जुड़े हैं. सभी संस्थानों को 15 जून तक अपनी जानकारी इस पोर्टल पर अपलोड करनी होगी. इससे फर्जी और अनरजिस्टर्ड लोन ऐप्स पर लगाम लगेगी.

फर्जी ऐप की होगी पहचान

RBI 1 जुलाई से अपनी वेबसाइट पर सभी रजिस्टर्ड डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की एक सार्वजनिक लिस्ट जारी करेगा. इस लिस्ट से कोई भी यूजर आसानी से चेक कर पाएगा कि जिस ऐप से वह लोन ले रहा है, वह किसी लाइसेंस प्राप्त बैंक या एनबीएफसी से जुड़ा है या नहीं. हालांकि, RBI ने साफ किया है कि वह इस डेटा की सत्यता की जिम्मेदारी नहीं लेगा – जो जानकारी बैंक और एनबीएफसी देंगे, वही लिस्ट में होगी. जैसे-जैसे नए ऐप्स जुड़ेंगे या पुराने हटेंगे, लिस्ट अपने आप अपडेट होती रहेगी.

थर्ड पार्टी लोन पार्टनर पर कड़ी निगरानी

अब अगर कोई बैंक या NBFC किसी थर्ड पार्टी लेंडिंग ऐप से हाथ मिलाता है, तो उसे पहले कड़ी जांच करनी होगी. उन्हें देखना होगा कि उस ऐप की तकनीकी मजबूती, डेटा प्रोटेक्शन पॉलिसी, और यूजर डाटा को कैसे हैंडल किया जा रहा है. इसका मकसद है यूजर्स की जानकारी का गलत इस्तेमाल न हो और डिजिटल लोन सिस्टम पर भरोसा बना रहे.

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