RBI का बड़ा तोहफा! बैंक कर्मचारियों और रिकवरी एजेंट्स के लिए बन रहे सख्त नियम, अब बदतमीजी पड़ेगी बहुत भारी

आरबीआई (RBI) ने लोन रिकवरी और एजेंटों के व्यवहार को सुधारने के लिए कड़े नियमों का ड्राफ्ट पेश किया है. नए नियमों के अनुसार, रिकवरी एजेंट सुबह 8 से शाम 7 बजे के बीच ही कॉल या विजिट कर सकेंगे. बदतमीजी, गाली-गलौज, रिश्तेदारों को परेशान करने या सोशल मीडिया पर बदनाम करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.
RBI का बड़ा तोहफा! बैंक कर्मचारियों और रिकवरी एजेंट्स के लिए बन रहे सख्त नियम, अब बदतमीजी पड़ेगी बहुत भारी

अब रिकवरी एजेंट्स की मनमानी और बदतमीजी नहीं चलेगी. रिजर्व बैंक ने सख्त नियमों का नया ड्राफ्ट जारी कर दिया है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर लेकर आया है. लोन रिकवरी (Loan Recovery) के नाम पर ग्राहकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, गाली-गलौज करने और सोशल मीडिया पर बदनाम करने वाले रिकवरी एजेंटों और बैंक कर्मचारियों पर नकेल कसने के लिए आरबीआई ने सख्त नियमों का नया ड्राफ्ट (प्रस्ताव) जारी किया है.

1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले इन नए नियमों के तहत यदि किसी रिकवरी एजेंट ने ग्राहक से बदतमीजी की या नियमों का उल्लंघन किया, तो इसकी भारी पेनाल्टी सीधे बैंक को भुगतनी होगी. आइए आरबीआई के इस नए मास्टर प्लान को आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं.

जानिए आरबीआई के नए नियम

भारतीय रिजर्व बैंक ने पाया कि बाजार में लोन बांटने के बाद कई बैंकों और एनबीएफसी (NBFCs) के रिकवरी एजेंट बेहद क्रूर और अवैध तरीके अपना रहे थे. इसी को रोकने के लिए आरबीआई के गवर्नर ने नए कंडक्ट नियमों का ड्राफ्ट पेश किया है. इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-

'क्रूर तरीकों' को किया गया परिभाषित

आरबीआई ने साफ शब्दों में बताया है कि ग्राहक, उसके गारंटर, रिश्तेदारों या दोस्तों को शारीरिक या मानसिक रूप से डराना, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, सोशल मीडिया पर उनकी रिकॉर्डिंग या ब्योरा डालना और बार-बार गुमनाम नंबरों से धमकी भरे फोन करना 'हार्ष मेथड्स' (Coercive/Harsh Practices) माना जाएगा, जो पूरी तरह गैरकानूनी है.

सुख-दुख के समय परेशान करने पर रोक

नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी ग्राहक के घर में कोई दुखद घटना (शोक/मृत्यु) हुई हो या कोई शादी-ब्याह का मांगलिक अवसर हो, तो उस दौरान बैंक कर्मचारी या रिकवरी एजेंट ग्राहक को बिल्कुल भी परेशान या संपर्क नहीं कर सकते.

मोबाइल फोन लॉक करने का क्या है नियम?

आजकल लोग मोबाइल खरीदने के लिए छोटा लोन (Device Financing) लेते हैं. इसके लिए आरबीआई ने विशेष सुरक्षा चक्र बनाया है:

90 दिनों की मोहलत: अगर आपकी ईएमआई बाउंस होती है, तो बैंक तुरंत फोन लॉक नहीं कर सकता. लोन अकाउंट 90 दिन तक ओवरड्यू (Past Due) होने पर ही यह कार्रवाई हो सकती है.

दो चरणों का नोटिस: लोन ओवरड्यू होने के 60वें दिन बैंक को पहला नोटिस देना होगा, जिसमें ग्राहक को 21 दिन का समय मिलेगा. इसके बाद 7 दिन का एक और अतिरिक्त नोटिस देना अनिवार्य होगा.

जरूरी सेवाएं बंद नहीं होंगी: फोन लॉक होने की स्थिति में भी बैंक इंटरनेट एक्सेस, इनकमिंग कॉल्स (आने वाले फोन), इमरजेंसी एसओएस (SOS) और सरकारी सुरक्षा अलर्ट को कभी भी बंद नहीं कर सकते.

डेटा चोरी पर रोक: बैंक या एजेंट किसी भी हाल में ग्राहक के फोन का पर्सनल डेटा (फोटो, कॉन्टैक्ट्स) न तो देख सकते हैं और न ही स्टोर कर सकते हैं.

₹250 का जुर्माना: जैसे ही ग्राहक अपना बकाया पैसा चुकाएगा, बैंक को 1 घंटे के भीतर फोन को अनब्लॉक करना होगा. अगर बैंक देरी करता है या गलत तरीके से फोन लॉक करता है, तो उसे ग्राहक को ₹250 प्रति घंटे के हिसाब से हर्जाना चुकाना होगा.

एजेंटों के लिए आईडी (ID) और ट्रेनिंग अनिवार्य

अब कोई भी ऐरा-गैरा इंसान रिकवरी एजेंट बनकर आपके घर नहीं आ सकता. सभी एजेंटों के पास IIBF (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस) का मान्य सर्टिफिकेट होना अनिवार्य होगा. साथ ही, जब भी कोई एजेंट किसी ग्राहक के घर जाएगा, उसे अपने साथ एजेंसी का आईडी कार्ड, बैंक का आधिकारिक ऑथराइजेशन (अनुमति) लेटर और नोटिस की कॉपी रखनी होगी. ग्राहकों के घर जाने से कम से कम 1 दिन पहले बैंक को इसकी सूचना ग्राहक को देनी होगी.

बैंक नहीं बच सकते अपनी जिम्मेदारी से

आरबीआई ने साफ किया है कि बैंक यह कहकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते कि "गलती हमारी नहीं, बल्कि थर्ड-पार्टी रिकवरी एजेंसी की है". एजेंट की हर हरकत के लिए बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार (Vicarious Liability) होंगे. बैंकों को अपनी वेबसाइट और ऐप पर अपनी सभी रजिस्टर्ड रिकवरी एजेंसियों के नाम सार्वजनिक करने होंगे.

अगर ग्राहक की कोई शिकायत (Grievance) बैंक के पास पेंडिंग (लंबित) है, तो जब तक उसका निपटारा नहीं हो जाता, बैंक उस केस को रिकवरी एजेंट को ट्रांसफर नहीं कर सकते. साथ ही, एजेंट की सभी कॉल्स को रिकॉर्ड किया जाएगा और उस डेटा को 6 महीने तक सुरक्षित रखा जाएगा.

Conclusion

कर्ज चुकाना एक कानूनी कॉन्ट्रैक्ट (समझौता) है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कोई आपकी गरिमा और मानवाधिकारों का हनन करे. आरबीआई का यह नया ड्राफ्ट डिजिटल और पारंपरिक बैंकिंग के दौर में ग्राहकों के लिए एक मजबूत कवच साबित होगा. इससे न केवल रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी पर पूरी तरह रोक लगेगी, बल्कि बैंकों को भी अधिक जिम्मेदार और पारदर्शी तरीके से काम करने पर मजबूर होना पड़ेगा.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) क्या है और यह क्या काम करता है?

आरबीआई हमारे देश का केंद्रीय बैंक है, जिसे 'बैंकों का बैंक' भी कहा जाता है. इसका मुख्य काम देश की करेंसी (रुपया) को कंट्रोल करना, महंगाई पर काबू रखना और सभी सरकारी व प्राइवेट बैंकों के लिए नियम बनाना है.

Q2 आरबीआई की 'मौद्रिक नीति' (Monetary Policy) क्या होती है?

यह बाजार में पैसों के बहाव और महंगाई को काबू में रखने के लिए आरबीआई द्वारा बनाई गई एक नीति है. इसके तहत आरबीआई हर दो महीने में रेपो रेट जैसी मुख्य ब्याज दरों को घटाने या बढ़ाने का फैसला करता है.

Q3 'रेपो रेट' (Repo Rate) क्या होता है और इसका आम जनता पर क्या असर पड़ता है?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर देश के कमर्शियल बैंक अपनी जरूरतों के लिए आरबीआई से कर्ज (लोन) लेते हैं. जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है, जिससे वे आम जनता के लिए भी होम लोन और कार लोन महंगा कर देते हैं.

Q4 क्या आरबीआई आम जनता को सीधे लोन देता है या उनका खाता खोलता है?

बिल्कुल नहीं. आरबीआई आम जनता के साथ सीधे कोई लेनदेन नहीं करता है. कोई भी आम नागरिक आरबीआई में अपना सेविंग्स अकाउंट नहीं खुलवा सकता और न ही वहां से सीधे लोन ले सकता है. इसके लिए आपको कमर्शियल या सरकारी बैंकों के पास ही जाना होता है.

Q5 अगर कोई बैंक दिवालिया या डिफॉल्टर हो जाए, तो ग्राहकों के पैसों का क्या होता है?

आरबीआई के नियम (DICGC) के अनुसार, यदि कोई बैंक पूरी तरह डूब जाता है, तो उस बैंक में जमा प्रत्येक ग्राहक की ₹5 लाख तक की रकम (मूलधन और ब्याज मिलाकर) पूरी तरह सुरक्षित होती है और सरकार उसे वापस दिलाती है.

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