&format=webp&quality=medium)
आज के समय में लोन लेना आम बात हो गई है. कोई घर खरीद रहा है, कोई कार, तो कोई पर्सनल जरूरत के लिए लोन लेता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही लोन पर किसी को कम ब्याज और किसी को ज्यादा ब्याज क्यों देना पड़ता है? इसका सबसे बड़ा कारण है आपका CIBIL स्कोर.
अगर आपका सिबिल स्कोर अच्छा है, खासकर 750 या उससे ऊपर, तो यह आपके लिए किसी ताकत से कम नहीं है. बहुत कम लोग जानते हैं कि RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) ने बैंकों और NBFCs को यह आजादी दी है कि वे ग्राहक के रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से ब्याज दर तय कर सकते हैं. यानी अगर आप भरोसेमंद ग्राहक हैं, तो बैंक आपसे ज्यादा ब्याज नहीं लेगा.
RBI के नियमों के मुताबिक, बैंक Risk Based Pricing Model अपनाते हैं. इसका सीधा मतलब है जिस ग्राहक के डिफॉल्ट करने की संभावना कम है, उसे सस्ता लोन मिलेगा और यह संभावना तय होती है आपके सिबिल स्कोर से. यही वजह है कि अच्छा सिबिल स्कोर होने पर आप बैंक से साफ कह सकते हैं कि 'मेरा स्कोर अच्छा है, ब्याज कम कीजिए'.

आज ज्यादातर बैंक और NBFCs 750+ सिबिल स्कोर को आइडियल मानते हैं. ऐसे ग्राहकों को न सिर्फ लोन आसानी से मिल जाता है, बल्कि कई बार प्रोसेसिंग फीस कम होती है, जल्दी अप्रूवल मिलता है और ब्याज दर भी दूसरों के मुकाबले कम रहती है. कई मामलों में तो हाई क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को Preferential Interest Rate दी जाती है, जो आम ग्राहकों को नहीं मिलती.
ये भी पढ़ें: RBI के 2026 में 5 नए नियम- जो आपकी 'क्रेडिट हेल्थ' को बना देंगे आसान- झट से होंगे सारे काम, पढ़े क्या?
अब सवाल उठता है कि आखिर बैंक ब्याज कैसे तय करते हैं. होम लोन हो या कार लोन, हर बैंक की बेस रेट अलग होती है, लेकिन उस पर जो मार्जिन जुड़ता है, वही आपके सिबिल स्कोर पर निर्भर करता है. कम स्कोर का मतलब ज्यादा रिस्क और इसका नतीजा निकलता है ज्यादा ब्याज. वहीं अच्छा स्कोर होने पर बैंक खुद आपको बेहतर ऑफर देने को तैयार हो जाते हैं.
Zee Business Hindi Live TV यहां देखें
अगर आपका सिबिल स्कोर अच्छा नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. इसे सुधारा जा सकता है, बस थोड़ी समझदारी और धैर्य चाहिए. सबसे जरूरी बात है समय पर पेमेंट क्योंकि एक भी लेट EMI या क्रेडिट कार्ड बिल आपके सिबिल को नुकसान पहुंचा सकता है. RBI के रिकॉर्ड के मुताबिक, लेट पेमेंट की जानकारी कई सालों तक क्रेडिट रिपोर्ट में रहती है.
इसके अलावा, जरूरत से ज्यादा क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना भी नुकसानदायक होता है. अगर आपकी लिमिट 1 लाख है और आप हर महीने 90 हजार खर्च कर रहे हैं, तो बैंक को लगेगा कि आप फाइनेंशियल दबाव में हैं. समझदारी इसी में है कि लिमिट का कम हिस्सा इस्तेमाल किया जाए.
कई बार सिबिल रिपोर्ट में गलत एंट्री भी होती है, जैसे कोई लोन जो आपने लिया ही नहीं या कोई पेमेंट जो समय पर किया गया हो लेकिन लेट दिख रहा हो. ऐसी स्थिति में रिपोर्ट चेक करना और गलती सुधारना बहुत जरूरी है. एक छोटी सी गलती भी ब्याज दर महंगी कर सकती है.
एक और अहम बात यह है कि पुराने क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट बिना वजह बंद न करें. लंबी और साफ क्रेडिट हिस्ट्री बैंक के लिए एक पॉजिटिव संकेत होती है. इससे आपका सिबिल स्कोर मजबूत बनता है और यही स्कोर आपको सस्ता लोन दिलाने में मदद करता है.
अंत में यही कहा जा सकता है कि अच्छा सिबिल स्कोर आपकी फाइनेंशियल हेल्थ को ताकत देता है. RBI के बनाए नियम आपके पक्ष में हैं, बस आपको अपने स्कोर की वैल्यू समझनी होगी, इसलिए अगली बार जब आपको लोन लेना हो और आपका सिबिल स्कोर अच्छा है, तो बैंक से ब्याज घटाने की बात जरूर करें.
ऐसा हो सकता है लेकिन यह बैंक की पॉलिसी और Risk Based Pricing पर भी निर्भर करता है.
आमतौर पर सुविधा मिलती है लेकिन स्कोर अच्छा होना आपको मोलभाव करने की ताकत जरूर देता है.
बिल्कुल, गलत एंट्री आपकी क्रेडिट वैल्यू कम कर सकती है, इसलिए रिपोर्ट समय-समय पर चेक करें.
समय पर पेमेंट, क्रेडिट लिमिट कम इस्तेमाल करना और फाइनेंस से जुड़ी गलतियों को सुधारने से सिबिल स्कोर भी सुधर सकता है.
हां, इससे हार्ड इनक्वायरी होती है और स्कोर थोड़े समय के लिए गिर सकता है.