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RBI की रिपोर्ट की माने तो देश में क्रेडिट कार्ड का चलन कितनी तेजी से बढ़ा है (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
क्या आप जानते हैं कि भारतीय अब जेब में रखे कैश से ज्यादा बैंक के उधार यानी क्रेडिट कार्ड पर भरोसा कर रहे हैं? आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 4 सालों में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल 2.6 गुना बढ़ गया है. जहां लोग शॉपिंग के लिए जमकर कर्ज ले रहे हैं, वहीं डेबिट कार्ड का चलन तेजी से गिरा है. पूरी खबर और आंकड़े यहाँ देखें.
हमेशा ये कहा जाता है कि जब कमाई घटे तो आदमी को अपने खर्चे भी कम कर लेने चाहिए. लेकिन अब आज के टाइम में भारतीयों की बदलती आदतों ने इस पुराने गणित को एकदम उल्टा कर दिया है.असल में हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रिपोर्ट पेश की है कि कोविड के बाद जब लोगों की कमाई पर असर पड़ा, तो उन्होंने अपनी जरूरतें और शौक कम करने के बजाय कर्ज लेकर उन्हें पूरा करना शुरू कर दिया. असल में आज के दौर में क्रेडिट कार्ड मिडिल क्लास की जेब का सबसे बड़ा हथियार बन गया है.
RBI की रिपोर्ट की माने तो देश में क्रेडिट कार्ड का चलन कितनी तेजी से बढ़ा है. जी हां साल 2021 से लेकर 2025 के बीच क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेनदेन में 2.6 गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. मतलब ये है कि लोग अब अपनी जेब में रखे कैश या बैंक बैलेंस (डेबिट कार्ड) से ज्यादा भरोसा बैंक से मिलने वाले उधार (क्रेडिट कार्ड) पर कर रहे हैं.
अगर हम लेनदेन की संख्या यानी ट्रांजेक्शन वॉल्यूम को देखें, तो साल 2021 में क्रेडिट कार्ड के जरिए करीब 216 करोड़ बार लेनदेन किया गया था. साल 2025 तक आते-आते यह आंकड़ा बढ़कर 570 करोड़ हो गया है. सिर्फ ट्रांजेक्शन की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि खर्च होने वाला पैसा भी रिकॉर्ड तोड़ स्तर पर पहुंच गया है.
जबकि साल 2021 में क्रेडिट कार्ड के जरिए 8.9 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जो साल 2025 में बढ़कर 23.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गए हैं. इसका मतलब साफ है कि हर साल क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में करीब 27 फीसदी की सालाना ग्रोथ देखी जा रही है.
जी हां एक तरफ जहां क्रेडिट कार्ड का जलवा बढ़ता ही जा रहा है, वहीं दूसरी ओर डेबिट कार्ड के इस्तेमाल में भारी गिरावट आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, डेबिट कार्ड से होने वाला लेनदेन जो साल 2021 में 408.7 करोड़ था, वह 2025 में सिमटकर महज 133.6 करोड़ रह गया है.
वैसे इतना ही नहीं, डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजैक्शन की वैल्यू भी 7.4 लाख करोड़ रुपये से घटकर 4.5 लाख करोड़ रुपये पर आ गई है. इस पूरे खेल में प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने बाजी मार ली है और मार्केट में अपनी धाक और ज्यादा मजबूत कर ली है.
आपको बता दें कि अक्सर ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर मिलने वाले लुभावने ऑफर्स, नो-कॉस्ट EMI की सुविधा और 'बाय नाउ पे लेटर' वाली सोच ने लोगों को क्रेडिट कार्ड की ओर लोगों को तेजी से धकेल रहा है. इसके साथ ही, बैंकों ने भी धड़ाधड़ कार्ड बांटे हैं. लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू ये भी है कि लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी अब बैंक के कर्ज पर निर्भर हो रहे हैं.
भले ही क्रेडिट कार्ड आज की जरूरत बन गया हो, लेकिन ये एक तरह से 2.6 गुना का यह उछाल एक चेतावनी भी है. 23.2 लाख करोड़ रुपये का खर्च यह बताता है कि हम फ्यूचर की कमाई को आज ही खर्च कर रहे हैं. अगर समय पर पैसा वापस नहीं किया गया, तो यह बढ़ता आंकड़ा लोगों को भारी कर्ज के बोझ तले दबा सकता है. इसलिए अगली बार कार्ड स्वाइप करने से पहले अपनी जेब का हाल जरूर देख लें.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल इतना क्यों बढ़ गया है?
ऑनलाइन शॉपिंग पर मिलने वाले भारी डिस्काउंट, कैशबैक और आसान EMI की वजह से लोग अब कैश के बजाय कार्ड से पेमेंट करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
Q2 क्या ज्यादा क्रेडिट कार्ड यूज करने से कोई नुकसान भी है?
अगर आप समय पर बिल नहीं भरते तो 40% तक भारी ब्याज देना पड़ सकता है. साथ ही, फिजूलखर्ची बढ़ने से आप कर्ज के जाल में फंस सकते हैं.
Q3 डेबिट और क्रेडिट कार्ड में से कौन सा बेहतर है?
अगर आपको ऑफर्स और रिवॉर्ड पॉइंट्स चाहिए तो क्रेडिट कार्ड अच्छा है. लेकिन अगर आप सिर्फ उतना ही खर्च करना चाहते हैं जितना आपके बैंक में है, तो डेबिट कार्ड बेस्ट है.
Q4 क्रेडिट कार्ड बिल में 'मिनिमम ड्यू' भरने से क्या होता है?
मिनिमम ड्यू भरने से आप सिर्फ लेट फीस से बचते हैं, लेकिन बैंक बाकी बचे पैसों पर मोटा ब्याज वसूलता है. इसलिए हमेशा 'टोटल ड्यू' यानी पूरा बिल ही भरें.