&format=webp&quality=medium)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 29 सितंबर से मुंबई में शुरू हो चुकी है और इसके नतीजे 1 अक्टूबर को सामने आएंगे. त्योहारी सीजन से पहले इस मीटिंग से लोगों को बड़ी राहत की उम्मीद है.तो अगर आरबीआई ब्याज दर घटाने का फैसला करता है तो होम लोन और कार लोन पर EMI सस्ती हो जाएगी. इससे न केवल पुराने ग्राहकों को फायदा मिलेगा बल्कि नए ग्राहकों को भी कम ब्याज पर लोन लेने का सुनहरा मौका मिल सकता है.
असल मेंमहंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक विकास की चुनौतियों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी आने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है. असल में सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान पेश किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई ने जून में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी. हालांकि, अगस्त में हुई समीक्षा बैठक में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को यथावत रखा. जानकारों का कहना है कि इस बार भी मौजूदा हालात को देखते हुए रेपो रेट में बदलाव की संभावना बेहद कम है.
भारत में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (CPI) अगस्त महीने में 2.07 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि जुलाई में यह 1.61 प्रतिशत थी. यानी लगातार 10 महीनों से घटती महंगाई की प्रवृत्ति अगस्त में टूट गई. हालांकि, यह अब भी आरबीआई के 4 प्रतिशत के टारगेट और अनुमत सीमा से नीचे बनी हुई है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह खाद्य कीमतों में उछाल रही, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि GST सुधारों और मौसमी सुधार से आने वाले महीनों में खुदरा कीमतों में गिरावट आ सकती है.
जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और 7.8 प्रतिशत की मजबूत सालाना ग्रोथ दर्ज की.यह वृद्धि मुख्य रूप से सरकारी खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से प्रेरित रही.हालांकि, निजी निवेश और खपत अब भी अपेक्षाओं से कमजोर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर निजी क्षेत्र की भागीदारी नहीं बढ़ती, तो आने वाले महीनों में विकास दर पर असर पड़ सकता है.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत की अर्थव्यवस्था को अमेरिकी व्यापार टैरिफ, चीन और अमेरिका के बीच तनाव, और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर झेलना पड़ सकता है। ऐसे हालात में विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है और निर्यात को चुनौती मिल सकती है.साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर की मजबूती भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई ने सितंबर में क्रेडिट फ्लो बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने के लिए सीआरआर (कैश रिजर्व रेशियो) में कटौती जैसे लिक्विडिटी उपाय अपनाए। इससे बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति बेहतर हुई है.इसके बावजूद उधारी की लागत अधिक बनी हुई है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) तथा आम उपभोक्ताओं पर दबाव बना हुआ है.
जानकारों का मानना है कि आरबीआई इस बार अपनी मौद्रिक नीति का रुख तटस्थ (Neutral) रख सकता है. यानी केंद्रीय बैंक न तो आक्रामक कटौती करेगा और न ही दरें बढ़ाएगा. आरबीआई का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास को समर्थन देने के साथ-साथ कीमतों को स्थिर रखना होगा। इसलिए फिलहाल रेपो रेट को 5.50 प्रतिशत पर बनाए रखना ही सबसे उचित कदम माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई अगले कुछ महीनों में लक्ष्य से ऊपर नहीं जाती और वैश्विक परिदृश्य स्थिर रहता है, तो आरबीआई आने वाले समय में छोटे-छोटे कदमों से दरों में बदलाव कर सकता है. लेकिन मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए उम्मीद यही है कि इस बार की बैठक में रेपो रेट स्थिर रहेगा और केंद्रीय बैंक सावधानीपूर्ण लेकिन संतुलित नीति पर आगे बढ़ेगा.
5 FAQs
Q1. रेपो रेट क्या है?
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है.
Q2. आरबीआई रेपो रेट क्यों स्थिर रख सकता है?
महंगाई नियंत्रण में है और विकास दर सकारात्मक संकेत दे रही है, इसलिए बदलाव की संभावना कम है.
Q3. रेपो रेट स्थिर रहने से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
होम लोन और कार लोन की ईएमआई स्थिर रहेगी और त्योहारी सीजन में ग्राहकों को राहत मिलेगी.
Q4. पिछली बार आरबीआई ने कब रेपो रेट घटाया था?
जून 2024 में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई थी.
Q5. भविष्य में रेपो रेट कब घट सकता है?
अगर महंगाई 4% लक्ष्य से नीचे रहे और वैश्विक कारक स्थिर हों, तो आरबीआई छोटे-छोटे कदमों से दरों में कटौती कर सकता है.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)