RBI का बड़ा कदम: NBFC-UL के लिए बदलेगा पहचान का फॉर्मूला, सरकारी और प्राइवेट कंपनियों के लिए होंगे एक समान नियम!

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. नए ड्राफ्ट के अनुसार, 'अपर लेयर' (NBFC-UL) की पहचान अब जटिल स्कोरिंग सिस्टम के बजाय सीधे एसेट साइज (संपत्ति के आकार) के आधार पर की जाएगी. इसमें सरकारी NBFC को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है, जो अब तक इससे बाहर थे. इन बदलावों का उद्देश्य नियमों में एकरूपता और पारदर्शिता लाना है.
RBI का बड़ा कदम: NBFC-UL के लिए बदलेगा पहचान का फॉर्मूला, सरकारी और प्राइवेट कंपनियों के लिए होंगे एक समान नियम!

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश के वित्तीय ढांचे को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रहा है. इसी कड़ी में, RBI ने 'अपर लेयर' NBFC (NBFC-UL) की पहचान करने वाले नियमों में संशोधन के लिए एक नया ड्राफ्ट जारी किया है. इस नए प्रस्ताव का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि अब कंपनियों को उनके एसेट साइज के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा, जिससे जटिलता कम होगी.

मौजूदा वक्त में, NBFC-UL की पहचान के लिए एक 'पैरामीट्रिक स्कोरिंग सिस्टम' का उपयोग किया जाता है, जिसे हटाकर अब अधिक सरल और पारदर्शी 'एसेट साइज आधारित पहचान' का प्रस्ताव दिया गया है.

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एसेट साइज और सरकारी NBFC पर फोकस

RBI के इस नए ड्राफ्ट में मुख्य रूप से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वाले NBFC पर ध्यान केंद्रित किया गया है.

समानता का नियम (Ownership Neutral): अभी तक सरकारी स्वामित्व वाले NBFC को 'अपर लेयर' के सख्त नियमों से छूट मिली हुई थी. लेकिन नए प्रस्ताव में कहा गया है कि नियम 'ओनरशिप न्यूट्रल' होने चाहिए. यानी चाहे कंपनी सरकारी हो या प्राइवेट, अगर वह तय मानकों को पूरा करती है, तो उसे NBFC-UL की श्रेणी में रखा जाएगा.

पारदर्शिता: सरकारी कंपनियों को शामिल करने से पूरे सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा.

गारंटी और क्रेडिट रिस्क ट्रांसफर के नए प्रस्ताव

RBI ने क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण ढील देने का सुझाव दिया है:

स्टेट गवर्नमेंट गारंटी: NBFC-UL को अब राज्य सरकार की गारंटी का इस्तेमाल करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है.

लिमिट में छूट: क्रेडिट रिस्क ट्रांसफर (Credit Risk Transfer) के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गारंटी पर कोई ऊपरी सीमा (Limit) नहीं होगी, बशर्ते वे RBI की तरफ से तय की गई विशिष्ट शर्तों को पूरा करती हों.

यह कदम NBFC को अपनी जोखिम प्रबंधन क्षमताओं को बेहतर बनाने और अधिक ऋण प्रदान करने की सुविधा देगा.

क्यों जरूरी हैं ये बदलाव?

पिछले कुछ सालों में NBFC सेक्टर का विस्तार बहुत तेजी से हुआ है. कई बड़ी NBFC अब बैंकों के बराबर की चुनौती पेश कर रही हैं. ऐसे में, उन पर निगरानी और नियंत्रण के नियम भी उतने ही सख्त होने चाहिए.

जटिलता कम करना: पुराने स्कोरिंग सिस्टम में कई अलग-अलग पैरामीटर्स थे, जिन्हें समझना और लागू करना चुनौतीपूर्ण था. एसेट साइज आधारित नियम इसे बेहद सीधा बना देंगे.

जोखिम प्रबंधन: बड़े NBFC की विफलता पूरे वित्तीय सिस्टम को हिला सकती है, इसलिए सरकारी कंपनियों को भी उसी कड़े दायरे में लाना सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है.

जनता से मांगे सुझाव

RBI ने इस ड्राफ्ट पर हितधारकों (Stakeholders) और आम जनता से सुझाव मांगे हैं. अपनी प्रतिक्रियाएं भेजने के लिए 4 मई 2026 तक का समय दिया गया है. इन सुझावों के विश्लेषण के बाद ही अंतिम गाइडलाइन्स जारी की जाएंगी. यह बदलाव आने वाले समय में NBFC को अधिक अनुशासित और सुरक्षित बनाने में मदद करेगा.

Conclusion

RBI का यह ड्राफ्ट NBFC सेक्टर के 'रेगुलेटरी आर्किटेक्चर' को आधुनिक बनाने की दिशा में एक साहसी कदम है. 1 लाख करोड़ से ज्यादा के एसेट वाली कंपनियों पर विशेष ध्यान और सरकारी संस्थानों को भी समान नियमों के दायरे में लाना एक स्वागत योग्य बदलाव है. इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि वित्तीय स्थिरता भी सुनिश्चित होगी.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 NBFC-UL का क्या मतलब है?

इसका मतलब 'NBFC Upper Layer' है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण और बड़े NBFC को रखा जाता है.

Q2 RBI ने पहचान के लिए किस नए तरीके का प्रस्ताव दिया है?

RBI ने 'पैरामीट्रिक स्कोरिंग' की जगह 'एसेट साइज आधारित पहचान' का प्रस्ताव दिया है.

Q3 क्या सरकारी NBFC अब अपर लेयर का हिस्सा होंगे?

जी हां, नए ड्राफ्ट के अनुसार सरकारी NBFC को भी अब अपर लेयर के नियमों का पालन करना होगा.

Q4 सुझाव जमा करने की आखिरी तारीख क्या है?

RBI ने सुझाव देने के लिए 4 मई 2026 तक का समय दिया है.

Q5 एसेट साइज की सीमा क्या रखी गई है?

मुख्य रूप से 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति वाले NBFC पर फोकस किया गया है.

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