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RBI MPC Meeting Decision on Repo Rate: फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY2025-26) की चौथी बैठक के नतीजे आ गए हैं. त्योहारी सीजन के बीच आए इस नतीजे से आपको थोड़ा मायूस होना पड़ सकता है क्योंकि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने रेपो रेट को 5.5% पर बरकरार रखने का फैसला सुनाया है. मतलब आपकी ईएमआई न घटेगी और न बढ़ेगी, फिलहाल वो जस का तस रहने की उम्मीद है.
बता दें कि फरवरी से जून तक आरबीआई लगातार रेपो रेट में कटौती की है. तीन बैठकों में केन्द्रीय बैंक ने 1% तक रेपो रेट घटाया है. हालांकि अगस्त में हुई बैठक में भी आरबीआई ने रेपो रेट को 5.5% पर बरकरार रखने का फैसला सुनाया था.
वहीं MSF को 5.75% और SDF को 5.25% पर बरकरार रखा है. अपनी स्पीच के दौरान गवर्नर ने कहा कि GST दरों में कटौती से महंगाई में कमी आएगी. ग्लोबल इकोनॉमी में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं. ग्लोबल इकोनॉमी में भारी उतार-चढ़ाव हैं.उन्होंने कहा कि खाद्य कीमतों में गिरावट से महंगाई में कमी आएगी. FY26 महंगाई दर 3.1% से घटकर 2.6% का अनुमान है.
Aug- 25 | 5.5% | Status Quo |
June -25 | 5.5% | 0.5% Cut |
April -25 | 6% | 0.25% cut |
February-25 | 6.25% | 0.25% cut |
December-24 | 6.5% | Status Quo |
October-24 | 6.5% | Status Quo |
August-24 | 6.5% | Status Quo |
June-24 | 6.5% | Status Quo |
Apr-24 | 6.50% | Status Quo |
Feb-24 | 6.5% | Status Quo |
Dec-23 | 6.5% | Status Quo |
Oct-23 | 6.5% | Status Quo |
Aug-23 | 6.50% | Status Quo |
June | 6.50% | Status Quo |
April | 6.50% | Status Quo |
February | 6.50% | 0.25% Increase |
December | 6.25% | 0.35% increase |
Sept 2022 | 5.9% | 0.5% increase |
Aug-2022 | 5.4% | 0.5% increase |
June - 2022 | 4.9% | 0.5% Increase |
May-22 | 4.4% | 0.40% Increase |
Apr-22 | 4% | Status Quo |
Feb-22 | 4% | Status Quo |
Dec -21 | 4% | Status Quo |
Oct -21 | 4% | Status Quo |
Aug-21 | 4% | Status Quo |
Jun-21 | 4% | Status Quo |
Apr-21 | 4% | Status Quo |
Feb-21 | 4% | Status Quo |
Dec-20 | 4% | Status Quo |
Oct-20 | 4% | Status Quo |
Aug-20 | 4% | Status Quo |
May-20 | 4% | 0.40% cut |
रेपो रेट एक तरह का बेंचमार्क होता है, जिसके आधार पर अन्य बैंक आम लोगों को दिए जाने वाले लोन के इंटरेस्ट रेट को निर्धारित करते हैं. जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों को कर्ज ज्यादा ब्याज दर पर मिलता है. ऐसे में बैंक आम आदमी के लिए भी होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दर को बढ़ा देती हैं और इसका असर ईएमआई पर पड़ता है. वहीं जब रेपो रेट घटता है, तो बैंकों को आरबीआई से कर्ज सस्ती दर पर मिलता है, ऐसे में बैंक भी अपने ग्राहकों को लोन सस्ती दरों पर देने लगते हैं.
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