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RBI MPC Meeting: वित्त वर्ष 2024-25 की पांचवीं मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग आज तीसरा दिन है. आज गवर्नर शक्तिकान्त दास (RBI Governor Shaktikanta Das) तीन दिवसीय बैठक के नतीजे सुनाएंगे. ज्यादातर लोगों को उम्मीद है कि इस बार गवर्नर रेपो रेट में कटौती कर सकते हैं. जब रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव किया जाता है तो उसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ता है. बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से आखिरी बार फरवरी 2023 में 25 बेसिस प्वाइंट की बढोतरी की गई थी. उस वक्त रेपो रेट को 6.25 फीसदी से बढ़ाकर 6.50 फीसदी किया गया था. उसके बाद से लगातार रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को स्थिर रखा हुआ है. आइए आपको बताते हैं कि अगर रेपो रेट बढ़ा या घटा तो आपके लिए क्या-क्या बदलेगा.
रेपो रेट वो ब्याज दर होती है, जिस पर बैंकों को आरबीआई लोन देता है यानी अगर रेपो रेट बढ़ता है तो दूसरे बैंकों को आरबीआई से कर्ज महंगी दर पर मिलने लगता है और रेपो रेट जब घटता है तो बैंकों के लिए आरबीआई से मिलने वाला लोन सस्ता हो जाता है. रेपो रेट बढ़ने के बाद जब दूसरे बैंक आरबीआई से महंगी ब्याज दर पर लोन लेते हैं, तो वो अपने ग्राहकों को भी लोन महंगी ब्याज दर पर देते हैं, वहीं जब बैंक आरबीआई से कम ब्याज दर पर कर्ज लेते हैं, तो आम ग्राहकों के लिए भी बैंकों में लोन सस्ते हो जाते हैं. ऐसे में अगर इस बार गवर्नर रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव करते हैं तो आने वाले दिनों में आपके लिए लोन सस्ते हो जाएंगे.
रेपो रेट महंगाई से लड़ने का शक्तिशाली टूल है, जिसका समय समय पर आरबीआई स्थिति के हिसाब से इस्तेमाल करता है. जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो आरबीआई इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है और रेपो रेट को बढ़ा देता है. आमतौर पर 0.50 या इससे कम की बढ़ोतरी की जाती है. लेकिन जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है और ऐसे में RBI रेपो रेट कम कर देता है.