&format=webp&quality=medium)
RBI MPC Meeting Decision on Repo Rate: फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY2025-26) की तीसरी बैठक के नतीजे आ गए हैं. लेकिन इस बार आपको इन नतीजों से थोड़ा मायूस होना पड़ सकता है क्योंकि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने रेपो रेट को 5.5% पर बरकरार रखने का फैसला सुनाया है. मतलब आपकी ईएमआई न घटेगी और न बढ़ेगी, फिलहाल वो जस का तस रहने की उम्मीद है. बता दें कि फरवरी से जून तक आरबीआई लगातार रेपो रेट में कटौती की है. तीन बैठकों में केन्द्रीय बैंक ने 1% तक रेपो रेट घटाया है. ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि इस बार भी आरबीआई ब्याज दरों में कटौती कर सकता है.
स्पीच के दौरान आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सरकार को बेहतर इकोनॉमी की उम्मीद है. मीडियम टर्म में अर्थव्यवस्था के शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है. ग्लोबल स्तर पर चुनौतियां बनी हुई हैं. इस बार की मीटिंग में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. रेपो रेट 5.50% पर बरकरार है. RBI के सभी सदस्यों ने सर्वसहमति सेन्यूट्रल रुख बरकरार रखा.
रेपो रेट (Repo Rate) वो ब्याज दर है, जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) कमर्शियल बैंकों (जैसे SBI, HDFC, ICICI) को कम समय के लिए कर्ज देता है. ये मौद्रिक नीति का सबसे शक्तिशाली हथियार है. अगर रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए RBI से कर्ज लेना महंगा हो जाता है. इसकी भरपाई के लिए बैंक भी अपने ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन, जैसे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन, पर ब्याज दरें बढ़ा देंगे. इससे लोगों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा और वो कम खर्च करेंगे. बाज़ार में पैसे का बहाव (लिक्विडिटी) कम होगा, जिससे बढ़ती महंगाई पर लगाम लगेगी.
वहीं इसके उलट, जब अर्थव्यवस्था सुस्त होती है और विकास को गति देने की ज़रूरत होती है, तो RBI रेपो रेट घटा देता है. इससे बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और वो भी अपनी ब्याज दरें कम कर देते हैं. लोन सस्ता होने से लोग और कंपनियां ज़्यादा कर्ज लेकर खर्च और निवेश करते हैं, जिससे बाज़ार में लिक्विडिटी बढ़ती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है.
1. RBI ने ब्याज दर बिना किसी बदलाव के 5.5% पर स्थिर रखी
2. MPC का सर्वसम्मति से फैसला
3. पॉलिसी रुख 'न्यूट्रल' पर कायम
4. ग्लोबल चुनौतियां कायम, टैरिफ की अनिश्चितता बढ़ रही है
5. FY26 के लिए GDP अनुमान 6.5% पर कायम
6. औसत से अच्छे मॉनसून, महंगाई में कमी से ग्रोथ को सपोर्ट
7. फरवरी 2019 के बाद पहली बार फूड इंफ्लेशन निगेटिव हुआ
8. कोर इंफ्लेशन थोड़ा बढ़कर 4.4% हुआ
9. FY26 CPI अनुमान में भारी कटौती, 3.7% से घटाकर 3.1% किया
10. 1 अगस्त को फॉरेक्स रिजर्व $688 अरब