RBI गवर्नर के एक ऐलान से Bank Nifty ने टच किया रिकॉर्ड हाई, CRR में 1% कटौती से आखिर क्यों खुश हैं Banks

RBI ने अपनी MPC Meet में ब्याज दरों (Repo Rate) में कटौती के साथ ही CRR में भी 1 फीसदी की कटौती का ऐलान कर दिया है. आरबीआई के इस फैसले के बाद Bank Nifty ने भी अपना रिकॉर्ड हाई टच किया है.
RBI गवर्नर के एक ऐलान से Bank Nifty ने टच किया रिकॉर्ड हाई, CRR में 1% कटौती से आखिर क्यों खुश हैं Banks

RBI Cash Reserve Ratio: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जून की एमपीसी बैठक में लगातार तीसरी बार ब्याज दरों (Repo Rate) में कटौती करने का फैसला किया है. इस बार RBI ने 0.50 फीसदी की कटौती कर Repo Rate को 5.50 फीसदी कर दिया है. इसके साथ RBI ने CRR में भी 1 फीसदी की कटौती का ऐलान कर दिया है. RBI ने बताया कि CRR में कटौती से दिसंबर 2025 तक बैंकिंग सिस्टम में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी जारी होगी.

RBI गवर्नर ने कहा कि RBI बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी को मैंटेन करने के लिए प्रतिबद्धन है. सिस्टम में लिक्विडिटी को बनाए रखने के लिए RBI ने कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) को 100 बेसिस प्वाइंट्स से घटाकर 3 फीसदी तक करने का फैसला किया है. CRR में ये कटौती 6 सितंबर, 4 अक्टूबर, 1 नवंबर और 29 नवंबर, 2025 से शुरू हो रहे पखवाड़े में 25 बेसिस अंकों के चार बराबर किस्तों में की जाएगी.

Bank Nifty ने टच किया रिकॉर्ड हाई

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CRR को लेकर RBI गवर्नर के इस ऐलान का मार्केट पर तुरंत असर दिखा है. आरबीआई के इस फैसले के बाद Bank Nifty ने रिकॉर्ड हाई बनाते करते हुए 56,515.80 का लेवल का टच किया है. तो ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर ये CRR होता क्या है और इसमें 1 फीसदी की कटौती से बैंकिंग सिस्टम पर क्या असर होने वाला है.

क्या होता है CRR?

CRR यानी कैश रिज़र्व रेशियो वह न्यूनतम राशि होती है जो बैंकों को अपनी कुल जमा राशि में से RBI के पास नकद के रूप में जमा करनी होती है. यह राशि ब्याज रहित होती है और इसका उद्देश्य बाजार में नकदी (liquidity) को नियंत्रित करना होता है.

CRR में 1% की कटौती का मतलब

अगर CRR में 1 प्रतिशत की कटौती की जाती है, तो बैंकों को RBI के पास कम पैसा जमा करना पड़ेगा. इससे बैंकों के पास अधिक नकदी उपलब्ध होगी, जिसे वे कर्ज के रूप में लोगों और व्यवसायों को दे सकते हैं.

बैंकिंग सिस्टम पर असर

नकदी बढ़ेगी (Liquidity Boost)
बैंकों के पास कर्ज देने के लिए ज्यादा पैसा उपलब्ध होगा. उदाहरण के लिए, अगर किसी बैंक के पास ₹1 लाख करोड़ की जमा राशि है और CRR 4% से घटाकर 3% किया जाता है, तो बैंक को ₹1,000 करोड़ अतिरिक्त मिल जाएंगे.

उधारी बढ़ेगी (Credit Growth)
बैंक अब सस्ती दरों पर लोन दे सकते हैं – जैसे होम लोन, ऑटो लोन या बिजनेस लोन – जिससे मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी.

ब्याज दरों पर संभावित असर
नकदी बढ़ने के कारण बैंक ब्याज दरों को घटा सकते हैं, जिससे लोन सस्ते हो सकते हैं. हालांकि, यह पूरी तरह बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगा.

बाजार में सकारात्मक संकेत
निवेशकों और बाजार के लिए यह एक सकारात्मक संकेत माना जाता है. इससे स्टॉक मार्केट में तेजी आ सकती है, खासकर बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर में.

महंगाई पर निगरानी जरूरी
अधिक नकदी से मांग बढ़ सकती है, जिससे महंगाई पर दबाव बन सकता है. इसलिए RBI को इसका संतुलन भी बनाए रखना होगा.

VIDEO: RBI MPC MEETING TOP 10 HIGHLIGHTS

बैंकों ने का कैसा रहा रिएक्शन

Indian Overseas Bank के एमडी और सीईओ अजय श्रीवास्तव ने कहा, "आरबीआई द्वारा रेपो दर को 50 आधार अंकों से घटाकर 5.50% करने और सीआरआर को चार चरणों में 100 आधार अंकों से कम करने का निर्णय एक मजबूत और समय पर नीतिगत बदलाव को दर्शाता है जो मूल्य स्थिरता के साथ विकास को संतुलित करने के साथ संरेखित है. इसके अलावा, वित्त वर्ष 26 के लिए CPI मुद्रास्फीति में संशोधन करके 3.7% करना भी RBI के मुद्रास्फीति में विश्वास को दर्शाता है जो उसके 4% लक्ष्य के साथ संरेखित है. सीआरआर कटौती के निर्णय से प्राथमिक तरलता में 2.5 लाख करोड़ रुपये जारी होने की उम्मीद है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में ऋण की स्थिति आसान हो जाएगी. यह समग्र नीति वित्त वर्ष 26 में GDP के 6.5% पर अनुमानित होने और स्थिर तिमाही प्रवृत्ति के साथ एक अच्छी तरह से कैलिब्रेटेड और विचारशील दृष्टिकोण को दर्शाती है. गैर-स्वर्ण आयात में तेजी और सकल एफडीआई में 14% की वृद्धि भी मजबूत घरेलू मांग और भारत की संरचनात्मक ताकत में वैश्विक निवेशकों के विश्वास को दर्शाती है. हमारा मानना ​​है कि इस नीतिगत निर्णय से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण विस्तार के लिए आवश्यक प्रेरणा मिलने की उम्मीद है जो समावेशी आर्थिक विकास को तेज करेगा."

PNB के एमडी और सीईओ अशोक चंद्र ने RBI द्वारा CRR में कटौती पर कहा, "RBI द्वारा रेपो दर में की गई नपी-तुली कटौती और तटस्थ रुख अपनाने से मूल्य और वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए विकास को बढ़ावा देने के लिए दूरदर्शी दृष्टिकोण का पता चलता है. चरणबद्ध तरीके से सीआरआर में 100 बीपीएस की कटौती करने का निर्णय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्रणालीगत तरलता बढ़ेगी और बैंकिंग क्षेत्र को अतिरिक्त ऋण देने की क्षमता मिलेगी. मुद्रास्फीति में कमी और मैक्रो संकेतकों में लचीलापन दिखने के साथ, यह नीतिगत कदम ऋण उठाव को बढ़ावा देगा, निवेशकों की भावना को बढ़ावा देगा और भारत की विकास गति को और मजबूत करेगा."

उन्होने आगे कहा, "PNB में, हम इसे MSME, खुदरा, कृषि और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का समर्थन जारी रखते हुए, विशेष रूप से उत्पादक क्षेत्रों और खुदरा मांग की ओर ऋण परिनियोजन को बढ़ाने के अवसर के रूप में देखते हैं. भारतीय बैंकिंग क्षेत्र मजबूत बुनियादी सिद्धांतों पर खड़ा है, और हम एक स्थिर, समावेशी और विकास-आधारित वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के आरबीआई के दृष्टिकोण के साथ जुड़े हुए हैं."

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