RBI MPC 2025-26: रेपो रेट कम होने से आपके लोन की EMI क्‍यों घट जाती है?

RBI Monetary Policy 2025-26: अगर इस बार भी रेपो रेट कम होता है तो इससे आम आदमी को काफी फायदा होगा क्‍योंकि इससे उसकी ईएमआई का बोझ कम हो जाएगा. लेकिन रेपो रेट के कम होने से आपका लोन सस्‍ता क्‍यों होता है, क्‍या ये आपको पता है? यहां जानिए.
RBI MPC 2025-26: रेपो रेट कम होने से आपके लोन की EMI क्‍यों घट जाती है?

RBI Monetary Policy 2025-26: FY 2025-26 की पहली मॉनेटरी पॉलिसी के नतीजे आज घोषित होने हैं. आज सुबह 10 बजे आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) मॉनेटरी पॉलिसी के नतीजों की घोषणा करेंगे. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार भी रेपो रेट (Repo Rate) में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की कटौती की जा सकती है. अगर ऐसा होता है तो इससे आम आदमी को काफी फायदा होगा क्‍योंकि इससे उसकी ईएमआई का बोझ कम हो जाएगा. लेकिन रेपो रेट के कम होने से आपका लोन सस्‍ता क्‍यों होता है, क्‍या ये आपको पता है? यहां जानिए.

पहले जानिए क्‍या होता है Repo Rate

जिस तरह आप अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक से कर्ज लेते हैं और उसे एक निर्धारित ब्‍याज के साथ चुकाते हैं, उसी तरह सार्वजनिक, निजी और व्‍यावसायिक क्षेत्र की बैंकों को भी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लोन लेने की जरूरत पड़ती है. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक ही ओर से जिस ब्‍याज दर पर बैंकों को लोन दिया जाता है, उसे रेपो रेट कहा जाता है. रेपो रेट कम होने पर आम आदमी को राहत मिल जाती है और रेपो रेट बढ़ने पर आम आदमी के लिए भी मुश्किलें बढ़ती हैं.

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रेपो रेट घटने से आपकी EMI कम क्‍यों होती है?

रेपो रेट एक तरह का बेंचमार्क होता है, जिसके आधार पर अन्‍य बैंक आम लोगों को दिए जाने वाले लोन के इंटरेस्‍ट रेट को निर्धारित करते हैं. जब रेपो रेट कम होता है तो बैंकों को आरबीआई से सस्‍ती दर पर लोन मिलता है. ऐसे में बैकों को भी ग्राहकों को सस्‍ती दर पर लोन देने का मौका मिल जाता है. इसके कारण होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन वगैरह सस्‍ते हो जाते हैं. जब लोन की ब्‍याज दर कम होती है तो इसका सीधा असर EMI पर पड़ता है और आम आदमी की EMI का बोझ कम हो जाता है. इसी तरह जब रेपो रेट बढ़ता है तो लोन महंगे होते हैं और EMI भी बढ़ जाती है.

रेपो रेट क्‍यों घटाता है RBI?

रेपो रेट महंगाई से लड़ने का शक्तिशाली टूल है, जिसका समय समय पर आरबीआई स्थिति के हिसाब से इस्‍तेमाल करता है. जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है और ऐसे में RBI रेपो रेट कम कर देता है. वहीं जब महंगाई बहुत ज्‍यादा होती है तो आरबीआई इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है और रेपो रेट को बढ़ा देता है. आमतौर पर 0.50 या इससे कम की बढ़ोतरी की जाती है. बता दें कि पिछली बैठक में आरबीआई गवर्नर ने रेपो रेट में 0.25% कटौती कर इसे 6.25% कर दिया था. ये कटौती 5 साल बाद की गई थी.


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