अगर गिरा GDP.. तो RBI उठा सकता है ये बड़ा कदम, एक झटके में सस्ता हो जाएगा Loan, घट जाएगी आपकी EMI!

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर विकास दर सुस्त रहती है और अमेरिकी फेड दरों में ढील देता है, तो भारत में भी कटौती की गुंजाइश बन सकती है. फिलहाल MPC ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.5% पर बरकरार रखा है.
अगर गिरा GDP.. तो RBI उठा सकता है ये बड़ा कदम, एक झटके में सस्ता हो जाएगा Loan, घट जाएगी आपकी EMI!

अगर आने वाले जीडीपी (GDP) के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहते हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) कमजोर जॉब मार्केट के चलते तेजी से ब्याज दरों में कटौती शुरू करता है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) भी नीतिगत दरें घटाने पर विचार कर सकती है. यह बात एचएसबीसी म्यूचुअल फंड की ताज़ा रिपोर्ट में कही गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर विकास दर सुस्त रहती है और अमेरिकी फेड दरों में ढील देता है, तो भारत में भी कटौती की गुंजाइश बन सकती है. फिलहाल MPC ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.5% पर बरकरार रखा है. तिमाही आधार पर यह अनुमान Q1 में 6.5%, Q2 में 6.7%, Q3 में 6.6% और Q4 में 6.3% का है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, जब तक स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, सरकारी बॉन्ड (G-Sec) की यील्ड सीमित दायरे में रहेगी और इस पर लिक्विडिटी की स्थिति का सबसे ज़्यादा असर होगा. आरबीआई ने फिलहाल रेपो रेट 5.50% पर स्थिर रखा है, जबकि इससे पहले कुल 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की जा चुकी है.

एचएसबीसी म्यूचुअल फंड का मानना है कि आरबीआई फिलहाल दरों में और बदलाव करने से पहले पिछली कटौतियों का असर देखने के लिए समय देना चाहता है. साथ ही, वैश्विक अनिश्चितताएं और टैरिफ से जुड़ी चुनौतियां ग्रोथ पर असर डाल सकती हैं, लेकिन महंगाई पर इनका असर सीमित रहने की संभावना है.

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि RBI सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखेगा, ताकि ब्याज दरों में हुई पिछली कटौती का फायदा पूरी तरह से लोगों और कारोबारों तक पहुंच सके. अगले महीने प्रस्तावित CRR कटौती से भी लोन की लागत कम हो सकती है.

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बॉन्ड मार्केट की बात करें तो 2-4 साल की मैच्योरिटी वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड फिलहाल सरकारी बॉन्ड से 65-75 बेसिस प्वाइंट का ज्यादा रिटर्न दे रहे हैं, लेकिन आगे चलकर यह अंतर घट सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सितंबर से अमेरिकी फेड दरों में कटौती शुरू करता है और भारत में महंगाई 2026 की चौथी तिमाही तक स्थिर रहती है, तो RBI के पास भी कार्रवाई करने का ज़्यादा मौका होगा. साथ ही, 2025 के आखिर तक MPC का ध्यान एक संतुलित नीति अपनाने और विकास की रफ्तार बनाए रखने पर रहेगा.

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