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RBI ने को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए नया मास्टर सर्कुलर जारी किया है. इसमें ब्रांच खोलने, एटीएम लगाने और डोरस्टेप बैंकिंग जैसी सुविधाओं को लेकर कई बड़े बदलाव किए गए हैं. अब बैंकों को हर काम के लिए रिजर्व बैंक से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन कुछ शर्तें जरूर रखी गई हैं.
पहले जहां FSWM (Financially Sound and Well Managed) की शर्त थी, अब उसकी जगह ECBA (Eligibility Criteria for Business Authorisation) लाई गई है. यानी अब बैंक को अपने बिजनेस फैसलों के लिए तय योग्यता मानकों पर खरा उतरना होगा.
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RBI ने साफ कर दिया है कि ECBA मानक पर खरे उतरने वाले बैंक हर साल अपनी मौजूदा ब्रांचों के मुकाबले 10% तक नई ब्रांच खोल सकते हैं. इसके लिए RBI से अलग से मंजूरी नहीं लेनी होगी. हालांकि, अगर कोई बैंक ECBA के योग्य नहीं है तो वह नई ब्रांच नहीं खोल पाएगा.
अब को-ऑपरेटिव बैंकों को अपनी ब्रांचों में ATM और CDM (Cash Deposit Machine) लगाने के लिए RBI से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी. इतना ही नहीं, डोरस्टेप बैंकिंग शुरू करने के लिए भी उन्हें कोई अप्रूवल लेने की जरूरत नहीं है. यानी अब बैंक अपने ग्राहकों को ज्यादा सुविधाएं आसानी से दे सकेंगे.
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Tier 3 और Tier 4 स्तर के बैंक अब पूरे राज्य में विस्तार कर सकते हैं. उन्हें राज्य की सीमाओं में कहीं भी ब्रांच खोलने की छूट होगी. ये फैसला ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बैंकिंग सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
RBI ने मंजूरी की प्रक्रिया आसान की है, लेकिन पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कुछ शर्तें जोड़ी हैं. अब किसी भी ब्रांच को खोलने, बंद करने या शिफ्ट करने की जानकारी 7 दिन के भीतर RBI को देनी होगी. भले ही कोई बदलाव न हुआ हो, फिर भी हर महीने NIL रिपोर्ट देना जरूरी होगा.
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अगर कोई बैंक अपना नाम या लोगो बदलना चाहता है, तो उसे पहले RBI से NOC (No Objection Certificate) लेना जरूरी होगा. RBI ने इस दिशा में पहली बार Scheduled Bank बनने की प्रक्रिया भी साफ कर दी है, जिससे बैंकों को अपनी स्थिति समझने और सुधारने में मदद मिलेगी.
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RBI का ये मास्टर सर्कुलर को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आया है. इससे बैंकों को अपने फैसले लेने की आज़ादी तो मिलेगी ही, साथ में बैंकिंग सेवाएं भी ज्यादा तेजी से फैल सकेंगी. ग्राहकों को इससे बेहतर और ज्यादा सुविधा मिलने की उम्मीद है.