महीने के पहले ही दिन RBI का बड़ा फैसला, इस समयसीमा को 4 से बढ़ाकर किया 6 महीने, जानिए किसे होगा फायदा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक्सपोर्टर्स और इम्पोर्टर्स के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब मर्चेंटिंग ट्रेड ट्रांजैक्शन (Merchanting Trade Transactions- MTT) के लिए समयसीमा 4 महीने से बढ़ाकर 6 महीने कर दी गई है. इससे छोटे-बड़े कारोबारियों को राहत मिलेगी, ग्लोबल ट्रेड (Global Trade) की अनिश्चितताओं से निपटना आसान होगा और कंप्लायंस (Compliance) का बोझ भी घटेगा.
महीने के पहले ही दिन RBI का बड़ा फैसला, इस समयसीमा को 4 से बढ़ाकर किया 6 महीने, जानिए किसे होगा फायदा

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कारोबार करने वालों के लिए एक राहतभरा फैसला किया है. अब मर्चेंटिंग ट्रेड ट्रांजैक्शन (Merchanting Trade Transactions- MTT) की समयसीमा को बढ़ा दिया गया है. पहले जहां यह लिमिट 4 महीने थी, अब इसे बढ़ाकर 6 महीने कर दिया गया है.

इस फैसले का सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो छोटे वैल्यू वाले ट्रेड (Small Value Trade) करते हैं. वैश्विक बाजार (Global Market) में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितताओं को देखते हुए यह कदम कारोबारियों को ज्यादा लचीलापन देगा.

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क्या है MTT?

MTT यानी Merchanting Trade Transactions. इसमें भारतीय व्यापारी विदेश से सामान खरीदते हैं और सीधे किसी दूसरे देश को बेचते हैं. सामान भारत नहीं आता, लेकिन लेन-देन भारतीय कारोबारी के जरिए होता है. ऐसे ट्रेड में तय समयसीमा में पेमेंट करना जरूरी होता है.

अब क्यों बढ़ाई गई समयसीमा?

ग्लोबल ट्रेड में लगातार अनिश्चितता बनी हुई है. शिपमेंट और डिलीवरी में देरी आम हो गई है. कारोबारी ज्यादा समय चाहते थे, ताकि नुकसान से बच सकें. छोटे एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट डील्स को आसान बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है.

क्या होगा फायदा?

एक्सपोर्टर्स और इम्पोर्टर्स को ज्यादा समय मिलेगा. शिपिंग बिल (Shipping Bill) और बिल ऑफ एंट्री (Bill of Entry) का क्लोजर आसान होगा. इससे छोटे कारोबारियों को ज्यादा सहूलियत मिलेगी. उनके लिए कंप्लायंस का बोझ (Compliance Burden) कम हो जाएगा.

Conclusion

RBI का यह कदम खासकर छोटे कारोबारियों और ट्रेडर्स के लिए बड़ी राहत है. अब उन्हें पेमेंट और डाक्यूमेंटेशन पूरा करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा. इससे भारत का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कारोबार और मजबूत होगा और ग्लोबल ट्रेड की चुनौतियों से निपटना आसान होगा.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. RBI क्या है?

RBI भारत का केंद्रीय बैंक है जो वित्तीय नीतियां बनाता है.

2. MTT क्या होता है?

Merchanting Trade Transactions में सामान एक देश से दूसरे देश जाता है, लेकिन सौदा भारतीय व्यापारी करता है.

3. पहले MTT की समयसीमा कितनी थी?

पहले यह 4 महीने थी.

4. अब समयसीमा कितनी है?

अब यह बढ़ाकर 6 महीने कर दी गई है.

5. इस फैसले से किसे फायदा होगा?

एक्सपोर्टर्स और इम्पोर्टर्स को.

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