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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) के बेतहाशा विस्तार पर लगाम लगाने और उन्हें नियमों के दायरे में लाने के लिए नई गाइडलाइन्स जारी की हैं.
बुधवार से प्रभावी हुए इन नियमों के तहत, अब कोई भी कंपनी अपनी वित्तीय सेहत की जांच कराए बिना नई शाखाएं नहीं खोल सकेगी. आरबीआई का यह कदम वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जिससे बाजार में केवल विश्वसनीय और मजबूत कंपनियां ही आगे बढ़ सकें.
RBI ने कंपनियों की ताकत के हिसाब से सीमाएं तय की हैं:
छोटी कंपनियां: जिन NBFCs के पास 50 करोड़ रुपये तक का 'नेट ओन्ड फंड' है या जिनकी क्रेडिट रेटिंग कम है, वे केवल उसी राज्य में ब्रांच खोल पाएंगी जहां उनका मुख्य ऑफिस रजिस्टर्ड है.
बड़ी कंपनियां: जिनके पास 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड है और जिनकी क्रेडिट रेटिंग AA या उससे ऊपर है, उन्हें ही पूरे भारत में विस्तार करने की अनुमति होगी.
अब नई ब्रांच खोलने के लिए कागजी कार्यवाही के बजाय डिजिटल रास्ता अपनाना होगा. सभी आवेदन PRAVAAH पोर्टल के जरिए जमा करने होंगे. बैंक को सूचना देने के बाद अगर 30 दिनों तक RBI की तरफ से कोई आपत्ति (No Objection) नहीं आती है, तो कंपनी अपनी योजना पर आगे बढ़ सकती है.
सोने के बदले लोन देने वाली कंपनियों (NBFC-ICCs) के लिए खास निर्देश हैं:
अगर ऐसी कंपनी 1000 से ज्यादा ब्रांच खोलना चाहती है, तो उसे पहले RBI से विशेष अनुमति लेनी होगी. साथ ही, गोल्ड लोन देने वाली हर ब्रांच में सोने की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम और स्टोरेज की सुविधा होना जरूरी है.
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घर खरीदने के लिए लोन देने वाली कंपनियों को अब कोई भी नई ब्रांच खोलने से पहले 'नेशनल हाउसिंग बैंक' (NHB) को जानकारी देनी होगी. सबसे बड़ी बात यह है कि ये कंपनियां भारत के बाहर यानी विदेशों में अपनी शाखाएं नहीं खोल सकेंगी.
अगर कोई NBFC अपनी किसी ब्रांच को बंद करना चाहती है, तो उसे मनमर्जी से ताला लगाने की इजाजत नहीं होगी:
3 महीने का नोटिस: ब्रांच बंद करने से कम से कम 3 महीने पहले अखबारों में सार्वजनिक नोटिस देना होगा. साथ ही, इसकी जानकारी RBI या NHB को भी देनी होगी ताकि ग्राहकों को परेशानी न हो.
RBI के इस कदम से बाजार में केवल वही कंपनियां टिक पाएंगी जो वित्तीय रूप से मजबूत हैं. इससे आम ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रहेगा और कंपनियों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी. 'प्रवाह' पोर्टल के जरिए निगरानी रखना अब बैंक के लिए और भी आसान हो जाएगा.
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