RBI ने एक ही दिन में 3 बैंकों पर ठोका जुर्माना! जानिए क्या कर रहे थे गड़बड़ी, जिसे रिजर्व बैंक ने पकड़ लिया

RBI ने 22 मई 2026 को एक ही दिन में 3 को-ऑपरेटिव बैंकों पर कुल 6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इन बैंकों पर KYC नियमों की अनदेखी, ग्राहकों के खातों की सही निगरानी नहीं करने और डायरेक्टर्स से जुड़े लोन नियम तोड़ने जैसे गंभीर आरोप साबित हुए. रिजर्व बैंक ने साफ कहा कि यह कार्रवाई रेगुलेटरी नियमों के उल्लंघन की वजह से की गई है.
RBI ने एक ही दिन में 3 बैंकों पर ठोका जुर्माना! जानिए क्या कर रहे थे गड़बड़ी, जिसे रिजर्व बैंक ने पकड़ लिया

RBI ने 22 मई 2026 को एक ही दिन में 3 को-ऑपरेटिव बैंकों पर कुल 6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

RBI ने देश के 3 को-ऑपरेटिव बैंकों पर एक ही दिन में बड़ी कार्रवाई करते हुए 2-2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. रिजर्व बैंक की जांच में इन बैंकों द्वारा KYC नियमों का पालन नहीं करने, ग्राहकों के खातों की सही मॉनिटरिंग नहीं करने और बैंकिंग नियमों में लापरवाही बरतने जैसी गंभीर कमियां सामने आईं.

यह कार्रवाई 22 मई 2026 को जारी आदेशों के तहत की गई. RBI ने साफ किया कि बैंकों पर लगाया गया जुर्माना केवल रेगुलेटरी नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है और इसका ग्राहकों के लेनदेन या बैंकिंग एग्रीमेंट की वैधता से कोई संबंध नहीं है. तीनों मामलों में बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के तहत कार्रवाई की गई है. आइए जानते हैं किन 3 को-ऑपरेटिव बैंकों पर लगाया गया जुर्माना.

1- पुणे का Shree Laxmi Co-Operative Bank

KYC नियमों में मिली बड़ी लापरवाही: RBI की जांच में पाया गया कि बैंक ग्राहकों के खातों की रिस्क कैटेगरी की समय-समय पर समीक्षा नहीं कर रहा था. नियम के मुताबिक हर 6 महीने में खातों का रिस्क रिव्यू जरूरी होता है, लेकिन बैंक ऐसा करने में फेल रहा. इसके अलावा ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड तय समय के भीतर CKYCR पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए.

ग्राहकों को बिना सूचना लगाए गए चार्ज: जांच में यह भी सामने आया कि बैंक ने न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर ग्राहकों से पीनल चार्ज वसूला, लेकिन इसकी पहले से जानकारी ग्राहकों को नहीं दी गई. साथ ही जिन खातों में लंबे समय से कोई ट्रांजैक्शन नहीं हुआ था, उनका सालाना रिव्यू भी नहीं किया गया.

2- राजस्थान का Jalore Central Co-Operative Bank

खातों की रिस्क मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं: RBI और NABARD की जांच में पाया गया कि बैंक ने ग्राहकों के खातों की रिस्क कैटेगरी की समीक्षा के लिए कोई मजबूत सिस्टम ही तैयार नहीं किया था. बैंकिंग सेक्टर में यह प्रक्रिया बेहद जरूरी मानी जाती है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके.

KYC अपडेट प्रक्रिया में भी चूक: बैंक अपने ग्राहकों के KYC दस्तावेज तय समय पर अपडेट नहीं कर रहा था. RBI के नियमों के मुताबिक अलग-अलग कैटेगरी के ग्राहकों के KYC अपडेट की निश्चित समय सीमा होती है, लेकिन बैंक इसमें लगातार लापरवाही करता मिला. इसी वजह से बैंक पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.

3- गुजरात का Lunawada People’s Co-Operative Bank

डायरेक्टर्स से जुड़े लोन नियम तोड़े गए: RBI की जांच में सामने आया कि बैंक ने ऐसे लोन मंजूर किए, जिनमें बैंक डायरेक्टर्स के रिश्तेदार गारंटर बने हुए थे. RBI के नियमों के अनुसार इस तरह के मामलों में हितों के टकराव की संभावना रहती है और ऐसे लेनदेन पर सख्त निगरानी जरूरी होती है.

बैंकिंग पारदर्शिता पर उठे सवाल: रिजर्व बैंक ने माना कि बैंक द्वारा मंजूर किए गए कुछ लोन रेगुलेटरी गाइडलाइन के खिलाफ थे. ऐसे मामलों में बैंकिंग सिस्टम की पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है. इसी कारण RBI ने बैंक पर आर्थिक जुर्माना लगाने का फैसला लिया.

RBI ने क्या कहा?

RBI ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई केवल रेगुलेटरी नियमों के पालन में कमी की वजह से की गई है. इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित बैंकों द्वारा किए गए सभी ट्रांजैक्शन गलत हैं. यह कदम बैंकों को नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए उठाया गया है.

रिजर्व बैंक ने यह भी साफ किया कि मौद्रिक जुर्माना लगाने के बावजूद जरूरत पड़ने पर आगे अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है. यानी अगर भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन जारी रहा तो RBI और कड़े कदम उठा सकता है.

Conclusion

RBI लगातार बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठा रहा है. इस कार्रवाई से साफ संकेत मिला है कि KYC नियमों, ग्राहकों के खातों की निगरानी और लोन मंजूरी से जुड़े नियमों में लापरवाही अब बैंकों को भारी पड़ सकती है. आने वाले समय में RBI ऐसे मामलों पर और ज्यादा सख्ती दिखा सकता है.

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