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बैंकों पर नजर रखने वाली हमारी सबसे बड़ी संस्था, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), आजकल बहुत सख्त मूड में है. हाल ही में एचडीएफसी बैंक के हंगामे के बाद अब विदेशी बैंक HSBC भी आरबीआई के रडार पर आ गया है.
आरबीआई ने 18 मार्च 2026 को एक आदेश जारी करते हुए HSBC बैंक पर ₹31.80 लाख का जुर्माना ठोक दिया है. यह जुर्माना इसलिए लगा है, क्योंकि बैंक ने उन पैसों का सही हिसाब-किताब और जानकारी नहीं रखी जो सालों से बैंक खातों में बिना किसी दावेदार के पड़े हुए हैं. आइए, इस पूरी कार्रवाई को आसान भाषा में समझते हैं.
आरबीआई ने जब 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के आधार पर बैंक की जांच की, तो दो मुख्य कमियां सामने आईं:
वेबसाइट पर डेटाबेस की कमी: नियम के मुताबिक, हर बैंक को अपनी वेबसाइट पर एक ऐसा 'सर्च इंजन' या लिस्ट देनी होती है जहां कोई भी अपना नाम डालकर देख सके कि क्या उसका कोई पुराना पैसा (Unclaimed Deposit) बैंक में पड़ा है. HSBC ने ऐसा सर्च डेटाबेस अपनी साइट पर नहीं दिया था.
UDRN नंबर जारी न करना: जब कोई पैसा सालों तक इस्तेमाल नहीं होता, तो उसे 'डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस' (DEA) फंड में डाल दिया जाता है. इस दौरान हर डिपॉजिट को एक खास पहचान नंबर यानी UDRN (Unclaimed Deposits Reference Number) देना जरूरी होता है, जो बैंक ने कई मामलों में नहीं किया.
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आरबीआई ने यह जुर्माना 'बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949' की धाराओं के तहत लगाया है.
कारण: बैंक को पहले 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी किया गया था. बैंक ने जवाब भी दिया और उनकी बात सुनी भी गई, लेकिन आरबीआई उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुआ.
नतीजा: अंत में आरबीआई ने तय किया कि नियमों की अनदेखी के लिए बैंक पर आर्थिक दंड लगाना जरूरी है.

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अगर आपका खाता HSBC में है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आरबीआई ने साफ कहा है कि यह जुर्माना बैंक द्वारा नियमों के पालन में कमी (Regulatory Compliance) के कारण लगा है. इसका बैंक के ग्राहकों के साथ हुए किसी भी लेनदेन या एग्रीमेंट की वैधता से कोई लेना-देना नहीं है. आपका पैसा और बैंक के साथ पूरी तरह सुरक्षित है.
अगर किसी बैंक खाते में 10 साल या उससे ज्यादा समय तक कोई लेनदेन न हो, तो उस पैसे को 'अनक्लेम्ड जमा' मान लिया जाता है. आरबीआई चाहता है कि बैंक ऐसे पैसों की जानकारी सार्वजनिक करें ताकि उनके असली मालिक या उनके वारिस अपना पैसा वापस पा सकें. HSBC ने इसी जानकारी को छुपाने या सही ढंग से न दिखाने की गलती की है.
आरबीआई की यह सख्ती बताती है कि चाहे बैंक कितना भी बड़ा या विदेशी क्यों न हो, अगर वह भारतीय ग्राहकों के अधिकारों और पारदर्शिता (Transparency) के नियमों को हल्के में लेगा, तो उसे भारी जुर्माना भरना पड़ेगा. HSBC के लिए यह ₹31.80 लाख की राशि भले ही छोटी हो, लेकिन इससे बैंक की साख पर जो सवाल उठे हैं, वे ज्यादा बड़े हैं.
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1- क्या HSBC बैंक बंद हो रहा है?
बिल्कुल नहीं! यह केवल एक आर्थिक जुर्माना है जो नियमों की अनदेखी के लिए लगाया गया है. बैंक का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहेगा.
2- मैं अपना अनक्लेम्ड डिपॉजिट (Unclaimed Deposit) कैसे चेक करूं?
आरबीआई के UDGAMA पोर्टल या संबंधित बैंक की वेबसाइट पर जाकर आप अपना या अपने परिवार का नाम चेक कर सकते हैं.
3- UDRN नंबर क्या होता है?
यह एक यूनिक नंबर होता है जिससे किसी खास अनक्लेम्ड डिपॉजिट राशि की पहचान की जाती है, ताकि क्लेम करते समय कोई भ्रम न हो.
4- DEA फंड क्या है?
यह आरबीआई का एक फंड है जहां बिना दावे वाला पैसा जमा किया जाता है. इसका उपयोग ग्राहकों को जागरूक करने के लिए किया जाता है.
5- क्या यह जुर्माना पहली बार लगा है?
नहीं, आरबीआई समय-समय पर नियमों का पालन न करने वाले सरकारी और प्राइवेट बैंकों पर ऐसे जुर्माने लगाता रहता है.
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