बड़ा एक्शन! RBI ने इस बैंक पर लगाई ₹10.10 लाख की पेनाल्टी, जानिए किस वजह से की गई ये कार्रवाई

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सिटी यूनियन बैंक लिमिटेड पर ₹10.10 लाख का जुर्माना लगाया है. बैंक की 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति की जांच के दौरान पाया गया कि बैंक ने ₹25,000 तक के कुछ कृषि प्राथमिक क्षेत्र के लोन पर अतिरिक्त चार्ज वसूले थे.
बड़ा एक्शन! RBI ने इस बैंक पर लगाई ₹10.10 लाख की पेनाल्टी, जानिए किस वजह से की गई ये कार्रवाई

नियमों की अनदेखी करने पर रिजर्व बैंक (RBI) ने 'सिटी यूनियन बैंक' पर लगाया ₹10.10 लाख का जुर्माना. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नियमों की अनदेखी करने पर सिटी यूनियन बैंक लिमिटेड (City Union Bank Limited) पर बड़ा एक्शन लिया है. केंद्रीय बैंक ने एक आदेश जारी कर सिटी यूनियन बैंक पर ₹10.10 लाख का भारी आर्थिक जुर्माना (Monetary Penalty) लगाया है.

यह कार्रवाई बैंक की तरफ से कृषि प्राथमिक क्षेत्र के लोन खातों (Priority Sector Loans) और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के डेटा से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन न करने की वजह से की गई है. आइए इस पूरे मामले को समझते हैं.

क्यों लगा बैंक पर जुर्माना?

आरबीआई की तरफ से बैंक के कामकाज की जांच (Statutory Inspection) की गई थी, जिसमें बैंक की 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन किया गया. इस दौरान बैंक पर मुख्य रूप से दो आरोप सही पाए गए, जिसके बाद यह जुर्माना तय किया गया:

कृषि लोन पर गलत चार्ज वसूलना: बैंक ने ₹25,000 तक के कुछ कृषि प्राथमिक क्षेत्र के लोन (Agriculture Priority Sector Loans) पर लोन से जुड़े अतिरिक्त चार्ज वसूल लिए थे, जबकि नियमों के मुताबिक छोटे कृषि लोन पर ऐसे चार्ज लगाने की मनाही है.

SHG डेटा रिपोर्ट न करना: बैंक ने स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों के स्तर का वित्तीय डेटा देश की क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (CICs-जैसे सिबिल या एक्सपेरियन) को नहीं भेजा था.

कारण बताओ नोटिस का नहीं मिला संतोषजनक जवाब

जांच में गड़बड़ियां सामने आने के बाद आरबीआई ने सिटी यूनियन बैंक को एक कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया था. बैंक से पूछा गया था कि नियमों का पालन न करने के लिए उस पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए. इस पर बैंक ने अपना लिखित जवाब दिया और एक पर्सनल हियरिंग (आमने-सामने की सुनवाई) के दौरान मौखिक दलीलें भी पेश कीं. हालांकि, आरबीआई ने बैंक के तर्कों को पर्याप्त नहीं माना और नियमों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए ₹10.10 लाख का जुर्माना ठोक दिया.

क्या ग्राहकों के खातों पर पड़ेगा कोई असर?

आरबीआई ने साफ शब्दों में स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से बैंक की तरफ से कानूनी और नियामक नियमों का पालन न करने (Deficiencies in Regulatory Compliance) की वजह से की गई है. इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी ट्रांजैक्शन (लेनदेन) या समझौते की वैधता पर सवाल उठाना नहीं है. यानी, बैंक के सामान्य ग्राहकों के खातों, उनके जमा पैसों या बैंक की सेवाओं पर इस जुर्माने का कोई भी बुरा असर नहीं पड़ेगा. ग्राहक पहले की तरह सुरक्षित बैंकिंग जारी रख सकते हैं.

Conclusion

आरबीआई का यह कदम दिखाता है कि वह प्राथमिक क्षेत्र (Priority Sector) के छोटे कर्जदारों और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के हितों की सुरक्षा को लेकर कितना सख्त है. छोटे किसानों से लोन पर गलत चार्ज वसूलना और क्रेडिट डेटा को छुपाना सीधे तौर पर ग्राहकों के वित्तीय अधिकारों का हनन है. इस तरह के जुर्माने अन्य बैंकों को भी नियमों के दायरे में रहकर पूरी पारदर्शिता के साथ काम करने की चेतावनी देते हैं.

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