भारतीय रिज़र्व बैंक के वो 2 गवर्नर जिन्होंने कभी किसी नोट पर नहीं किए सिग्‍नेचर, 90% लोगों को नहीं होगी ये जानकारी

आरबीआई द्वारा जारी हर नोट पर भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के हस्‍ताक्षर होते हैं. लेकिन इतिहास में दो ऐसे गवर्नर के नाम भी दर्ज हैं, जिन्‍होंने कभी किसी नोट पर साइन नहीं किए. अधिकतर लोगों को इस तथ्‍य की जानकारी नहीं होगी.
भारतीय रिज़र्व बैंक के वो 2 गवर्नर जिन्होंने कभी किसी नोट पर नहीं किए सिग्‍नेचर, 90% लोगों को नहीं होगी ये जानकारी

आप जिस नोट को खच करते हैं, उसे भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है. आपने देखा होगा कि हर नोट पर RBI गवर्नर के सिग्‍नेचर होते हैं. नोट पर RBI गवर्नर के हस्ताक्षर इस बात का प्रमाण हैं कि ये मुद्रा रिजर्व बैंक ने जारी की है. लेकिन आरबीआई के इतिहास में दो गवर्नर ऐसे भी रहे हैं जिन्‍होंने कभी किसी नोट पर साइन नहीं किए. इसके बारे में 90% लोगों को नहीं जानकारी होगी.

सर ओसबोर्न स्मिथ: आरबीआई के पहले गवर्नर

सर ओसबोर्न स्मिथ भारतीय रिज़र्व बैंक के पहले गवर्नर थे, उन्‍होंने कभी किसी नोट पर साइन नहीं किए. उन्होंने 1 अप्रैल, 1935 से 30 जून, 1937 तक इस पद पर काम किया. स्मिथ एक पेशेवर बैंकर थे, जिन्हें भारत आने से पहले बैंक ऑफ न्यू साउथ वेल्स और कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया में काम करने का लंबा अनुभव था. भारत में, वे 1926 में इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजिंग गवर्नर बने और बैंकिंग जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई.

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हस्ताक्षर क्यों नहीं हुए?

आरबीआई के पहले गवर्नर होने के बावजूद, सर ओसबोर्न स्मिथ के हस्ताक्षर वाला कोई भी भारतीय नोट कभी जारी नहीं हुआ. इसका मुख्य कारण तत्कालीन सरकार के साथ उनके नीतिगत मतभेद थे. विनिमय दरों और ब्याज दरों जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनका सरकार के साथ टकराव था. सरकार और उनके बीच ये मतभेद इतने बढ़ गए कि उन्होंने अपना साढ़े तीन साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया. इन तनावपूर्ण संबंधों और उनके इस्तीफे के कारण, उनके हस्ताक्षर वाले नोट छापने की प्रक्रिया कभी पूरी नहीं हो पाई.

के.जी. अम्बेगाओंकर: सबसे कम कार्यकाल वाले गवर्नरों में से एक

कृष्णनाथ गणेश अम्बेगाओंकर, जिन्हें के.जी. अम्बेगाओंकर के नाम से जाना जाता है, भारतीय रिज़र्व बैंक के पांचवें गवर्नर थे. वे भारतीय सिविल सेवा के एक सदस्य थे और गवर्नर बनने से पहले वित्त सचिव के पद पर भी कार्य कर चुके थे. उनका कार्यकाल बी. रामा राउ के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ था. के.जी. अम्बेगाओंकर के सिग्‍नेचर वाला भी कोई नोट कभी जारी नहीं हुआ.

क्यों नहीं हुए नोट पर हस्ताक्षर?

के.जी. अम्बेगाओंकर का गवर्नर के रूप में कार्यकाल बहुत ही छोटा था. वे केवल 45 दिनों के लिए, 14 जनवरी, 1957 से 28 फरवरी, 1957 तक इस पद पर रहे. उन्हें एक अंतरिम गवर्नर के रूप में नियुक्त किया गया था, जब तक कि एच.वी.आर. आयंगर पदभार ग्रहण नहीं कर लेते. उनका कार्यकाल इतना छोटा था कि इस दौरान किसी भी नए बैंकनोट को छापने की जरूरत ही नहीं पड़ी, और इसी वजह से गवर्नर के तौर पर उनके हस्ताक्षर किसी भी भारतीय नोट पर नहीं आ पाए.

हालांकि, एक दिलचस्प तथ्य ये है कि गवर्नर के रूप में भले ही उनके हस्ताक्षर नोट पर न हों, लेकिन वित्त सचिव के रूप में उनके हस्ताक्षर स्वतंत्रता के बाद जारी हुए एक रुपए के नोट पर मौजूद हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि एक रुपए का नोट भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है और उस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं, जबकि अन्य सभी नोट आरबीआई द्वारा जारी किए जाते हैं और उन पर आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं.


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