आज के दौर में जब हम अपनी हर छोटी-बड़ी खरीदारी के लिए डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करते हैं, तो मन में एक डर हमेशा बना रहता है. वह डर है, कहीं कोई ट्रांजैक्शन गलत न हो जाए या कोई फ्रॉड न हो जाए.
अब तक ऐसी स्थिति में ग्राहकों को चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआइ ने एक नया ड्राफ्ट पेश किया है जो आम आदमी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. अब अगर आपके साथ कोई डिजिटल धोखाधड़ी होती है, तो आपको डरने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि बैंक अब आपकी सुरक्षा के लिए और भी ज्यादा जवाबदेह होने वाले हैं.
छोटे फ्रॉड पर पहली बार मिलेगा मुआवजा
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- आरबीआइ के नए प्रस्ताव में छोटे डिजिटल फ्रॉड के मामलों में पहली बार मुआवजे का प्रावधान किया गया है.
- यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है जो अक्सर छोटे ट्रांजैक्शन के दौरान धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं.
- अगर आपके साथ 50,000 रुपये तक की धोखाधड़ी होती है, तो आपको मुआवजा पाने का हक होगा.
- 29,412 रुपये तक के नुकसान पर अब आपको पूरे 85 फीसदी तक का मुआवजा मिल सकेगा.
- वहीं, अगर नुकसान 29,412 रुपये से 50,000 रुपये के बीच है, तो अधिकतम 25,000 रुपये का मुआवजा तय किया गया है.
मुआवजे का भुगतान कौन और कैसे करेगा?
- यह मुआवजा कोई एक संस्था नहीं, बल्कि तीन पक्ष मिलकर देंगे.
- भुगतान करने वाली टीमों में आरबीआइ, ग्राहक का अपना बैंक और जिस बैंक में पैसा गया है यानी लाभार्थी बैंक शामिल हैं.
- यह मुआवजा जीवन में केवल एक बार ही मिल सकेगा.
- यह नियम डिजिटल पेमेंट स्कैम को भी फ्रॉड के दायरे में लाता है.
- सरकार और बैंक मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ग्राहक का भरोसा डिजिटल पेमेंट पर बना रहे.
बैंकिंग सुरक्षा और 24x7 रिपोर्टिंग की सख्ती?
- सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत, 500 रुपये से अधिक के हर डिजिटल ट्रांजैक्शन पर एसएमएस अलर्ट अनिवार्य होगा.
- बैंकों को अब अपने ग्राहकों के लिए 24x7 फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम देना होगा.
- ग्राहक अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए फोन बैंकिंग, एसएमएस, ईमेल, आईवीआर और टोल-फ्री हेल्पलाइन का इस्तेमाल कर सकेंगे.
- इन सभी सुविधाओं के लिए बैंक ग्राहकों से कोई भी अतिरिक्त चार्ज नहीं ले सकेंगे.
- आरबीआइ का स्पष्ट निर्देश है कि बैंक ग्राहकों के लिए ये सेवाएं हमेशा उपलब्ध रखें.
गलती साबित करने की जिम्मेदारी किसकी?
- यह सबसे अहम बदलाव है कि फ्रॉड के मामलों में ग्राहक की गलती साबित करने की पूरी जिम्मेदारी बैंक की होगी.
- अब तक ग्राहकों को यह साबित करना पड़ता था कि उनकी गलती नहीं है, लेकिन अब यह बोझ बैंकों पर होगा.
- यदि शिकायत मिलने के बाद कोई फ्रॉड होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित बैंक की मानी जाएगी.
- डिजिटल फ्रॉड से जुड़ी शिकायतों का समाधान अब अधिकतम 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा.
- नियामकीय एसएमएस के लिए बैंक ग्राहकों से कोई भी चार्ज वसूलने के हकदार नहीं होंगे.
अब निश्चिंत होकर करें डिजिटल ट्रांजैक्शन
रिजर्व बैंक का यह कदम डिजिटल इंडिया के सपने को और भी सुरक्षित बनाता है. बैंकों को जवाबदेह बनाकर और ग्राहकों के लिए मुआवजा प्रक्रिया को सरल कर आरबीआइ ने साबित कर दिया है कि वे आम आदमी के डिजिटल अनुभव को लेकर कितने गंभीर हैं. अब डिजिटल पेमेंट करते समय आप बिना किसी बड़े डर के निश्चिंत होकर ट्रांजैक्शन कर सकते हैं.